मंगलवार, 7 जुलाई 2015

नरेंद्र मोदी उज्बेकिस्तान में

भाषा व्यक्तिव विकास में सहायक और संगीत हिंसा कीओर जाने से रोकता है-मोदी
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ताशकंद l प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज यहां भारतविद और छात्रों को सम्बोधित करते हुए कहा कि भाषा व्यक्तित्व के विकास में बहुत सहायक होती है l स्व भाषा में अपनापन होता है l उन्होंने वहाँ प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम को इंगित करते हुए कहा संगीत सार्वभौमिक है और यह वह हिंसा की ओर जाने से रोकता है l
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी उज़बेकिस्तान की यात्रा अत्यंत सफल रही l कई महत्वपूर्ण समझौते और करार हुए l उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबन्ध और प्रगाढ़ होंगे l
भारतीय छात्रों ने नृत्य और हिंदी गाने गाये l इनमें लालबहादुर शास्त्री को समर्पित गीत जय जवान जय किसान प्रस्तुत किया l मोदी ने उज़बेकिस्तान के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का आभार माना l
प्रधानमंत्री ने ताशकंद में स्थित पूर्व प्रधानमंत्री स्व.लालबहादुर शास्त्री के स्मारक पर श्रद्धा सुमन अर्पित किये l शास्त्रीजी का 1965में ताशकंद में ही रहस्यमयी परिस्थियों में निधन हुआ था l
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी थोड़ी देर बाद में यहां से कजाकिस्तान रवाना होंगे l

भाषा व्यक्तिव विकास में सहायक और संगीत हिंसा की ओर जाने से रोकता है-मोदी
ताशकंद l प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज यहां भारतविद और छात्रों को सम्बोधित करते हुए कहा कि भाषा व्यक्तित्व के विकास में बहुत सहायक होती है l स्व भाषा में अपनापन होता है l उन्होंने वहाँ प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम को इंगित करते हुए कहा संगीत सार्वभौमिक है और यह वह हिंसा की ओर जाने से रोकता है l
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी उज़बेकिस्तान की यात्रा अत्यंत सफल रही l कई महत्वपूर्ण समझौते और करार हुए l उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबन्ध और प्रगाढ़ होंगे l
भारतीय छात्रों ने नृत्य और हिंदी गाने गाये l इनमें लालबहादुर शास्त्री को समर्पित गीत जय जवान जय किसान प्रस्तुत किया l मोदी ने उज़बेकिस्तान के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का आभार माना l
प्रधानमंत्री ने ताशकंद में स्थित पूर्व प्रधानमंत्री स्व.लालबहादुर शास्त्री के स्मारक पर श्रद्धा सुमन अर्पित किये l शास्त्रीजी का 1965में ताशकंद में ही रहस्यमयी परिस्थियों में निधन हुआ था l
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी थोड़ी देर बाद में यहां से कजाकिस्तान रवाना होंगे l
एक खास बात --
भारत में दिखे न दिखे विदेशों में प्रधानमंत्री के कार्यक्रमों में बैनर पर हिंदी की छटा जरूर दिखती है। भारतीय अफसरों को अंग्रेजी ज्यादा भाती है, इसलिए प्रधानमंत्री की बात भी कम समझ आती है।
प्रस्तुत कर्त्ता
संपत देवी मुरारका
अध्यक्षा, विश्व वात्सल्य मंच
लेखिका यात्रा विवरण
मीडिया प्रभारी
हैदराबाद


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