मंगलवार, 18 अगस्त 2015

10वें विश्व हिंदी सम्मेलन के संदर्भ में।



 10वें विश्व हिंदी सम्मेलन के संदर्भ में।

स्कूलों में कंप्यूटर आदि पर हिंदी में कार्य के लिए इन्स्क्रिप्ट की-बोर्ड  के प्रशिक्षण को पाठ्यक्रम में शामिल करना अत्यन्त आवश्यक है।
हिंदी व भारतीय-भाषा प्रेमी मित्रों,
इंटरनेट पर भारत विश्व में दूसरे स्थान पर है फिर भी भारतीय भाषाएँ इंटरनेट पर बुरी तरह पिछड़ रही हैं । अनजान नाम वाली भाषाएं भी भारतीय भाषाओं से बहुत आगे हैं । एक बड़ा कारण यह है कि भारतवासी अब अपनी भाषा में या अपनी लिपि में न लिखकर अंग्रेजी भाषा व लिपि में लिखते हैं कोई भी भारतीय भाषा इंटनेट पर उपयोग की जाने वाली 20 शीर्षस्थ भाषाओं में सम्मिलित नहीं है। हाल - फिलहाल कोई संभावना भी नहीं दिख रही। ऐसे अनेक लोग जो हिंदी -प्रेमी या हिंदी के साहित्यकार वगैरह  हैं और वे जो मीडिया, सिनेमा ,शिक्षा तथा राजभाषा आदि क्षेत्रों  में हिंदी की नौकरी कर उससे अपना जीवनयापन कर रहे हैं, ऐसे लोगों में भी  बड़ी संख्या में ऐसे हैं जो हिंदी को भी देवनागरी लिपि के बजाए अंग्रेजी की लिपि यानि रोमन लिपि में लिखते हैं। यह स्थिति भारत की लगभग सभी भाषाओं की है। नई पीढ़ी तो हिंदी और देवनागरी से ही दूर हो रही है, कंप्यूटर और इंटरनेट पर हिंदी व अन्य भारतीय भाषों की लिपियों में लिखने की तो बात काफी आगे की है। 

इन स्थितियों के अनेक कारण हैं जिन पर लंबी चर्चा हो सकती है । कुछ मानसिकता  और कुछ विवशता। एक प्रमुख कारण यह है कि हमारे देश में स्कूल-कॉलेजों में कंप्यूटर पर काम करना केवल रोमन लिपि में ही सिखाया जाता है। पूरे देश में शायद ही किसी स्कूल-कॉलेज में किसी भारतीय भाषा की लिपि में  कंप्यूटर पर काम करना सिखाया जाता हो । कंप्यूटर, मोबाइल आदि पर हर समय लगे रहनेवाले ज्यादातर युवाओं को यह तक नहीं पता होता कि उनके कंप्यूटर, मोबाइल आदि पर उनकी भाषा पहले से उपलब्ध है और आसानी से अपनी भाषा में काम संभव है। जब कहीं कोई सिखाने - बताने या अभ्यास करवाने की व्यवस्था ही नहीं तो यह होना स्वभाविक ही है । जबकि  भारतीय भाषाओं के लिए यूनिकोड की व्यवस्था होेने और सभी भारतीय भाषाओं के लिए इन्स्क्रिपट  कुंजी पटल आ जाने के बाद काफी सरल हो गया है । भारत सरकार के अनुसार तो मात्र 18-19 घंटे के अभ्यास से अंग्रेजी टंकण जाननेवाला  व्यक्ति  इन्स्क्रिपट  कुंजी पटल के माध्यम से हिंदी टंकण में पारंगत हो सकता है। स्कूल-कॉलेज में यदि कुछ  दिनों तक घंटा भर इस वैजानिक इन्स्क्रिपट  कुंजी पटल का प्रशिक्षण दिया जाए और इसे स्कूल स्तर पर आई टी. शिक्षा के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाए तो देश के बच्चे देश की किसी भी भाषा में कंप्यूटर पर कार्य करने में सक्षम होंगे, चाहे फिर हिंदी हो, मातृभाषा हो या राज्य की राजभाषा। हालांकि यह काम बहुत पहले प्रारंभ होना चाहिए था लेकिन अगर अब भी प्रारंभ न किया तो जो नुकसान होगा उसकी भरपाई करना कठिन होगा।

वैश्विक हिंदी सम्मेलन के मंच से यह माँग अनेक बार हिंदी भाषी राज्यों  के मुख्य मंत्रियों के सामने  तथा संघ सरकार के सामने रखी भी गई है लेकिन अभी तक तो कुछ खास होता नहीं दिखा। डॉ. ओम विकास जिन्होंने प्रारंभ में सरकारी स्तर पर हिंदी व भारतीय भाषाओँ के लिए  कंप्यूटर पर कार्य का मार्ग प्रशस्त किया था, जब मैंने यह बात उनके सामने रखी तो उन्होंने चौंकानेवाली जानकारी सामने रखी । उन्होंने बताया कि जब वे केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ( CBSE ) की आई.टी. शिक्षा पाठ्यक्रम  समिति में थे तो समिति  ने स्कूलों में इन्स्क्रिपट कुंजी पटल का प्रशिक्षण  आई टी. शिक्षा के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने का निर्णय किया था । बाद में क्या और क्यों हुआ पता नहीं । वे कहते हैं,'इस समस्या का समाधान सम्मेलनों के प्रस्तावों से नहीं निकलेगा । पिछले दशक में हिन्दी के कई मंचों पर आवाज उठाई है । लेख भी लिखे। हिन्दी के सभी मठ सम्मेलन समापन के साथ समस्या को भूल जाते हैं। बड़े  दु:ख के साथ  ऐसा कहने के लिए क्षमा करें।'

वैश्विक हिंदी सम्मेलन के मंच से उसके बाद भी यह सुझाव अनेक स्तरों पर भेजा व रखा गया है। यदि ऐसा हो पाता है तो निश्चित रूप से इंटरनैट पर हिंदी  व अन्य भारतीय भाषाओँ  के प्रयोग में वृद्धि होगी। इस मंच से जुड़े कई सक्रिय हिंदी सेवी लगातार भारत सरकार और राज्य सरकारों को लिखते रहे हैं  पर हुआ क्या?  कोई बाधा या कारण कहीं दिखता तो नहीं पर कुछ होता भी नहीं ।10वें विश्व हिंदी सम्मेलन में भी हम और अनेक हिंदी व अन्य भारतीय-भाषा प्रेमी इस बार भी यह मुद्दा उठाएंगे लेकिन क्या होगा ?  पता नहीं । 

बेहतर तो यह हो कि जिस राज्य में '10वां विश्व हिंदी सम्मेलन' आयोजित हो रहा है वहाँ की सरकार पहले ही दिन अपने राज्य के संदर्भ में अपने राज्य के सभी ( सरकारी व गैरसरकारी) स्कूलों में  हिंदी  में कार्य के लिए कंप्यूटर आदि पर  इन्स्क्रिप्ट की-बोर्ड के प्रशिक्षण को पाठ्यक्रम में शामिल करने की घोषणा करे । इससे राज्य के लोगों की ही नहीं देश के हिंदी व भारतीय-भाषा प्रेमियों की आकांक्षा पूरी होगी और बंद रास्ता खुलेगा  तथा पूरे देश को एक संदेश जाएगा । राज्य की भी वाह-वाही ! यदि इस सम्मेलन में पूरे देश के स्कूलों के लिए इन्स्क्रिप्ट की-बोर्ड पर कार्य को पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय (जो लागू हो) भी हो जाए तो मैं '10वें विश्व हिंदी सम्मेलन'  को सफल मानूँगा । हिंदी और भारतीय भाषाओं के प्रवाह को इस छोटे से पेंच ने रोक कर रखा है।   

  '10वें विश्व हिंदी सम्मेलन ' में हर बार की तरह बड़े-बड़े लोग बड़ी-बड़ी बातें करेंगे।  हम जैसे हिंदी व भारतीय भाषाओं के छोटे-छोटे कार्यकर्ता यदि मिलकर इस बिंदू पर जोर डालें तो शायद कुछ बात बने। मेरा अनुरोध है कि इसके लिए हम पुरजोर माँग रखें । '10वें विश्व हिंदी सम्मेलन' के अलावा भी हर स्तर पर इस छोटे काम के लिए हम निरन्तर प्रयास करें और भगीरथ की भांति हिंदी व भारतीय भाषाओं के प्रवाह को रोककर खड़ी इस चट्टान को हटा दें ताकि हमारी भाषाएं इंटरनेट और प्रौद्योगिकी के रास्तों से हो कर अविरल बह सकें।

डॉ. एम.एल. गुप्ता 'आदित्य'
निदेशक
वैश्विक हिंदी सम्मेलन
वेबसाइट- www.vhindi.in
वेबसाइट - वैश्विकहिंदी.भारत


​​
 ई पत्रिका - 'जय विजय' संलग्न है।

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें