शनिवार, 27 फ़रवरी 2016

विषय: विदेश मंत्रालय के कांसुलर, पारपत्र एवं वीज़ा प्रभाग द्वारा राजभाषा सम्बन्धी प्रावधानों के निरन्तर उल्लंघन की शिकायत, श्रीमती विधि जैन

सेवा में,
1. श्रीमती सुषमा स्वराज
माननीय विदेश मंत्री, भारत सरकार
नई दिल्ली

2. संयुक्त सचिव 
कांसुलरपारपत्र एवं वीज़ा प्रभाग
विदेश मंत्रालय, भारत सरकार

विषय: विदेश मंत्रालय के कांसुलरपारपत्र एवं वीज़ा प्रभाग द्वारा राजभाषा सम्बन्धी प्रावधानों के निरन्तर उल्लंघन की शिकायत 

महोदया/महोदय,
इस सम्बन्ध में मैं पहले भी कई ईमेल लिख चुकी हूँ, मैंने दिनांक : १८/०१०/२०१४ को आपको पहला पत्र लिखा था और उसके बाद 15 स्मरण-पत्र लिख चुकी हूँ पर अब तक एक का भी जवाब विदेश मंत्रालय अथवा कांसुलरपारपत्र एवं वीज़ा प्रभाग से नहीं मिला है इसलिए पुनः यह शिकायत भेज रही हूँ।   

मेरी शिकायत के मुख्य बिंदु हैं:
1.     जुलाई 2008 को संसदीय राजभाषा समिति की आठवीं रिपोर्ट की सिफारिश 73 पर भारत के राष्ट्रपति जी ने आदेश जारी किया था कि विदेश मंत्रालय पासपोर्ट की सभी प्रविष्ठियाँ द्विभाषी रूप में मुद्रित करने की व्यवस्था करे. आज पूरे 7.5 वर्ष बाद भी विदेश मंत्रालय ने अब तक एक भी पासपोर्ट द्विभाषी प्रविष्टियों के साथ जारी नहीं किया है. कृपया निदेश जारी करें कि प्रभाग वेबसाइट पर सभी ऑनलाइन फॉर्म द्विभाषी बनाए जैसा चुनाव आयोग ने किया है, चुनाव आयोग के सभी ऑनलाइन फॉर्म में हिन्दी में नाम, पिता-पति नाम, पता आदि भरने की सुविधा दी गई है (इन्हें देखिए http://electoralsearch.in/ एवं  http://nvsp.in/forms/form6.html). यही व्यवस्था विदेश मंत्रालय करे तो पारपत्र को द्विभाषी रूप में जारी करने में कोई परेशानी नहीं होगी और अधिकारी तकनीकी परेशानी का झूठा बहाना बना रहे हैं जबकि अन्य अनेक देशों में पासपोर्ट 100 % द्विभाषी/त्रिभाषी रूप में कई वर्षों से जारी किए जा रहे हैं. 

2.     इसी प्रकार पासपोर्ट कार्यालयों में प्रयोग किये जा रहे सभी सॉफ्टवेयर राजभाषा कानून के नियमानुसार द्विभाषी न होकर केवल अंग्रेजी में हैं और आवेदकों को इन कार्यालयों से सभी प्रकार की रसीद आदि केवल अंग्रेजी में जारी की जाती है, इन कार्यालयों में प्रयोग होने वाली सभी स्टेशनरी/फीडबैक फॉर्म इत्यादि भी केवल अंग्रेजी में छपी होती है. 

3.     पासपोर्ट सेवा की प्रीमियम एसएमएस सेवा भी केवल अंग्रेजी में है जबकि इस सेवा के लिए आवेदकों से पैंतीस रुपये वसूल किए जा रहे हैं.  कांपावी (कांसुलर, पारपत्र एवं वीज़ा) प्रभाग ने राजभाषा #हिन्दी में एसएमएस एवं ईमेल सूचना भेजे जाने की कोई सुविधा नागरिकों नहीं दी है और नागरिकों पर जबरन अंग्रेजी थोप दी है. गूगल/फेसबुक /ट्विटर जैसी विदेशी कंपनियां उपयोगकर्ताओं को #हिन्दी में एसएमएस, हिन्दी में ओटीपी सन्देश एवं ईमेल सूचना भेजते हैं पर यह बड़े दुःख/शर्म की बात है भारत सरकार के अधिकारी अपने नागरिकों पर बहाना बनाकर अंग्रेजी थोप रहे हैं एवं हिन्दी में सुविधाएँ देना तो दूर की बात है, उस पर विचार करने को भी तैयार नहीं हैं.

आपके द्वारा शीघ्र कार्यवाही की अपेक्षा करती हूँ एवं आशा करती हूँ आप मेरे इस पत्र का शीघ्र उत्तर भिजवाएंगी.

भवदीय
श्रीमती विधि जैन
पता: ए -103, आदीश्वर सोसाइटी 
श्री दिगंबर जैन मंदिर के पीछे,
सेक्टर-9ए, वाशी, नवी मुंबई - 400 703

प्रस्तुत कर्ता:
संपत देवी मुरारका
अध्यक्षा, विश्व वात्सल्य मंच
लेखिका यात्रा विवरण
मीडिया प्रभारी
हैदराबाद

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