रविवार, 8 जुलाई 2018

भारतीय भाषा अपनाओ अभियान हिंदी को दिलाओ राष्ट्र भाषा का सम्मान


माननीय श्रीमान जी,
कृपया हमें इस मेल का जवाब जरूर दीजिये  


धन्यवाद
बिजय कुमार जैन
हिंदी वेलफेयर ट्रस्ट (अध्यक्ष, संस्थापक )
गेलार्ड ग्रुप (प्रकाशक, संपादक) 
बी/२१७, हिन्द सौराष्ट्र इंडस्ट्रियल ईस्टेट, मरोल नाका, अँधेरी ईस्ट, मुंबई - ४०००५९संपर्क: बिजय कुमार जैन : ९३२२३०७९०८, ०२२-२८५०९९९९

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ranjeet kumar ranjeetk550@gmail.com

14 जून
Hindianadiranjan1960dhmvsaripalliarunachalhindi.utpalkashyap123atanuaryakarlidhazarikarajendrakumarb.phukan.basumat.spehainary72pranabjhoyborahdj.writer.VidyapeethPaimKarabianilboroprofesorrambac.RaniikjhacopShankerdeoashokrnjha07Umamishrapm6Arun
Respected Sir

I received your mail. BEST WISHES FOR YOUR MISSION. HINDI MUST BE INDIAN LANGUAGE.
I AM WITH YOUR VISION AND MISSION. GO AHEAD WITH FIRM DETERMINATION. YOU WILL GET SUCCESS.

THANKS

Dr Ranjeet Kumar

sanjiv verma salil

14 जून
ranjeetHindianadiranjan1960dhmvsaripalliarunachalhindi.utpalkashyap123atanuaryakarlidhazarikarajendrakumarb.phukan.basumat.spehainary72pranabjhoyborahdj.writer.VidyapeethPaimKarabianilboroprofesorrambac.RaniikjhacopShankerdeoashokrnjha07Umamishrapm6
विश्ववाणी हिंदी संस्थान जबलपुर
संपर्क: ४०१ विजय अपार्टमेंट, नेपियर टाउन जबलपुर ४८२००१
चलभाष: ७९९९५५९६१८, ९४२५१८३२४४, ईमेल: salilsanjiv@gmail.com
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ईकाई स्थापना : सभी हिंदी प्रेमियों से अनुरोध है कि विश्ववाणी हिंदी संस्थान की ईकाई अपने स्थान पर स्थापित कर हिंदी भाषा और साहित्य के विकास, संवर्धन और सृजन में सहायक हों। पूर्व संचालित संस्थाएं, फेस बुक समूह भी भी सम्बद्ध होकर ईकाई बन बन सकते हैं। संस्थान का उद्देश्य हिंदी के बहुमुखी विकास तथा भारतीय भाषाओँमें सामंजस्य हेतु रचनाकारों की प्रतिभा को निखारना, कृति के प्रकाशन से पहले संशोधन सुझाना, पुरिवक/भूमिका लिखाना, सृजन को न्यूनतम लागत में प्रकाशन-सुविधा देना, प्रकाशित साहित्य पर चर्चा-समीक्षा करवाना, रचनाकारों को मार्गदर्शन व परामर्श उपलब्ध कराना, शोध में सहायता देना तथा साहित्य को समाज से जोड़ना है। अपने शहर में संस्थान की ईकाई स्थापित करने हेतु संपर्क करें। साहित्य की किसी विधा में लेखन, प्रशिक्षण, पुस्तक की पाण्डुलिपि संशोधन, भूमिका लेखन, प्रकाशन, समीक्षा, गद्यानुवाद, पद्यानुवाद आदि हेतु संपर्क करें।
सामूहिक संकलन: संस्थान द्वारा क्रमश: दोहा, लघुकथा, नवगीत, मुक्तिका (गीतिका), व्यंग्य लेख, छंद मुक्त कविता, श्रृंगार गीत, हास्य कविता, मुक्तक, बालगीत, कहानी, भक्ति गीत, हाइकु, कुण्डलिया, हिन्दी-गीत तथा राष्ट्रीय गीत संकलन प्रकाशित किये जाना हैं। इन संकलनों का संपादन करने के इच्छुक जन तथा सहभागी रचनाकार तुरंत संपर्क करें।
- : दोहा शतक एकादशी संकलन : -
विश्ववाणी हिंदी संस्थान जबलपुर के तत्वावधान में दोहा-लेखन तथा दोहाकारों को प्रोत्साहित तथा प्रतिष्ठित करने का उद्देश्य लेकर समकालिक वरिष्ठ तथा नवोदित दोहाकारों के दोहा-शतकों का संकलन शीघ्र ही प्रकाशित किया जा रहा है। संकलन में सम्मिलित प्रत्येक दोहाकार के १०० दोहे, चित्र, संक्षिप्त परिचय (नाम, जन्म तिथि व स्थान, माता-पिता, जीवनसाथी व काव्य गुरु के नाम, शिक्षा, लेखन विधा, प्रकाशित कृतियाँ, उपलब्धि, पूरा पता, चलभाष, ईमेल आदि) १० पृष्ठों में प्रकाशित किए जाएँगे। हर सहभागी के दोहों पर संक्षिप्त विमर्शात्मक टीप तथा दोहा पर आलेख भी होगा। संपादन वरिष्ठ दोहाकार आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' द्वारा किया जा रहा है, जिन्हें संपादकीय संशोधन स्वीकार्य हों ऐसे दोहाकार सादर आमंत्रित हैं। प्रत्येक सहभागी ३०००/- अग्रिम सहयोग राशि देना बैंक, राइट टाउन शाखा जबलपुर IFAC: BKDN 0811119 में संजीव वर्मा के खाता क्रमांक 111910002247 में जमाकर पावती तुरंत ईमेल करें। संकलन प्रकाशित होने पर हर सहभागी को सम्मान पत्र तथा ११ प्रतियाँ निशुल्क भेंट की/भेजी जाएँगी। प्राप्त दोहों में आवश्यकतानुसार संशोधन का अधिकार संपादक को होगा। दोहे unicode में भेजने हेतु ईमेल- salil.sanjiv@gmail.com, चलभाष ७९९९५५९६१८, ९४२५१८३२४४ । भारतीय बोलियों / अहिंदी भाषाओँ के दोहे देवनागरी लिपि में आंचलिक शब्दों के अर्थ पाद टिप्पणी में देते हुए भेजें।
अब तक निम्न दोहाकारों के दोहे के दोहे यथावश्यक संशोधित / संपादित तथा सहभागिता निधि प्राप्त हो जाने पर प्रकाशनार्थ अनुमोदित किए जा चुके हैं। वर्ण क्रमानुसार नाम - सर्व श्री / सुश्री / श्रीमती १. अखिलेश खरे 'अखिल', २. अनिल कुमार मिश्र, ३. अरुण शर्मा, ४. आभा सक्सेना 'दूनवी', ५. कालिपद प्रसाद, ६. डॉ. गोपालकृष्ण भट्ट 'आकुल', ७. चंद्रकांता अग्निहोत्री', ८. छगनलाल गर्ग 'विज्ञ', ९. छाया सक्सेना 'प्रभु', १०. जयप्रकाश श्रीवास्तव, ११. त्रिभुवन कौल, १२. नीता सैनी, १३. डॉ. नीलमणि दुबे, १४. प्रेमबिहारी मिश्र, १५. बसंत शर्मा, १६. मिथिलेश बड़गैया, १७. रामकुमार चतुर्वेदी, १८. रामलखन सिंह चौहान, १९. रामेश्वर प्रसाद सारस्वत, २०. रीता सिवानी, २१. विजय बागरी, २२. विनोद जैन 'वाग्वर', २३. श्यामल सिन्हा, २४. शुचि भवि, २५. शोभित वर्मा, २६. श्रीधर प्रसाद द्विवेदी, २७. सरस्वती कुमारी, २८. सुरेश कुशवाहा 'तन्मय', २९ डॉ. हरि फैजाबादी, ३०. हिमकर श्याम। भाग १ व २ पूर्ण, भाग ३ में मात्र ३ स्थान शेष हैं।
निम्न सहयोगी शेष औपचारिकताएँ अविलंब पूर्ण करें ताकि उनका स्थान सुरक्षित हो सके: १. अरुण अर्णव खरे, २. उदयभानु तिवारी 'मधुकर', ३. ॐ प्रकाश शुक्ल, ४. कांति शुक्ल 'उर्मि', ५. गोपकुमार मिश्र, ६. जगन्नाथ प्रसाद बघेल, ७. महातम मिश्र, ८.राजकुमार महोबिया, ९. लता यादव, १०. विश्वंभर शुक्ल, ११. शशि त्यागी, १२. सविता तिवारी, १३. साहब लाल दशरिये, १४. सुनीता सिंह, १५.सुमन श्रीवास्तव । आप सब उक्तानुसार सहयोग निधि भेज सकते हैं। कार्य आरंभ हो जाएगा।
निम्न दोहाकारों ने सहभागिता हेतु सहमति देते हुए दोहा-लेखन को गति देना आरम्भ कर दिया है । सर्व श्री / सुश्री / श्रीमती प्रो. अपूर्व श्रीवास्तव, प्रो. हेमंत पटेल। संकलन में जुड़ने के इच्छुक कुशल दोहाकार १२० दोहे व निधि एक साथ भेज सकते हैं। विलंब न करें।
*
दोहा लेखन विधान:
१. दोहा का सर्वाधिक महत्वपूर्ण तत्व है कथ्य। कथ्य से समझौता न करें। कथ्य या विषय को सर्वोत्तम रूप में प्रस्तुत करने के लिए विधा (गद्य-पद्य, छंद आदि) का चयन किया जाता है। विधा के विधान रस तथा सौंदर्यवर्धन हेतु है। उनका पालन किया जाना चाहिए किंतु कथ्य की कीमत पर नहीं। दोहाकार कथ्य और विधान दोनों को साधने पर ही सफल होता है।
२. . दोहा द्विपदिक छंद है। दोहा में दो पंक्तियाँ (पद) होती हैं। हर पद में दो चरण होते हैं।
३. दोहा मुक्तक छंद है। कथ्य (जो बात कहना चाहें वह) एक दोहे में पूर्ण हो जाना चाहिए। सामान्यत: प्रथम चरण में उद्भव, द्वितीय-तृतीय चरण में विस्तार तथा चतुर्थ चरण में उत्कर्ष या समाहार होता है।
४. विषम (पहला, तीसरा) चरण में १३-१३ तथा सम (दूसरा, चौथा) चरण में ११-११ मात्राएँ होती हैं।
५. तेरह मात्रिक पहले तथा तीसरे चरण के आरंभ में एक शब्द में जगण (लघु गुरु लघु) वर्जित होता है। पदारंभ में 'इसीलिए' वर्जित, 'इसी लिए' मान्य।
६. विषम चरणांत में 'सरन' तथा सम चरणांत में 'जात' से लय साधने में सरलता होती है किंतु अन्य गण-संयोग वर्जित नहीं हैं।
७. विषम कला से आरंभ दोहे के विषम चरण मेंकल-बाँट ३ ३ २ ३ २ तथा सम कला से आरंभ दोहे के विषम चरण में में कल बाँट ४ ४ ३ २ तथा सम चरणों की कल-बाँट ४ ४.३ या ३३ ३ २ ३ होने पर लय सहजता से सध सकती है।
८. हिंदी दोहाकार हिंदी के व्याकरण तथा मात्रा गणना नियमों का पालन करें। दोहा में वर्णिक छंद की तरह लघु को गुरु या गुरु को लघु पढ़ने की छूट नहीं होती।
९. आधुंक हिंदी / खड़ी बोली में खाय, मुस्काय, आत, भात, आब, जाब, डारि, मुस्कानि, हओ, भओ जैसे देशज / आंचलिक शब्द-रूपों का उपयोग न करें। बोलियों में दोहा रचना करते समय उस बोली का यथासंभव शुद्ध रूप व्यवहार में लाएँ।
१०. श्रेष्ठ दोहे में लाक्षणिकता, संक्षिप्तता, मार्मिकता (मर्मबेधकता), आलंकारिकता, स्पष्टता, पूर्णता, सरलता तथा सरसता होना चाहिए।
११. दोहे में संयोजक शब्दों और, तथा, एवं आदि का प्रयोग यथासंभव न करें। औ' वर्जित 'अरु' स्वीकार्य। 'न' सही, 'ना' गलत। 'इक' गलत।
१२. दोहे में यथासंभव अनावश्यक शब्द का प्रयोग न हो। शब्द-चयन ऐसा हो जिसके निकालने या बदलने पर दोहा अधूरा सा लगे।
१३. दोहा में विराम चिन्हों का प्रयोग यथास्थान अवश्य करें।
१४. दोहे में कारक (ने, को, से, के लिए, का, के, की, में, पर आदि) का प्रयोग कम से कम हो।
१५. दोहा सम तुकांती छंद है। सम चरण के अंत में सामान्यत: वार्णिक समान तुक आवश्यक है। संगीत की बंदिशों, श्लोकों आदि में मात्रिक समान्त्तता भी राखी जाती रही है।
१६. दोहा में लय का महत्वपूर्ण स्थान है। लय के बिना दोहा नहीं कहा जा सकता। लयभिन्नता स्वीकार्य है लयभंगता नहीं
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मात्रा गणना नियम
१. किसी ध्वनि-खंड को बोलने में लगनेवाले समय के आधार पर मात्रा गिनी जाती है।
२. कम समय में बोले जानेवाले वर्ण या अक्षर की एक तथा अधिक समय में बोले जानेवाले वर्ण या अक्षर की दो मात्राएँ गिनी जाती हैंं। तीन मात्रा के शब्द ॐ, ग्वं आदि संस्कृत में हैं, हिंदी में नहीं।
३. अ, इ, उ, ऋ तथा इन मात्राओं से युक्त वर्ण की एक मात्रा गिनें। उदाहरण- अब = ११ = २, इस = ११ = २, उधर = १११ = ३, ऋषि = ११= २, उऋण १११ = ३ आदि।
४. शेष वर्णों की दो-दो मात्रा गिनें। जैसे- आम = २१ = ३, काकी = २२ = ४, फूले २२ = ४, कैकेई = २२२ = ६, कोकिला २१२ = ५, और २१ = ३आदि।
५. शब्द के आरंभ में आधा या संयुक्त अक्षर हो तो उसका कोई प्रभाव नहीं होगा। जैसे गृह = ११ = २, प्रिया = १२ =३ आदि।
६. शब्द के मध्य में आधा अक्षर हो तो उसे पहले के अक्षर के साथ गिनें। जैसे- क्षमा १+२, वक्ष २+१, विप्र २+१, उक्त २+१, प्रयुक्त = १२१ = ४ आदि।
७. रेफ को आधे अक्षर की तरह गिनें। बर्रैया २+२+२आदि।
८. अपवाद स्वरूप कुछ शब्दों के मध्य में आनेवाला आधा अक्षर बादवाले अक्षर के साथ गिना जाता है। जैसे- कन्हैया = क+न्है+या = १२२ = ५आदि।
९. अनुस्वर (आधे म या आधे न के उच्चारण वाले शब्द) के पहले लघु वर्ण हो तो गुरु हो जाता है, पहले गुरु होता तो कोई अंतर नहीं होता। यथा- अंश = अन्श = अं+श = २१ = ३. कुंभ = कुम्भ = २१ = ३, झंडा = झन्डा = झण्डा = २२ = ४आदि।
१०. अनुनासिक (चंद्र बिंदी) से मात्रा में कोई अंतर नहीं होता। धँस = ११ = २आदि। हँस = ११ =२, हंस = २१ = ३ आदि।
मात्रा गणना करते समय शब्द का उच्चारण करने से लघु-गुरु निर्धारण में सुविधा होती है। इस सारस्वत अनुष्ठान में आपका स्वागत है। कोई शंका होने पर संपर्क करें।
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                                                                      ॐ
                                                      
                       विश्व वाणी हिंदी संस्थान - समन्वय प्रकाशन अभियान जबलपुर 
                                                                    ***
              ll हिंदी आटा माढ़िए, उर्दू मोयन डाल l 'सलिल' संस्कृत सान दे, पूड़ी बने कमाल ll  
ll जन्म ब्याह राखी तिलक, गृह प्रवेश त्यौहार  'सलिल' बचा पौधे लगा, दें पुस्तक उपहार ll
                                                                     * 

                                                                                                                                संदेश में फोटो देखें

                                                                                                                          (संजीव वर्मा 'सलिल')
                                                                                                                    २०४ विजय अपार्टमेंट, नेपियर टाउन,
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                                                                                                                         salil.sanjiv@gmail.com
                                                                                                                          www.divyanarmada.in
                                                                                                         


14 जून 2018 को 8:55 am को, ranjeet kumar <ranjeetk550@gmail.com> ने लिखा:

Sharat Dhakad sdhakad@gmail.com

14 जून
Hindianadiranjan1960dhmvsaripalliarunachalhindi.utpalkashyap123atanuaryakarlidhazarikarajendrakumarb.phukan.basumat.spehainary72pranabjhoyborahdj.writer.VidyapeethPaimKarabianilboroprofesorrambac.RaniikjhacopShankerdeoashokrnjha07Umamishrapm6Arun
माननीय श्रीमान बिजय कुमार जी,

आपके प्रयास को साधुवाद।   


सधन्यवाद, 

शरत धाकड़ 
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Sampat Devi Murarka murarkasampatdevii@gmail.com

7:35 pm (2 मिनट पहले)
Hindi
विलंब हेतु क्षमाप्रार्थी | स्वास्थ्य खराब था 
आ. भाई बिजय कुमार जी,
नमस्कार,
आपका प्रयास विफल नहीं जाएगा | सराहनीय भी है | गत दिनों मैंने कनाडा में भी प्रचार-प्रसार किया है | वह दिन दूर नहीं जिस दिन हिन्दी को राष्ट्रभाषा का दर्जा मिलेगा | इंजन रूपी भाई बिजय कुमार जी के साथ डब्बा रूपी आपकी बहन संपत देवी मुरारका हमेशा जुड़ी रहेगी, साथ में सुपुत्र राजेश के साथ | 
सादर,
संपत 

13 जून 2018 को 5:10 pm को, Hindi welfare Trust <hindiwelfaretrust@gmail.com> ने लिखा





प्रस्तुत कर्ता : संपत देवी मुरारका, विश्व वात्सल्य मंच
murarkasampatdevii@gmail.com  
लेखिका यात्रा विवरण
मीडिया प्रभारी
हैदराबाद
मो.: 09703982136

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