शनिवार, 1 दिसंबर 2018

नाच न आए आंगन टेढ़ा

नाच न आए आंगन टेढ़ा


डॉ.देविदास प्रभु
***************************************************************
जिन लोगों को हिंदी से नफ़रत है,वही लोग देवनागरी हटाकर रोमन लिपि को अपनाने की बात कर रहे हैंl किसी भी भाषा में और उसकी लिपि में कोई कमजोरी नहीं होती है,अगर कमजोरी होती है तो वो केवल उस भाषा बोलने-लिखने वालों में होती हैl यहूदी यूरोप से जब इस्रायल आए,तब उन्होंने अपनी मृत भाषा हिब्रू को फिर से जीवित किया और उसी भाषा की लिपि को भी अपनायाl अब सभी ज्ञान हिब्रू भाषा में मौजूद हैl क्या चीनी,जापानी,कोरियाई या थाई भाषा बोलने वालों ने अपनी लिपि कमजोर कहकर रोमन लिपि को अपनाया है ? कमी किसी भाषा में नहीं,बल्कि भाषा बोलने वालों में होती हैl अपनी कमजोरी को वे भाषा पर और लिपि पर डाल देते हैंl दुनिया की छोटी-छोटी भाषाओं में जो ज्ञान मौजूद है वो ज्ञान भारत की बड़ी-बड़ी भाषाओं में नहीं हैl भारत की राजधानी के बड़े विद्यालयों में भारत सरकार की राजभाषा बोलने पर बच्चों को शिक्षा (दंड) दी जाती है,इससे बड़ी विडम्बना क्या हो सकती है ? अमेरिका की राजधानी वाशिंग्टन में सरकारी दफ्तर के करीब ही जर्मन माध्यम का विद्यालय है,वहाँ जर्मन दूतावास में काम करने वालों के बच्चे पढ़ते हैं,देखिए हममें और उनमें क्या अंतर हैl अंग्रेजी पंडितों की पहली दुश्मन है हिंदी,उसे कमजोर बनाने के लिए हिंदी में अंग्रेजी शब्दों की मिलावट करके हिंदी को बर्बाद करने की मुहिम जारी हैl हिंदी अखबारों में भरपूर अंग्रेजी शब्द,किसी अन्य भारतीय भाषा के अखबारों में अंग्रेजी शब्दों की मिलावट नहीं करते हैंl कन्नड़,मलयालम,तेलुगु आदि भाषाओं में कोई भी संस्कृत शब्द का प्रयोग कर सकते हैं। उसे उसी भाषा का शब्द माना जाएगा,मगर हिंदी की हालत यह है कि कोई भी अंग्रेजी शब्द देवनागरी में लिख दिया,तो हो गया,उसे हिंदी शब्द ही माना जाएगाl अब देवनागरी को भी हटा दिया तो बचेगा क्या ? हिंदी अपने-आप अंग्रेजी हो जाएगीl वाह रे वाह,क्या तरकीब ढूंढ ली है हमारे अंग्रेजी पंडितों ने हिंदी का अंत करने के लिएl हिंदी के विकास के लिए संविधान के अनुच्छेद ३५१ का पालन कहीं भी नहीं हुआ है,किसी संकृत या (१९५० के बाद)आठवीं अनुसूची की अन्य भाषाओं का कोई भी शब्द हिंदी में शामिल नहीं किया गया हैl इसके लिए कौन जिम्मेदार है ? हिंदी भाषा बोलने वाले ही जिम्मेदार हैं।
अंग्रेजों के जमाने में ग्रामीण लोग किसी भी अंग्रेजी शब्द का प्रयोग नहीं करते थे,कार को वे हवा गाड़ी कहते थे,मगर आज बदलाव देखिए-पति,पत्नी को भी हसबैंड-वाइफ कहते हैंl क्या हमें अंग्रेजों ने आकर शादी करना सिखाया है ? क्या हमें अंग्रेजों ने आकर अन्न खाना सिखाया है,कि हम उसे `राईस` कहें ?
अंग्रेजी एक यूरोपीय भाषा है,उसमें अन्य यूरोपीय भाषाओं के शब्द शामिल होना स्वाभाविक है,हिंदी भारतीय भाषा है,उसमें भारतीय भाषाओं के शब्द ही शामिल करें।
`हिंदी दिवस` के मौके पर सभी शपथ लें,किसी भी अंग्रेजी शब्द का प्रयोग नहीं करेंगेl
(सौजन्य:वैश्विक हिंदी सम्मेलन,मुंबई)
प्रस्तुत कर्ता : संपत देवी मुरारका, विश्व वात्सल्य मंच
murarkasampatdevii@gmail.com  
लेखिका यात्रा विवरण
मीडिया प्रभारी
हैदराबाद
मो.: 09703982136

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें