सोमवार, 16 नवंबर 2015

इंग्लैंड के बर्मिंघम शहर पहुंचा ‘वैश्विक हिंदी सम्मेलन’ शील निगम

इंग्लैंड के बर्मिंघम शहर पहुंचा ‘वैश्विक हिंदी सम्मेलन’

‘इंग्लॅण्ड’ में ‘बर्मिंघम’ शहर के ‘गीता भवन’ में श्रीमती शैल अग्रवाल जी की ई-पत्रिका ‘लेखनी’ का वार्षिक कार्यक्रम ‘लेखनी सानिध्य’ आयोजित किया गया। जहाँ ब्रिटेन के गणमान्य साहित्य-प्रेमी उपस्थित थे। तीन घंटे तक चले इस कार्यक्रम में काव्य-गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमे ब्रिटेन तथा भारत के अनेक प्रसिद्ध साहित्य-प्रेमी कवियों ने अपनी सुन्दर रचनाओं का पाठ किया. इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ‘भारत के कांउसलेट जनरल’ श्री जे के शर्मा जी थे। लंदन से ‘कथा यू.के.’ के महासचिव एवं ब्रिटेन की साहित्यिक हिन्दी पत्रिका ‘पुरवाई’ के संपादक श्री तेजेन्द्र शर्मा, लन्दन की वरिष्ठ कथाकार श्रीमती उषाराजे सक्सेना तथा कोलिंडेल वार्ड (लन्दन बरो ऑफ़ बार्नेट) की कॉउंसलर श्रीमती ज़किया ज़ुबेरी जी भी यहाँ उपस्थित थींं ।
आयोजन में ‘वैश्विक हिंदी सम्मलेन’ की ओर ‘वैश्विक हिंदी सम्मलेन’ की समन्वयक और साहित्यकार श्रीमती शील निगम ने इस साहित्यिक सभा में ‘वैश्विक हिंदी सम्मलेन’ संस्था की गतिविधियों की जानकारी तथा उद्देश्यों का संक्षिप्त परिचय दिया । इस अवसर पर श्रीमती शील निगम ने वैश्विक हिंदी सम्मलेन’ की ओर से वरिष्ठ साहित्यकार एवं ‘लेखनी’ की संपादक श्रीमती शैल अग्रवाल जी को वैश्विक हिंदी सम्मलेन’ के निदेशक डॉ. एम.एल. गुप्ता ‘आदित्य’ द्वारा लिखे पत्र की जानकारी देते हुए हिंदी भाषा एवं साहित्य के प्रति महत्वपूर्ण योगदान, हिन्दी साहित्य के प्रसार कार्य तथा राष्ट्र भाषा हिंदी के प्रति उनकी निष्ठा के लिए ‘वैश्विक हिंदी साहित्य-सारथि सम्मान’ से विभूषित करने के निर्णय की घोषणा की ।
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वैश्विक हिंदी सम्मेलन, मुंबई
vaishwikhindisammelan@gmail.com
वेबसाइट- वैश्विकहिंदी.भारत / www.vhindi.in
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वैश्विक हिंदी सम्मेलन की वैबसाइट –www.vhindi.in
‘वैश्विक हिंदी सम्मेलन’ फेसबुक समूह का पता-https://www.facebook.com/groups/mumbaihindisammelan/
संपर्क – vaishwikhindisammelan@gmail.com
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प्रस्तुत कर्त्ता
संपत देवी मुरारका
अध्यक्षा, विश्व वात्सल्य मंच
लेखिका यात्रा विवरण
मीडिया प्रभारी
हैदराबाद
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दुनिया भर के हिन्दी प्रेमियों के लिए “सार्थक” का ऑनलाईन प्रकाशन डॉ. कविता वाचक्नवी

दुनिया भर के हिन्दी प्रेमियों के लिए “सार्थक” का ऑनलाईन प्रकाशन

समाज में निरन्तर बढ़ती असम्वेदनशीलता, वैचारिक दिशाहीनता, हिन्दी के पाठकवर्ग और भाषा-प्रश्नों के मध्य उत्पन्न हुई असंलग्नता किसी भी सामाजिक रूप से जागरूक व्यक्ति को चिन्तित करने के लिए पर्याप्त है। इन चिन्ताओं को ध्यान में रखते हुए भाषा, साहित्य व वैचारिकता के कार्यों को गति देने के प्रयासों, हिन्दी को वैश्विक परिदृश्य पर और अधिक लोकप्रिय बनाने, विश्व-भर में फैले हिन्दी रचनाकारों की रचनाशीलता को रेखांकित करने, सार्थक साहित्यिक चर्चा को बढ़ावा देने एवं परस्पर सम्वाद को गतिशील बनाने हेतु एक नई (मासिक) साहित्यिक पत्रिका “सार्थक” का ऑनलाईन प्रकाशन प्रारम्भ कर रहे हैं। कालान्तर में इसका मुद्रण भी साथ-साथ करने की योजना है।
पत्रिका का कार्यभार सम्हालेंगे –
सम्पादक – डॉ. सत्य प्रकाश तिवारी
सम्पादक मण्डल – डॉ. कविता वाचक्नवी, राज हीरामन, डॉ कृष्ण कुमार श्रीवास्तव
सम्पादन सहयोग – समीर कुमार
प्रबन्ध सम्पादक – सत्येन्द्र पण्डित
सभी सम्पादक क्रम से तीन-तीन माह के अंकों का सम्पादन करेंगे।
जनवरी, फरवरी, मार्च – (डॉ कविता वाचक्नवी,​ ​​ह्यूस्टन,​ अमेरिका)
अप्रैल, मई, जून (राज हीरामन, मॉरिशस)
जुलाई, अगस्त, सितम्बर (डॉ कृष्ण कुमार श्रीवास्तव, भारत)
अक्तूबर, नवम्बर, दिसम्बर (डॉ. सत्य प्रकाश तिवारी, भारत)
पत्रिका में विविध स्तम्भों की योजना है; यथा – इतिहास से, आलोचना, विमर्श, कहानी, संस्मरण एवं यात्रा-वृत्तान्त, पुस्तक समीक्षा, काव्य, भाषा, मीडिया, समाचार, तकनीक, विश्व-साहित्य, भारतीय साहित्य, कला, अनुवाद व पाठकीय इत्यादि।
यदि आप गम्भीर साहित्य से सक्रिय जुड़े हैं, तो (जिस भी अंक में सम्मिलित होना चाहें, उसका उल्लेख करते हुए) अपनी रचनाएँ यूनिकोड (12 font size, word format) में शुद्ध टंकित कर पत्रिका के ईमेल पते saarthak.editor@gmail.com पर अथवा सीधे सम्बन्धित सम्पादक के ईमेल पते पर भिजवाएँ। रचनाओं की स्वीकृत / अस्वीकृति का अधिकार पूर्णतः सम्पादक व सम्पादक-मण्डल का होगा।
‘सार्थक’ का पहला अंक शीघ्र ही कुछ दिन में आपके हाथ में होगा। कृपया पत्रिका को सहयोग देकर अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। आपकी रचनाओं का स्वागत है
प्रस्तुत कर्त्ता
संपत देवी मुरारका
अध्यक्षा, विश्व वात्सल्य मंच
लेखिका यात्रा विवरण
मीडिया प्रभारी
हैदराबाद

अमेरिका में हिंदी सर्वाधिक बोले जाने वाली भारतीय भाषा रोहित कुमार


अमेरिका में हिंदी सर्वाधिक बोले जाने वाली भारतीय भाषा

अमेरिका जनगणना ब्यूरो ने अमरीका में बोली जाने वाली सभी भाषाओं के आंकड़े जारी किए हैं।
अमेरिका में बोले जाने वाली भारतीय भाषाओं में हिंदी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है। हिंदी बोलने वालों की संख्या लगभग 6.5 लाख है।
अमेरिका में हिंदी के अतिरिक्त अन्य भारतीय भाषाएं भी बोली जाती है। लगभग चार लाख अमेरिकी निवासी उर्दू बोलते हैं। अमेरिका में 3.7 लाख से अधिक लोग गुजराती बोलते हैं। जनगणना ब्यूरो के अनुसार 2.5 लाख से अधिक लोग बंगला और 2.5 लाख से अधिक लोग पंजाबी भाषा बोलते हैं। यहाँ 73 हजार से अधिक लोग मराठी, लगभग 9 हजार लोग सिंधी भाषा बोलते हैं, 5 हजार से अधिक लोग उड़िया, करीब 1300 लोग असमिया और करीब 1700 लोग कश्मीरी भाषा बोलते हैं। लगभग 2.5 लाख लोग तेलुगु, 1.90 लाख लोग तमिल, 1.46 लाख मलयालम और 48 हजार लोग कन्नड़ भाषा बोलते हैं।
लगभग 600 लोग बिहारी भाषा और करीब 700 लोग राजस्थानी भाषा बोलते हैं। 94us-language-chart हजार से अधिक लोग नेपाली बोलते हैं।
जनगणना ब्यूरो ने अमेरिकी समुदाय सर्वेक्षण के 2009 से 2013 के आंकड़ों के आधार पर यह जानकारी दी है कि अमेरिका में छह करोड़ से अधिक लोग घर पर अँग्रेज़ी के अलावा अन्य भाषाएं बोलते हैं। अमेरिका में घरों में अँग्रेज़ी के अलावा बोली जाने वाली शीर्ष भाषाओं में स्पेनिश, चीनी, फ्रेंच, कोरियाई, जर्मन, वियतनामी, अरबी, टागालोग और रूसी भाषा शामिल है।
प्रस्तुत कर्त्ता
संपत देवी मुरारका
अध्यक्षा, विश्व वात्सल्य मंच
लेखिका यात्रा विवरण
मीडिया प्रभारी
हैदराबाद