सोमवार, 16 नवंबर 2015

ये मीडिया वाले भाषाई अपाहिज, आगे बौद्धिक अपाहिज होंगे : राहुल देव

ये मीडिया वाले भाषाई अपाहिज, आगे बौद्धिक अपाहिज होंगे : राहुल देव

‘मीडिया की भूमिका : भाषा सीखना या सिखाना’ विषय पर माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता वि.वि. में संगोष्ठी सम्पन्न
देश के वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव ने कहा कि वर्तमान में मीडिया में हिंदी की जो स्थिति है वह लंगड़ी, लूली और अपाहिज भाषा सी है। इसका असर यह होगा कि जो लोग भाषाई अपाहिज हैं, वे आगे चलकर बौद्धिक अपाहिज हो जाएंगे। यह हिन्दी की दैनिक हत्या जैसा है। कोई भी स्वाभिमान समाज ऐसा नहीं करता, जैसा हमारे यहां हो रहा है।
वे बुधवार को राजधानी में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विवि के पत्रकारिता विभाग द्वारा आयोजित – ‘मीडिया की भूमिका : भाषा सीखना या सिखाना’ पर संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के तौर पर बोल रहे थे। राहुल ने कहा कि मीडिया की सिखाने की भूमिका, सीखने की भूमिका से ज्यादा बढ़ी है। उन्होंने कहा कि हिंदी के एफएम चैनल हिंदी को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे हैं। दुर्भाग्य से हिंदी समाज में इसका कोई संगठित विरोध भी नहीं हो रहा है। इसके विपरीत अंग्रेजी के एफएम चैनल इतना घालमेल नहीं करते। हालांकि उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि अंग्रेजी भाषा भी सीखना जरूरी है। यदि ऐसा नहीं होगा तो हम एक ही भाषा में सीमित रहेंगे, लेकिन इतना ध्यान रखना होगा कि हिंदी भाषा हमारी जमीन है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में विवि के कुलपति प्रो. बीके कुठियाला ने कहा कि मीडिया की भूमिका भाषा को सिखाने की ज्यादा है। उन्होंने कहा कि हिंदी मीडिया में इंडिया शब्द का प्रयोग होता है लेकिन अंग्रजी मीडिया में भारत शब्द का नहीं। इस गुत्थी को सुलझाना होगा। उन्होंने कहा कि जब सहिष्णुता शब्द चल सकता है तो हिंदी मीडिया में हिंदी का कोई भी शब्द चल सकता है। उन्होंने जानकारी दी कि विवि मीडिया की भाषा पर जल्द ही राष्ट्रीय संगोष्ठी करने जा रहा है। इससे पूर्व विवि के कुल सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि समाज से मीडिया की भाषा प्रभावित हो रही है या मीडिया से समाज की भाषा, इस पर विचार करने की जरूरत है। विवि के कुलाधिसचिव लाजपत आहूजा ने कहा कि मीडिया में भाषा की शुद्धता का सवाल हमेशा बना रहेगा। उन्होंने कहा कि भाषा की दुर्गति का आरोप युवा वर्ग पर है और उसे अब आगे आना होगा। पत्रकारिता विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. राखी तिवारी ने संगोष्ठी के विषय पर प्रकाश डालते हुए कार्यक्रम का संचालन किया।
वरिष्ठ पत्रकार आनंद पांडे ने कहा कि भाषा का संक्रमणकाल चल रहा है। जीवन में जड़ता से अस्तित्व पर खतरा पैदा हो जाता है। यही चीज भाषा के साथ भी है। अत: भाषा को ताकत से अधिक लचीलेपन की आवश्यकता है। अखबार का मुख्य कार्य संवाद है, और इसके लिए भाषा में समझौता करना होता है। पर यह ध्यान देने वाली बात है कि समझौता कितना करना।
वरिष्ठ पत्रकार विनोद पुरोहित ने कहा कि मीडिया में बोलचाल की भाषा के प्रयोग की बात कही। भाषा पर अधिकार और स्वाभिमान होना चाहिए। और किसी भाषा को सीखने से गुरेज नहीं होना चाहिए।
समाज पोषित मीडिया पर आधारित तीसरे सत्र में वरिष्ठ पत्रकार गिरीश उपाध्याय ने बताया कि मीडिया समाज को स्थायित्व नहीं दे रहा। बल्कि ओर अस्थायी ही कर रहा है। लोकतंत्र को अधिक टिकाऊ होना चाहिए। वरिष्ठ पत्रकार उमेश त्रिवेदी ने बताया कि समाज की तरह सारी व्यवस्थाएं भी जीर्ण-शीर्ण हो चुकी हैं। अत: समाज मीडिया को पोषित नहीं कर सकता। समाज में परिपक्वता, समझ, साहस के बिना कोई भी धारा ठीक से नहीं चलेगी। दृष्टिकोण खड़े करना मीडिया के साथ ही समाज की भी जिम्मेदारी है।
संगोष्ठी में पत्रकारिता विभाग के विद्यार्थियों के साथ ही विभाग के सभी शिक्षकों ने भी भाग लिया|
प्रेषक
डॉ. पवित्र श्रीवास्तव
निदेशक जनसंपर्क
डॉ.एम.एल.गुप्ता 
प्रस्तुत कर्त्ता
संपत देवी मुरारका
अध्यक्षा, विश्व वात्सल्य मंच
लेखिका यात्रा विवरण
मीडिया प्रभारी
हैदराबाद

गऊ क्रांति कथा और गऊ पूजन का कर्यक्रम संपन्न - राजेश विक्रांत

गऊ क्रांति कथा और गऊ पूजन का कर्यक्रम संपन्न - राजेश विक्रांत
गऊ पूजन समाज की महती आवश्यकता-महामण्डलेश्वर विश्वेश्वररानन्दजी गिरि महाराज
गऊ क्रान्ति कथा एक बेहतर पहल --प्रेम शुक्ल
वैश्विक हिंदी सम्मेलन के प्रमुख डा एम् एल गुप्ता की ख़ास उपस्थिति
मुंबई - भारत का प्रथम गौ वंश पर आधारित राष्ट्रिय साप्ताहिक समाचार पत्र "गऊ भारत भारती " और गौ रक्षक सेवा ट्रस्ट द्वारा दिनांक १२ नवम्बर को सन्यास आश्रम के महेश्वर भवन विले पार्ले पच्चिम में गऊ क्रांति कथा और गऊ पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पंडित श्री नीतेश वशिष्ठ श्रीमुख द्वारा इस गौ कथा का कार्यक्रम संपन्न हुवा इस अवसर पर गौ भारत भारती गौ सेवा सम्मान भी श्री प्रेम शुक्ल (कार्यकारी संपादक दोपहर का सामना ) श्री रमेश भाई गाला ( अध्यक्ष भगवन महावीर पशु रक्षा केंद्र एंकरवाला अहिंशा धाम ) , श्री वेंकटेश बुदुल (विश्व हिन्दू परिषद ) को दिया गया। यह सम्मान गौ सेवा के लिए प्रति वर्ष दिया जाता है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथियों में महामंडलेश्वर श्री विशेश्वरानन्द गिरि जी महाराज ने आयोजन समिति को आशीर्वचन देते हुए कहा कि -' आज गौ पूजन और गौ कथा का बड़ा महत्व है। यह वर्तमान समाज की महती आवश्यकता भी है। प्रमुख अतिथि दोपहर का सामना के कार्यकारी सम्पादक प्रेम शुक्ल ने सार्वजनिक रूप से गऊ क्रान्ति कथा को एक अनुपम पहल बताते हुए इसे सनातन धर्म का सबसे बड़ा कर्तव्य कहा।इस मौके पर
वैश्विक हिंदी सम्मेलन के प्रमुख डॉ गुप्त जी का विशेष सम्मान भी हुआ। इसमें
उमेश गायकवाड़ (प्रान्त संयोजक बजरंग दल ) , उद्योगपति बबलू पाण्डेय व् पत्रकार अनिल गलगली आदि उपस्थित रहे , कार्यक्रम का सञ्चालन राजेश विक्रांत ने किया। कार्यक्रम के आयोजन समिति के अध्यक्ष भरत अमीन के नेतृत्व में दोपहर ४ बजे से शुरू हो कर रात ९ बजे तक चले इस कार्यक्रम में काफी संख्या में गौ भक्तो ने भाग लिया , गौ पूजन का कार्यक्रम गौशाला में कार्यक्रम के प्रमुख आयोजक संजय शर्मा और मुख्य अथितियों द्वारा किया गया। अन्य सहयोगियों में अनिल विश्वकर्मा ,मंगल आनंद , अभिनेता शिवेश तिवारी, जेके न्यूज स्टेट चीफ दिनेश भारद्वाज, अनिल विश्वकर्मा, रवि यादव कवि, डॉ कामिनी गुप्ता,राहुल गायकवाड़ , लीना त्रिवेदी , जय गाला , प्रिंस शर्मा , धर्मेन्द्र पाण्डेय (सम्पादक नमस्ते बॉलीवुड), समाजसेवी विवेक मिश्र व् देवेश तिवारी आदि नाम प्रमुख हैं। आभार प्रदर्शन प्रोफसर संतोष तिवारी ने किया।
टिप्पणियाँ
प्रस्तुत कर्त्ता
संपत देवी मुरारका
अध्यक्षा, विश्व वात्सल्य मंच
लेखिका यात्रा विवरण
मीडिया प्रभारी
हैदराबाद

अंग्रेजी नहीं आने पर किसी भी कर्मचारी को दंडित नहीं किया जाएगा

अंग्रेजी नहीं आने पर किसी भी कर्मचारी को दंडित नहीं किया जाएगा

भोपाल। कोई भी अधिकारी-कर्मचारी को अंग्रेजी न आने के आधार पर दंडित नहीं किया जाएगा। हिंदी में काम करने पर यदि किसी को प्रताड़ित करने का मामला सामने आया तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी।
ऐसे निर्देश जारी करने के आदेश मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सामान्य प्रशासन विभाग को दिए हैं। दरअसल मुख्यमंत्री ने विश्व हिंदी सम्मेलन की सिफारिशों को तत्काल प्रभाव से लागू करने सामान्य प्रशासन विभाग को निर्देश जारी करने को कहा है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि मध्यप्रदेश में अब सभी प्रकार की प्रतियोगी परीक्षाएं हिंदी में ही आयोजित की जाएंगी।
मुख्य सचिव एवं सरकार के सभी वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा फाइलों पर हिंदी में ही लिखा जाए, इतना ही नहीं आपसी पत्राचार में भी हिंदी का ही उपयोग किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा है कि हाईकोर्ट चीफ जस्टिस से चर्चा के बाद ही न्यायालयों की कार्यवाही तथा निर्णय हिंदी भाषा में जारी किए जाएंगे। न्यायालयों में अनुवादकों की नियुक्ति भी की जाएगी। उल्लेखनीय है कि भोपाल में 12 सितंबर को विश्व हिंदी सम्मेलन के समापन पर सिफारिशें आई थीं, इनमें से कुछ सिफारिशों को तत्काल प्रभाव से लागू करने के लिए मुख्यमंत्री ने जीएडी को निर्देश दिए हैं।
प्रस्तुत कर्त्ता
संपत देवी मुरारका
अध्यक्षा, विश्व वात्सल्य मंच
लेखिका यात्रा विवरण
मीडिया प्रभारी
हैदराबाद