शनिवार, 20 मार्च 2021

[वैश्विक हिंदी सम्मेलन ] मनुमुक्त 'मानव' ट्रस्ट द्वारा मातृभाषा-दिवस समारोह आयोजित । झिलमिल - हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा साहित्यकार सम्मान योजना वर्ष 2017, 2018 तथा 2019 के लिए सम्मानों हेतु साहित्यकारों का चयन

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मनुमुक्त 'मानव' ट्रस्ट द्वारा मातृभाषा-दिवस समारोह आयोजित
मातृभाषा के प्रयोग से ही सर्वांगीण विकास संभव : डॉ. एम.एल. गुप्ता 'आदित्य'  

नारनौल। मातृभाषा बच्चे के लिए टॉनिक के समान होती है, जो उसमें आत्म-शक्ति के साथ आत्म-विश्वास और आत्म-गौरव का भाव भी पैदा करती है। यह कहना है वीबीएस पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर (उत्तर प्रदेश) की कुलपति डॉ. निर्मला एस. मौर्य का। मनुमुक्त 'मानव' मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा मातृभाषा दिवस पर आयोजित 'अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा-दिवस समारोह' में बतौर मुख्य अतिथि बोलते हुए उन्होंने कहा कि मातृभाषा का स्थान मां के समान होता है, जिसे कोई अन्य भाषा नहीं ले सकती। अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में  'वैश्विक हिंदी सम्मेलन', मुंबई (महाराष्ट्र) के निदेशक डॉ. एम.एल. गुप्ता 'आदित्य' ने स्पष्ट किया कि मातृभाषा के माध्यम से ही व्यक्ति का सर्वांगीण विकास संभव है। अतः हमें सर्वप्रथम मातृभाषा, फिर देश की भाषा और अंत में विश्वभाषा को अपनाना चाहिए। विश्व-नागरिक के रूप में विख्यात पूर्व राजनयिक तथा हिंदी यूनिवर्स फाउंडेशन, एमस्टर्डम (नीदरलैंड) की निदेशक डॉ पुष्पा अवस्थी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि भारतवंशी तथा प्रवासी भारतीयों ने अपनी संस्कृति और मातृभाषाओं को सहेजकर रखा है और इसीलिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी के विकास हेतु भारत सरकार को भी उनका सहयोग लेना पड़ता है। पूर्व राजनयिक तथा केंद्रीय हिंदी निदेशालय, नई दिल्ली के सहायक निदेशक डॉ दीपक पांडेय ने मातृभाषा को अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम और संस्कृति का संवाहक बताते हुए कहा कि व्यक्ति चाहे जितनी भाषाएं सीख ले, लेकिन वह सोचता अपनी मातृभाषा में ही है। अत: प्रतिभा का विकास मातृभाषा द्वारा ही संभव है। इन सबसे उलट सिंघानिया विश्वविद्यालय, पचेरी बड़ी (राजस्थान) के कुलपति डॉ. उमाशंकर यादव ने मातृभाषा की अपेक्षा राजभाषा को अपनाने पर अधिक बल दिया, ताकि राष्ट्र को एकता के सूत्र में पिरोया जा सके।

अखिल भारतीय साहित्य परिषद्, नारनौल के जिला अध्यक्ष डॉ जितेंद्र भारद्वाज द्वारा प्रस्तुत प्रार्थना-गीत के उपरांत चीफट्रस्टी डॉ रामनिवास 'मानव' के प्रेरक सान्निध्य तथा डॉ पंकज गौड़ और उर्वशी अग्रवाल 'उर्वी' के कुशल संचालन में संपन्न हुए इस समारोह में महात्मा गांधी संस्थान, मौका (मॉरीशस) के प्रोफेसर डॉ कृष्णकुमार झा, पूर्व राजनयिक तथा केंद्रीय हिंदी निदेशालय, नई दिल्ली की सहायक निदेशक डॉ नूतन पांडेय और राजभाषा विभाग, हिंदी शिक्षण योजना के प्राध्यापक, डॉ. वीरेंद्र परमार ने भी मातृभाषा के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए उसे अपनाने और शिक्षा का माध्यम बनाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि आज बच्चों को अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाना फैशन बन गया है, जो किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।

इन्होंने किया काव्य-पाठ : काव्य-कुंभ के रूप में आयोजित द्वितीय सत्र में छह महाद्वीपों और एक दर्जन देशों के कवियों-कवयित्रियों ने सहभागिता की, जिनमें महेंद्र नगर (नेपाल) के हरीशप्रसाद जोशी और प्रो खगेंद्रनाथ बियोगी, पर्थ  (ऑस्ट्रेलिया) की रीता कौशल दार-एस-सलाम (तंजानिया) के अजय गोयल, नैरोबी (केन्या) की मनीषा कंठालिया, मोका (मॉरीशस) के डॉ कृष्णकुमार झा, आबूधाबी (यूएई) की ललिता मिश्रा, दोहा (कतर) के बैजनाथ शर्मा, एमस्टर्डम (नीदरलैंड) की डॉ पुष्पिता अवस्थी, लैडिंग (सूरीनाम) की सुषमा खेदू, पोर्ट ऑफ स्पेन (त्रिनिडाड) की आशा मोर, अमेरिका से आयोवा की डॉ  श्वेता सान्हा और सैन डियागो की डॉ कमला सिंह तथा भारत से पटियाला (पंजाब) के नरेश नाज़, नई दिल्ली की उर्वशी अग्रवाल 'उर्वी', शाहजहांपुर (उत्तर प्रदेश) की सरिता वाजपेई, पचेरी बड़ी (राजस्थान) के डॉ उमाशंकर यादव, दादरी की पुष्पलता आर्य, गुरुग्राम की मोनिका शर्मा और  नारनौल के डॉ रामनिवास 'मानव' का नाम शामिल है। इस अवसर पर हिंदी, उर्दू, नेपाली, पंजाबी, हरियाणवी, राजस्थानी, अवधी, सरायकी, डोट्याली आदि एक दर्जन प्रमुख भाषाओं और बोलियों में कविताएं पढ़ी गईं।

इनकी रही विशिष्ट उपस्थिति :  लगभग चार घंटों तक चले इस महत्त्वपूर्ण और ऐतिहासिक समारोह में विश्वबैंक, वाशिंगटन डीसी (अमेरिका) की अर्थशास्त्री डॉ एस अनुकृति और कंसल्टेंट प्रो  सिद्धार्थ रामलिंगम, गुजरात सिंधी अकादमी, अहमदाबाद के पूर्व अध्यक्ष डॉ हूंदराज बलवाणी, हरियाणा साहित्य अकादमी, पंचकूला के पूर्व निदेशक डॉ  पूर्णमल गौड़, जगन्नाथ हिंदी महाविद्यालय, तलश्शेरी (केरल) के संचालक डॉ पीए रघुराम, महिला महाविद्यालय, पीलीभीत (उत्तर प्रदेश) की प्राचार्या डॉ संध्या तिवारी, चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय, भिवानी की प्रोफेसर डॉ सुशीला आर्य, निगरानी समिति, नारनौल के अध्यक्ष महेंद्रसिंह गौड़, अररिया (बिहार) के डॉ जनार्दन यादव, अलवर (राजस्थान) के संजय पाठक, नई दिल्ली के विश्वजीत मजूमदार, शुभा राजपूत, वेंकटेश राव और उषाकिरण शास्त्री, हरियाणा में हिसार से डॉ राजेश शर्मा, अशोक वशिष्ठ और आरजू शर्मा, नारनौद से बलजीत सिंह और राजबाला 'राज', नारनौल से ट्रस्टी डॉ कांता भारती, कृष्णकुमार शर्मा, एडवोकेट पुष्पलता शर्मा, प्रो हितेश कुमार और राजीव गौड़ तथा अनिल कुमार, प्रतिभा मलिक, प्रवीण कुमारी, शशिकला त्रिपाठी, सीमा वर्मा आदि अन्य की उपस्थिति विशेष उल्लेखनीय रही।

डॉ. रामनिवास मानव
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हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा साहित्यकार सम्मान योजना वर्ष 2017, 2018 तथा 2019 के लिए सम्मानों हेतु साहित्यकारों का चयन

चंडीगढ़, 19 फरवरी- हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा साहित्यकार सम्मान योजना वर्ष 2017, 2018 तथा 2019 के लिए विभिन्न सम्मानों हेतु साहित्यकारों का चयन कर लिया गया है। यह जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव तथा सूचना, जनसम्पर्क एवं भाषा विभाग के महानिदेशक डॉ अमित अग्रवाल ने बताया कि अकादमी अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल द्वारा इन सम्मानों की स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 के लिए अकादमी द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर प्रदान किए जाने वाले आजीवन साहित्य साधना सम्मान (राशि 7 लाख रूपए) हेतु दिल्ली निवासी वरिष्ठ साहित्यकार एवं चिंतक डॉ. कमल किशोर गोयनका का, वर्ष 2018 के लिए दिल्ली निवासी वरिष्ठ लेखक एवं समालोचक डॉ. सुरेश गौतम तथा वर्ष 2019 के लिए चंडीगढ़ निवासी वरिष्ठ साहित्यकार एवं चिंतक श्री माधव कौशिक का चयन किया गया है।

डॉ अमित अग्रवाल ने आगे बताया कि महाकवि सूरदास आजीवन साहित्य साधना सम्मान (राशि 5 लाख रूपए) के अंतर्गत वर्ष 2017 के लिए रोहतक निवासी डॉ. पूर्णचन्द शर्मा, वर्ष 2018 के लिए भी रोहतक निवासी श्री मधुकांत तथा सोनीपत निवासी डॉ. संतराम देशवाल एवं वर्ष 2019 के लिए फरीदाबाद निवासी डॉ. सुदर्शन रत्नाकर एवं गुरुग्राम निवासी श्रीमती चन्द्रकांता का चयन किया गया है।

उन्होंने बताया कि पंडित माधव प्रसाद मिश्र सम्मान (2.50 लाख रूपए) के अंतर्गत वर्ष 2017 के लिए रोहतक निवासी डॉ. रामफल चहल, वर्ष 2018 के लिए करनाल निवासी डॉ. महावीर प्रसाद शर्मा तथा सिरसा निवासी डॉ. शील कौशिक तथा वर्ष 2019 के लिए कुरुक्षेत्र निवासी डॉ. लालचन्द गुप्त मंगल का चयन किया गया है।

इसी प्रकार,बाबू बालमुकुंद गुप्त सम्मान (2 लाख रूपए) के अंतर्गत वर्ष 2017 के लिए करनाल निवासी डॉ. अशोक भाटिया तथा कुरुक्षेत्र निवासी डॉ. दिनेश दधीचि, वर्ष 2018 के लिए सिरसा निवासी डॉ. रूप देवगुण तथा डॉ. राजकुमार निजात एवं वर्ष 2019 के लिए करनाल निवासी श्री गुलशन मदान तथा गुरुग्राम निवासी डॉ. घमण्डीलाल अग्रवाल का चयन किया गया है।

लाला देशबन्धु गुप्त सम्मान (2 लाख रूपए) के अंतर्गत वर्ष 2017 के लिए अंबाला निवासी श्री विकेश निझावन ,वर्ष 2019 के लिए कैथल निवासी श्री सुरेश जांगिड का चयन किया गया है। पण्डित लखमीचन्द सम्मान (2 लाख रूपए) के अंतर्गत वर्ष 2019 के लिए जींद निवासी श्री रामफल गौड़ का चयन किया गया है। जनकवि मेहर सिंह सम्मान (2 लाख रूपए) के अंतर्गत वर्ष 2017 के लिए कुरुक्षेत्र निवासी डॉ. महासिंह पुनिया, वर्ष 2018 के लिए रेवाड़ी निवासी श्री सत्यवीर नाहडिय़ा तथा वर्ष 2019 के लिए पानीपत निवासी डॉ. बालकिशन शर्मा एवं कैथल निवासी डॉ. राजेन्द्र बडग़ूजर, का चयन किया गया है।

डॉ अमित अग्रवाल ने बताया कि हरियाणा गौरव सम्मान (2 लाख रूपए) के अंतर्गत वर्ष 2017 के लिए दिल्ली निवासी डॉ. सारस्वत मोहन मनीषी तथा वर्ष 2018 के लिए श्री विनोद बब्बर का चयन किया गया है। हरियाणा गौरव सम्मान हरियाणा में जन्में ऐसे साहित्यकारों को प्रदान किया जाता है, जो हरियाणा से बाहर रहकर साहित्य साधना द्वारा हरियाणा को गौरवान्वित करते हैं।
उन्होंने बताया कि आदित्य अल्हड़ हास्य सम्मान (2 लाख रूपए) के अंतर्गत वर्ष 2017 के लिए फरीदाबाद निवासी श्री मनजीत सिंह एवं वर्ष 2018 के लिए नई दिल्ली निवासी श्री महेन्द्र शर्मा तथा वर्ष 2019 के लिए सोनीपत निवासी डॉ. अशोक बत्रा का चयन किया गया है।

श्रेष्ठ महिला रचनाकार सम्मान (2 लाख रूपए) के अंतर्गत वर्ष 2017 के लिए रोहतक निवासी डॉ. रोहिणी अग्रवाल तथा हिसार निवासी डॉ. शमीम शर्मा, वर्ष 2018 के लिए चंडीगढ़ निवासी श्रीमती धीरा खण्डेलवाल एवं वर्ष 2019 के लिए सोनीपत निवासी श्रीमती कमलेश मलिक तथा करनाल निवासी डॉ. ज्ञानी देवी का चयन किया गया है।

स्वामी विवेकानन्द स्वर्ण जयंती युवा लेखक सम्मान वर्ष 2017 के लिए सोनीपत निवासी डॉ. ज्योति, वर्ष 2018 के लिए कैथल निवासी डॉ. राजेश भारती तथा वर्ष 2019 के लिए जींद निवासी डॉ. शिवा का चयन किया गया है।


माननीय कमल किशोर गोयनका जी तथा मधुकांत जी सहित सभी पुरस्कृत साहित्यकारों को वैश्विक हिंदी सम्मेलन की ओर से हार्दिक बधाई।

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वैश्विक हिंदी सम्मेलन, मुंबई

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प्रस्तुत कर्ता : संपत देवी मुरारकाविश्व वात्सल्य मंच

murarkasampatdevii@gmail.com  

लेखिका यात्रा विवरण

मीडिया प्रभारी

हैदराबाद

मो.: 09703982136

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