मंगलवार, 29 मार्च 2016

"शहीदी दिवस पर अमर शहीदों को शत शत नमन !"



"शहीदी दिवस पर अमर शहीदों को शत शत नमन !"

अमर शहीदों को नमन ,
रखे सजो कर याद !
उन सब के बलिदान से ,
हम सब है आज़ाद !!
                           -कवि कृष्णा नन्द तिवारी
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पाश्चात्य देशों में होली
                                            - कादम्बरी मेहरा , लंदन 
 माननीय गुप्ता जी एवं हिंदी प्रेमियों , 
होली का त्यौहार आप सबको मुबारक हो।  

आप सबको यह जानकार हर्ष होगा कि होली का त्यौहार अब लंदन के स्कूलों में धार्मिक शिक्षा के अंतर्गत पाठ्यक्रम में शामिल है।  कक्षा ५ और ६ के बच्चों को अनेक स्कूलों में इसके विषय में बताया जाता है।  सुन्दर सरल भाषा में अंग्रेजी में किताबे छप गयी हैं जो बच्चे समझ सकते हैं।  इसे वसंत ऋतू के आगमन से जोड़ा जाता है और '' पानी '' के महत्व  का भी संवाहक कहा जाता है।   हमारा यह उत्सव अब विश्व में एक अन्य सन्देश के लिए प्रयुक्त हो रहा है।  यह त्यौहार मार्च के अंतिम  सप्ताह में आता है।  अतः २२ मार्च को '' विश्व  जल  दिवस '' घोषित कर दिया गया है।  एक अमेरिकी संस्थान नेस्ले जल योजना के अंतर्गत विश्व भर के स्कूलों में जल से होली खेलने का त्यौहार मनाया जाता है और इसी के साथ बच्चों को जल के बारे में शिक्षित किया जाता है।  इस योजना को WET नाम दिया गया है।  

अमेरिका के शहर सीएटल में एक संस्था '' सीएटल पार्टी कैंप '' ने एक आयोजन किया जिसे  '' विश्व का सबसे बड़ा जल युद्ध '' का नाम दिया।  सभी ने सड़कों पर पानी से होली खेली और इस के एवज में पैसा दान किया।  ५५ ००० डॉलर की रकम जमा हुई जो बालकों की जानलेवा बीमारियों के इलाज के लिए  अनुसंधान करनेवाली दवाई कंपनी '' कैंप कोरी ''  को  दे दी गयी। 
न्यू यॉर्क के शहर के बीच स्थित सेंट्रल पार्क के विशाल लॉन में भी २९ जून २०१३ में एक विशाल जल होली का आयोजन किया गया।  
 
इंगलैण्ड के ट्रफलगर स्क्वायर में जल से होली खेलने का रिवाज़ चल पड़ा है। जब मौसम बेहद गरम होता है यहां  दीवाने होली खेलते हैं।  ऐसा ही कई स्कूलों में भी रवाज चल पड़ा है पर यह छोटे बच्चों तक ही सीमित है और केवल समर में होता है।  अलबत्ता घरों में जिनके पास बड़े लॉन हैं वह होली की पार्टियां मनाने लगे हैं  मगर वह मौसम के अनुसार मनाई जाती हैं।  अतः मार्च में न होकर जून जुलाई या अगस्त की छुट्टियों में होती हैं।  

यूरोप में रहकर अनेक ऐसे रिवाज़ों से पाला पड़ा जो होली का ही प्रारूप हैं। जब कोई  पोत समुद्र यात्रा के समय विश्वत रेखा को लांघता है तो बड़ा उत्सव मनाया  जाता है। यात्री शैम्पेन पीते  हैं और  एक दूसरे को टमाटर अंडे केक पास्ता आदि से सराबोर कर देते हैं। आइस क्रीम युद्ध होता है और जब सब चुक जाता है तो एक दूसरे पर पानी की बौछार करते हैं।  बड़े जहाज़ों में स्विमिंग पूल होता है ,उसमे फेंक देते हैं। हाँ यह सुनिश्चित कर लिया जाता है कि आपको तैरना आता है।   

स्पेन में देखा टमाटर दिवस।  यह टमाटरों से होली खेलने का और सड़कों पर हुड़दंग मनाने का दिन होता है।  इसे '' ला टोमाटीना '' कहा जाता है।  इटली में इसी का  रूपांतर है दी बैटल ऑफ़ दी ऑरैंजेस।  यह लोग नरंगियाँ फेंकते हैं एक दूसरे पर। होली खेलने का शौक कुछ ऐसा सर चढ़  के बोलने  लगा है दुनिया भर में कि दक्षिणी कोरिया की एक सौंदर्य प्रसाधन बनानेवाली कंपनी ने बोरयांग मड फेस्टिवल  की शुरुआत कर डाली।  बोरियोंग स्थान के मिटटी के टीले प्रसिद्ध हैं। इनकी मिटटी देह पर मलने से रूप निखर आता है।  कंपनी ने इस मिटटी से उबटन बनाया और बाज़ार में उतारा।  प्रचार के लिए पैसा बचाने की खातिर उन्होंने मुफ्त इस मिटटी का लेप लगाकर शहर भर में लोगों को घुमाया ,दावत की , पटाखे चलाये। नाच गाना ,ढोल तमाशे किये फिर पानी की नालियां लगाकर सबको नहलाया। वाह वाह ! क्या आनंद आया जनता को।  लो जी शुरू हुई एक नई होली बोरियोंग  मड फेस्टिवल। अब यह दक्षिणी कोरिया का राष्र्टीय त्यौहार बन गया।  

भारत की जड़ें जिन देशों में जमी हैं सदियों से उनमे होली धूम धाम से मनाई जाती है।  ताइवान  का सोंगक्रान त्यौहार इसका सबसे ज्वलंत उदाहरण है।  यह  राष्ट्रिय पर्व है और इस दिन सरकार की ओर से शहर भर में पानी से होली खेली जाती है।  मनो पानी की बड़ी बड़ी नलियाँ लगाकर सड़कों पर छोड़ दी जाती हैं।  म्यांमार में भी यही रिवाज है मगर यह लोग इस दिन को थिंग यान कहते हैं।  इस दिन जरूर कोई अच्छा काम किसी दूसरे के लिए करते हैं।  थाईलैंड और मलेशिया में भी होली खेली जाती है परन्तु इतने जोश से नहीं क्योंकि इन देशों में इस्लाम धर्म राजकीय धर्म है। अतः यह केवल हिन्दू मनाते हैं।  बौद्ध धर्म के साथ  भी हिन्दू त्यौहार जुड़े रहे किसी न किसी रूप में अतः जहां जहां भी बौद्ध धर्म गया होली या जल सिंचन का रिवाज़ भी गया।  चीन का '' दाई '' त्यौहार पूरे तीन दिन चलता है।  पहले दिन मेला लगता है और लोग नयी वस्तुएं खरीदते हैं।  दूसरे दिन लैन्कांग नदी में दीये तैराते हैं और प्रार्थना करते हैं।  तीसरे दिन खूब सज बज के शहर के बौद्ध मंदिरों में जमा होते हैं और एक दूसरे  पर केवल पानी की वर्षा करते हैं।    पूर्वी देशों में बाली , जावा , सुमात्रा ,अक्षय ( अछेह ) , कम्बोडिया , श्री लंका  आदि देशों में होली जीवित है।  

एक बार लंदन में ही एक सखी ने कहा ,होली का उत्सव मनाया जा रहा है चलो। संग हो ली।  पहले भजन गाए गए। फिर बारी आई फ़िल्मी गानो की। अनेकों ने अपनी प्रतिभा अनुसार रंग जमाया।  कोई भी अंग्रेजी नहीं बोल रहा था।  भाषा पल्ले नहीं पड़ रही थी मगर गाने तो हमारे ही थे और साड़ियां भी हमारी ही थीं।  वही केश विन्यास ,वही गहने।  वही राम ,लखन।  फिर जी स्टेज पर आये करीब आठ व्यक्ति।  चौकड़ी मार कर बैठ गए।  बाजा ,मंजीरा ,ढोलक ,चिमटा ,और शुरू किया 
''  हे हां &&&&, लता कुञ्ज से प्रकट भये ,तेहि अवसर दोउ भाई। -----  ''
ठेठ बनारसी अंदाज में जो सीता स्वयम्बर का सस्वर गायन हुआ , मेरे रोंगटे खड़े हो गए।  पूरे तीस वर्ष बाद मैं यह रामायण सुन रही थी जो हमारे बगीचे में होनेवाली रामलीला में सुना करती थी बचपन में। और केक पर आइसिंग ---  अवध में होरी खेरें रघुबीरा !  क्या समा था।  नॉस्टेलजिया का असली मतलब उस दिन समझ में आया।  आँखों से झर - झर  आंसू। तभी किसी ने मुझपर पाउडर की वर्षा शुरू कर दी।  मैंने अंग्रेजी में कहा ,'' दिस म्यूजिक इस फ्रॉम बनारस ''. अगली ने प्यार से कहा , '' सो वर आवर एन्सेस्टर्स ''. यह लंदन में बसे  त्रिनिदाद के लोगों का उत्सव था।  यह लोग बिहार और उत्तर प्रदेश से ले जाए गए थे गन्ना उगाने  के लिए। इन्होंने संभाल रखी है वह अमूल्य सम्पदा जो हमारे देश में भी रंग छोड़ रही है. वह संगीत ,वह त्योहारों की आत्मा।  इन्हें हिंदी बोलनी नहीं आती मगर जो आता है वह हमारा है। ऐसे ही देश हैं ,सूरीनाम ,गयाना और मॉरीशस। दक्षिणी अफ्रीका ,यूगांडा और कीनिया आदि में भी हमारे त्यौहार रंग जमाते हैं।     
 
पानी और रंगों के इस खेल का प्रभाव अब विश्वव्यापी होता जा रहा है।  मगर भारत पानी के क्षेत्र में पिछड़े हुए देशों में से एक है जबकि यहां सबसे अधिक नदियां और सबसे अधिक वर्षा होती है।  इसका कारण केवल जनता की उदासीनता और अज्ञानता है।  हमारे साधू संत यदि अपनी वंदना करवाने के बजाय देश के गाँवों में  पानी के  महत्त्व का ज्ञान संचार करें तो  कितना अच्छा हो।  समय आ गया है कि हम अपने त्योहारों को आधुनिक जीवन से जोड़कर ज्ञान का माध्यम बनाएं।  

- कादम्बरी मेहरा , लंदन 
                ३५ ,दी एवेन्यू , चीम ,सरे , यु के   


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डॉ. एम.एल. गुप्ता 'आदित्य'
वैश्विक हिंदी सम्मेलन, मुंबई
प्रस्तुत कर्ता : संपत देवी मुरारका, विश्व वात्सल्य मंच.
murarkasampatdevii@gmail.com
लेखिका यात्रा विवरण
मीडिया प्रभारी
हैदराबाद

कादम्बिनी क्लब ने किया भ्रमण का आयोजन, समाचार कतरन-स्वतंत्र वार्ता


प्रस्तुति : संपत देवी मुरारका, विश्व वात्सल्य मंच
murarkasampatdevii@gmail.com

लेखिका यात्रा विवरण
मीडिया प्रभारी
हैदराबाद

सोशल मीडिया पर हिंदी के प्रसार का वृहत् वैश्विक अभियान


बैनर
सोशल मीडिया पर हिंदी के प्रसार का वृहत् वैश्विक अभियान 
वैश्विक हिंदी सम्मेलन -  गूगल समूह - फेसबुक समूह - व्हाट्सऐप समूह - जी +

बीकानेर में रचा विश्व सोशल मीडिया मैत्री सम्मेलन ने एक रिकॉर्ड
12822055_10206165039780121_1253645973_nबीकानेर। विगत दिनों जब देश के कोने-कोने और विभिन्न अन्य देशों की सोशल मीडिया से जुड़ी विभिन्न विधाओं की सौ के करीब प्रतिभाएँ एक मंच पर इकट्ठा हुईं और उन्होंने अपनी प्रतिभाओं के जौ़हर दिखाये तो सच् एक रिकार्ड ही बन गया। जी हां, हम सब साथ साथ, नई दिल्ली के तत्वावधान में और स्थानीय संस्थाओं; साहित्यिक-सामाजिक संस्था, बीकाणा आईटीआई तथा हिन्दी साहित्य मंथन आदि के सहयोग से राजस्थान के बीकानेर में 5 और 6 मार्च को चैथा सोशल मीडिया मैत्री सम्मेलन व सम्मान समारोह स्थानीय रेल्वे प्रेक्षागृह में समारोहपूर्वक आयोजित हुआ। इसमें फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्वीटर आदि जैसी आभाषी कही जाने वाली सोशल साइट्स की सैकड़ों प्रतिभायें न केवल पहली बार एक-दूसरे से रूबरू हुईं अपितु एक प्लेटफार्म पर पहली बार इकट्ठा होकर उन्होंने मैत्री-भाईचारे का एक इतिहास भी रचा। उनकी प्रतिभाओं ने सैकड़ों लोगों को उंगली दबाने पर भी मज़बूर किया। 
मैत्री-भाईचारे के पैग़ाम के साथ शुरू हुए दो दिन के इस सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में मैत्री-भाईचारे के प्रचार-प्रसार में सोशल मीडिया की भूमिका, कन्या भ्रूण हत्या, लिव इन रिलेशनशिप पर परिचर्चा के अलावा दो सत्रों में कवि सम्मेलन, मनोहारी सांस्कृतिक कार्यक्रम, पुस्तकों का विमोचन और चित्र, फोटो तथा कार्टून प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में देश के विभिन्न दूर-दराज के प्रान्तों सहित नेपाल, कनाडा और यूके से एक प्रतियोगिता के जरिये चुन कर आई फेसबुक, व्हाट्सएप और ट्वीटर आदि सामाजिक साइट्स की आभाषी दुनिया की साहित्य, संगीत, नृत्य और कला क्षेत्रों की सौ के करीब प्रतिभाओं ने अपनी विभिन्न कलाओं के प्रदर्शन से उपस्थित जन समुदाय को मंत्र मुग्ध कर दिया। 2146a1d2-382d-4ba4-b90f-5bb5739494b5
पहले दिन कला प्रदर्शनी का उद्घाटन प्रसिद्ध चित्रकार मुरली मनोहर माथुर और कनाडा से पधारे हिन्दी विद्वान सरन घई द्वारा किया गया। जिसमें विवेक मित्तल (बीकानेर) एवं संगीता राज (दिल्ली) के चित्र, मीता रॉय (गाजियाबाद) एवं सृष्टि सिन्हा (झांसी) के कार्टून्स, प्रदीप आर्यन (दिल्ली) के फोटो और हर्षित सिंह (लखनऊ) के हस्त शिल्प का प्रदर्शन किया गया। तत्पश्चात् उद्घाटन सत्र की शुरूआत दिल्ली से पधारीं सुषमा भण्डारी ने अपने मधुर कंठ से कर्ण प्रिय राजस्थानी सरस्वती वंदना गाकर की। वन्दना के बाद सम्मेलन के राष्ट्रीय संयोजक श्री किशोर श्रीवास्तव (दिल्ली) व उनकी टीम (शाह आलम, किरन बाला, शशि श्रीवास्तव, मीता राय एवं सरिता भाटिया) ने ‘इंसान का इंसान से हो भाईचारा, यही पैगाम हमारा’ गीत सुनाकर आपस में मिलजुल कर रहने का संदेश देकर सभी आगंतुकों को भाव विभोर कर दिया। प्रथम सत्र के मुख्य और विशिष्ट अतिथि थे भाजपा नेता नंदकिशोर सोलंकी, राजस्थानी अकादमी के पूर्व अध्यक्ष सत्य प्रकाश आचार्य व उद्योगपति के.बी. गुप्ता। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता कनाडा से पधारे सरन घई ने की, जबकि स्वागताध्यक्ष बीकानेर के मुख्य आयोजनकर्ता गोवर्धन चैमाल थे। 
सभी अतिथियों ने अपने उद्बोधन में भाईचारे और मैत्री के इस सम्मेलन की भूरि-भूरि प्रशंसा की। सत्र का बेहतरीन मंच संचालन संजय पुरोहित ने किया। प्रथम सत्र में ही सभी प्रतिभागियों का परिचय उन्हें बार-बारी से मंच पर आमंत्रित करते हुए श्री किशोर श्रीवास्तव ने कराया। इस अवसर पर मुंबई की प्रतिभागी लता तेजेश्वर की अंग्रेजी पुस्तक ‘वेव्स आॅफ लाइफ’ और किशोर श्रीवास्तव के कहानी संग्रह ‘कही-अनकही’ का विमोचन भी माननीय अतिथियों द्वारा किया गया। ‘मैत्री-भाईचारे के प्रचार-प्रसार में सोशल मीडिया की भूमिका’ और सोशल मीडिया के खट्टे-मीठे अनुभवों पर आधारित सम्मेलन के परिचर्चा सत्र में मुख्य अतिथि कमल रंगा, विशिष्ट अतिथि गार्गी राय चैधरी रहीं तथा अध्यक्षता मालचंद तिवाऱी ने की। परिचर्चा सत्र में अपने विचारों की गंगा बहाने वालों में शामिल थे; अमित साकिरवाल (लखनऊ), रायपुर से अमृता शुक्ला, बीकानेर से डॉ. अजय जोशी, विवेक मित्तल, सीमा भाटी, डॉ. पंकज जोशी, नीलिमा शर्मा, अपूर्वा चैमाल, दिल्ली से किरण बाला, सुरभि सप्रू, विपनेश माथुर, किरण आर्य, श्रीगंगानगर से दीपक अरोड़ा, चित्रकूट से पियूष द्विवेदी, सहारनपुर से ऊंची उड़ान पत्रिका के संपादक पवन शर्मा, गौर (नेपाल) से प्रभा सिंह, देहरादून से राहुल वर्मा, नोएडा से सोमा बिश्वास, अयोध्या से शाह आलम, जयपुर से सुरेश शर्मा, बारांबकी से सुमन श्रीवास्तव, शाहजहांपुर से डा. देशबन्धु आदि। इस सत्र में स्वागताध्यक्ष सुधीर सिंह सुधाकर थे और बेहतरीन मंच संचालन श्री नासिर जैदी ने किया। 
सायंकालीन सत्र में भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया, जिसका कुशल मंच संचालन सुशील कौशिक (बीकानेर) एवं अनुपमा श्रीवास्तव (भोपाल) ने संयुक्त रूप से किया। इस सत्र की मुख्य अतिथि अल्का डॉली पाठक थीं। नृत्य के क्षेत्र में सिक्किम के गंगतोक से पधारी प्रतिभाशाली बाल प्रतिभागी कु. अस्मिता शर्मा एवं दिल्ली की कु. वन्या कंचन सिंह सहित रांची से पधारी युवा कलाकार संदीपिका राय ने अपने खूबसूरत कला प्रदर्शन से उपस्थितजनों को मंत्र मुग्ध करते हुए दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया। इसी प्रकार से गायन में हल्द्वानी से गौरी मिश्रा, श्रीगंगानगर से दीपक अरोड़ा, गाजियाबाद से मीता रॉय, भीलवाड़ा से निरंजन नीर, दिल्ली से पारूल रस्तोगी सहित बीकानेर से डॉ. मोहम्मद इकबाल, ओमप्रकाश सोनी, हसन अली, पवन सोनी और सुमधुर गायिका लता तिवारी ने अपने गीतों से उपस्थितजनों का खूब मनोरंजन किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान ही किशोर श्रीवास्तव की गीतों और हास्य भरी मिमिक्री ने न केवल श्रोताओं को झूमने पर मजबूर किया अपितु हंसा-हंसा कर लोटपोट भी किया। तबले पर लाजवाब संगत की चुरू से पधारे प्रतिभागी राजेन्द्र शर्मा ने।72b3b47e-d9c0-4875-b6bf-1355bad85895
रात्रिकालीन सत्र में कवि सम्मेलन (पार्ट एक) का आयोजन किया गया, जिसका मंच संचालन बीकानेर के संजय आचार्य तथा आबू रोड पिण्डवाड़ा से पधारीं आशा पाण्डेय ओझा ने संयुक्त रूप से  अत्यन्त सलीके से किया। कवि सम्मेलन में मुख्य अतिथि मो. हनीफ ‘शमीम’ बीकानेरी, विशिष्ट अतिथि इंजी. आशा शर्मा (बीकारनेर) और हरकीरत हीर (गुवाहटी) थीं। इस सत्र की अध्यक्षता कोटा से पधारे वरिष्ठ कवि रघुनाथ प्रसाद मिश्र ‘सहज’ ने की। कवि सम्मेलन में बीकानेर से जाकिर अदीब, आनंद आचार्य, बुनियाद ज़हीन, राजेन्द्र स्वर्णकार, मीनाक्षी स्वर्णकार, बाबूलाल छंगाणी, इरशाद अजीज, मनीषा आर्य,; फरीदाबाद से अजय अज्ञात, चुरू से राजेन्द्र शर्मा, दिल्ली से शुभदा वाजपेयी, सुषमा भण्डारी व नेहा नाहटा, गुवाहटी से चंद्र प्रकाश पोद्दार, जयपुर से विनीता सुराना आदि सहित संचालक द्वय व मंचस्थ अतिथियों ने भी काव्य पाठ किया और खूब वाहवाही लूटी। 
दूसरे और अंतिम दिन 6 मार्च को सम्मेलन की शुरूआत दो ज्वलंत विषयों पर परिचर्चा के साथ हुई, विषय थे- कन्या भ्रूण हत्या व लिव इन रिलेशनशिप। चर्चा के लिए खुला मंच था, जिसमें अनेक प्रतिभागियों ने इन विषयों पर विस्तृत चर्चा की। शशि श्रीवास्तव, नेहा नाहटा व किरण बाला ने इस सत्र का मंच संचालन संयुक्त रूप से किया। इस सत्र के मुख्य अतिथि धर्मचंद जैन, विशिष्ट अतिथि, पूर्व कर्नल प्रेम दास निगम, श्याम स्नेही व अतुल प्रभाकर थे तथा अध्यक्षता मुरली मनोहर के माथुर ने की। इस सत्र में अतिथियों ने भी अपने विचार रखे। इसके बाद कवि सम्मेलन का दूसरा सत्र आरम्भ हुआ, जिसकी अध्यक्षता यूके से पधारी शील निगम ने की। मुख्य अतिथि थे भवानी शंकर व्यास व विशिष्ट अतिथि उषा किरण सोनी थीं। मंच संचालन नमिता राकेश व अरविंद पथिक ने संयुक्त रूप से किया। कवि सम्मेलन के इस सत्र में दिल्ली से बादल चैधरी, सुधीर सिंह, संजय शाफ़ी, नरेश मलिक, सरिता भाटिया, शाहजहांपुर से देशबंधु, चम्पावत से कैलाश चंद्र जोशी, मुंबई से लता तेजेश्वर, नौएडा से सीमा गुप्ता शारदा, लखनऊ से निवेदिता श्रीवास्तव, राहुल द्विवेदी, सीकर से निर्मला मुस्कान बरवड़, ग्वालियर से पियूष चतुर्वेदी, वारासिवनी से प्रीति सुराना, राहुल द्विवेदी, मुंबई से लता तेजेश्वर, सरोज लोढाया, गुड़गांव से श्याम स्नेही, कंचनपुर (नेपाल) से सरिता पंथी, तेजपुर (असम) से सरिता शर्मा, भिवानी से डा. अनीता भारद्वाज, बीकानेर से मोनिका गौड़, कासिम बीकानेरी, सरदार अली पडि़हार, गोविंद नारायण, अब्दुल वाहिद अशरफी, कृष्णा आचार्य, गजेन्द्र सिंह राजपुरोहित और बड़ोदरा से वीरेन्द्र सिंह, बारासिवनी से प्रीति समकित सुराना, ग्वालियर से पियूष चतुर्वेदी, आदि प्रतिभागियों ने अपने बेहतरीन काव्य पाठ से लोगों को बार बार तालियां बजाने पर मजबूर किया। 826a9480-0dbc-45e3-9128-977d4924a88a
सम्मेलन का सबसे भावुक क्षण समापन सत्र का रहा, जब चैथे सोशल मीडिया मैत्री सम्मेलन के चयनित प्रतिभागियों को सम्मानित किये जाने के साथ ही उनकी बिदाई का समय आया। पुरस्कार वितरण समारोह का संचालन करते हुए प्रतिभागियों के महत्व और उनकी खूबियों को दर्शाने वाली काव्य पंक्तियों से सत्र के संयोजक, संचालक किशोर श्रीवास्तव ने माहौल को और भी अधिक रोचक और भाव विभोर कर दिया। समापन सत्र की अध्यक्षता लक्ष्मीनारायण रंगा ने की, जबकि मुख्य अतिथि व विशिष्ट अतिथि क्रमशः भवानीशंकर शर्मा, नेमचंद गहलोत व अल्का डॉली पाठक रहीं। प्रतिभागियों का अंग वस्त्र पहनाकर स्वागत करते हुए उन्हें स्मृति चिन्ह, प्रमाण पत्र व पुरस्कार स्वरूप बहुमूल्य किताबों का सेट भेंट किया गया। पूरे सम्मेलन की बेहतरीन फोटोग्राफी के लिये विशाल आर्यन व वीडियोग्राफी के लिये वैशाली आर्यन को भी सम्मानित किया गया। 
इस अवसर पर अतिथियों और अध्यक्ष महोदया ने समूचे आयोजन की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए न केवल मैत्री-भाईचारे की इस भावना की प्रशंसा की अपितु इसे बीकानेर की धरती को भी गौरवान्वित करने वाला पल बताया। सभी ने ऐसे आयोजन की महत्ता पर भी बल दिया। अंत में सम्मेलन की ओर से स्थानीय संयोजक गोवर्धन लाल और राजाराम स्वर्णकार ने सभी प्रतिभागियों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कुल मिलाकर एक शानदार कार्यक्रम का अत्यन्त खुशनुमा माहौल में न केवल आगाज़ हुआ अपितु समापन भी उसी अंदाज़ में हुआ। सम्मेलन में पारम्परिक जलपान, भोजन के अलावा राजस्थानी मेहमाननवाज़ी का भी बेजोड़ नमूना देखने को मिला जहां बीकानेर से स्थानीय संयोजक गोवर्धन लाल चैमाल, राजाराम स्वर्णकार, विनोद धानुका, आशा शर्मा, मुनीन्द्र अग्निहोत्री, क़ासिम बीकानेरी और अनिल मिश्रा आदि सहित दिल्ली से पधारे राष्ट्रीय संयोजक किशोर श्रीवास्तव और शशि श्रीवास्तव आदि की टीम ढेर सारे मेहमानों की पल पल की खबर रखते हुए उनका बराबर ख़्याल रखे रही। और उनके हर सुख-दुख में बराबर के शरीक रहे। 
सम्मेलन का मुख्य आकर्षण सभी प्रतिभागियों का बड़ा सा पोस्टर कोलाज़ भी रहा जहां, दोनों दिन विभिन्न अंदाज़ों में फोटो खिंचवाने और मीडिया को इंटरव्यू देने वालों का कुछ इस तरह से जमावड़ा लगा रहा मानों वह कोई ऐतिहासिक पर्यटन केंद्र हो। अपने तरह के इस पहले और अनूठे सम्मेलन के ज़रिये आभाषी दुनिया से जुड़े सैकड़ों व्यक्ति पहली बार समूचे विश्व का प्रतिनिधित्व करते हुए आपस में एक दूसरे से, उनकी प्रतिभाओं से तो रूबरू हुए ही; दो दिन साथ-साथ रहने से पुरानी दोस्ती भी और प्रगाढ़ हुई और अनेक नये मित्र भी बने। जाते-जाते सभी अपने साथ अनेक मीठी-मीठी यादें भी समेटे हुए ले गये। सबने माना कि ऐसे कार्यक्रमों की समूचे विश्व में आवश्यकता है और इन सम्मेलनों से दोस्ती मात्र औपचारिकता बनकर नहीं रह जाती, बल्कि आपसी प्रेम, भाईचारा, सोहार्द की भावना का भी खूब विकास होता है, जो आज कुछ लोगों के अलगाववाद और वैमनस्य फैलाने वाले माहौल में निहायत ज़रूरी भी हैं।
 
रिपोर्टः शशि श्रीवास्तव, संपादक (हम सब साथ साथ), नई दिल्ली मो. 880518246, 9868709348
पताः सैक्टर-4/321, आर. के. पुरम, नई दिल्ली-110022 
 
 वैश्विक हिंदी सम्मेलन, मुंबई
वेबसाइट- वैश्विकहिंदी.भारत /  www.vhindi.in
प्रस्तुत कर्ता : संपत देवी मुरारका, विश्व वात्सल्य मंच 
murarkasampatdevii@gmail.com
लेखिका यात्रा विवरण
मीडिया प्रभारी
हैदराबाद