मंगलवार, 17 जुलाई 2012

कादम्बिनी क्लब हैदराबाद की मासिक गोष्ठी सम्पन्न




 कादम्बिनी क्लब हैदराबाद की मासिक गोष्ठी सम्पन्न

 कादम्बिनी क्लब हैदराबाद की मासिक गोष्ठी रविवार दिनांक 15 जुलाई 2012 को दिन में 12 बजे से हिन्दी प्रचार सभा परिसर हैदराबाद में सम्पन्न हुआ |

डॉ. अहिल्या मिश्र क्लब संयोजिका ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि इस अवसर पर बंगलौर से पधारे कवि दुर्गा दत्त पाण्डेय मुख्य अतिथि, भूत पूर्व न्यायाधीश हैदराबाद जिला श्रीमती वी.वरलक्ष्मी अध्यक्ष, रचना प्रस्तोता मंजुषा श्रीवास्तव एवं देवी नागरानी (मुंबई) मंचासीन हुई | श्रीमती शुभ्रा महंतो के सरस्वती वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ | श्रीमती मंजुषा श्रीवास्तव ने अपनी छ: चुनी हुई, नन्हीं चिड़िया, नाल का रिश्ता, माँ मुझे बचा, गंदे अंकल मुझे अच्छे नहीं लगते, वह मामूली सी ओरत और मंत्रालय में आग नामक कविताओं का पाठ किया |

डॉ. अहिल्या मिश्र ने विचार रखते हुए कहा कि कवितायें संवेदना पूर्ण, ज्वलन्त विषियों से संबद्ध एवं भाषा की प्रौढता लिए हुए है | शिल्पगत कमजोरी है | विषय का विस्तार एवं निर्वाह किया गया है | पवित्रा अग्रवाल ने कहा कि रचनाएँ भाव एवं संवेदना से पूर्ण है | लक्ष्मीनारायण अग्रवाल ने कहा कि कविता की कोई परिभाषा नहीं होती, इसे कसौटी पर कसना उचित नहीं है | कविता में संवेदना शिल्प एवं सौंदर्य का निर्वाह आवश्यक है | कविता स्वांत सुखाय से अग्रसर हो, बहुजन हिताय की ओर बढ़े तो उत्तम स्थिति होती है | डॉ. रमा द्विवेदी ने अपनी टिप्पणी देते हुए कहा कि ये सभी रचनाएँ विचार कविता है, इनमें संवेदना का निर्वाह है | कवयित्री के पास भाव एवं भाषा दोनों है | इनमें शिल्प की कसावट की आवश्यकता है | ज्योति नारायण ने कहा कि मुक्त छंद रचनाएँ हैं | संवेदना है, ज्वलंत नारी समस्याओं को उठाया है | डॉ. देवेन्द्र शर्मा ने कहा कि समसामायिक विषयों की प्रस्तुति की रचनाएँ हैं | बाल शोषण की रचना रिपोर्टाज लगती है |

देवी नागरानी (मुंबई) ने कहा कि भ्रूण हत्या पर बहुत रचनाएँ लिखी गई है | मंजुषा की रचनाओं में भाव प्रबल है | स्त्री स्वयं के लिए नहीं जीती | इससे सिद्ध करती इनकी एक रचना है | वी. वरलक्ष्मी ने कहा कि मंजुषा जी ने सामाजिक सच एवं स्त्री की स्थिति की बात लिखी है | दुर्गादत्त पाण्डेय ने कहा कि रचना में कवित्व तत्व का ध्यान रखना आवश्यक होता है | मैं कवयित्री को इस प्रयास के लिए बधाई देता हूँ | प्रथम सत्र इस परिचर्चा में अध्यक्षीय टिप्पणी के साथ समाप्त हुआ |

कार्यक्रम के दूसरे चरण में एक काव्य गोष्ठी सम्पन्न हुई | इसकी अध्यक्षता दुर्गादत्त पाण्डेय ने की | इसमें श्री नरेंद्र राय एवं मयूर पुरोहित विशेष अतिथि के रूप में मंचासीन हुए | श्री लक्ष्मीनारायण अग्रवाल के संचालन में सर्वश्री सम्पत देवी मुरारका, डॉ.रमा द्विवेदी, ज्योति नारायण, विनीता शर्मा, शुभ्रा महंतो, डॉ. देवेन्द्र शर्मा, गोविंद मिश्र, नीरज त्रिपाठी, डॉ. अहिल्या मिश्र, भँवरलाल उपाध्याय, भावना पुरोहित, श्रद्धा विजयलक्ष्मी, उमा सोनी, सूरजप्रसाद सोनी, सरिता सुराणा जैन, पवित्रा अग्रवाल, देवी नागरानी, मीरा, हिमांगी ठाकर, सुनीता लुल्ला, ईश्वर अम्मा, जुगल बंग, दीपतान्शु, विकास, नरेंद्र राय, दुर्गादात्त पाण्डेय, वी.वरलक्ष्मी आदि ने विभिन्न रसों से पूर्ण रचना पाठ किया | धन्यवाद के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ |

सम्पत देवी मुरारका
 इलेक्ट्रोनिक मिडिया प्रभारी

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