बुधवार, 29 फ़रवरी 2012

कादम्बिनी क्लब की 234 वीं गोष्ठी संपन्न

कादम्बिनी क्लब की 234 वीं गोष्ठी संपन्न

कादम्बिनी क्लब की 234 वीं गोष्ठी संपन्न

कादम्बिनी क्लब हैदराबाद 234 वीं मासिक गोष्ठी हिन्दी प्रचार सभा परिसर में स्थित शिक्षक-प्रशिक्षण महाविधालय में रविवार 19  फरवरी 2012 के दिन 11.30 बजे से संपन्न हुई इसकी अध्यक्षता प्रो. ऋषभदेव शर्मा (विभागाध्यक्ष, उच्च शिक्षा शोध संस्थान द.भा.हि.प्रचार सभा खैरताबाद) ने की | डॉ. देवेन्द्र शर्मा, डॉ. अमरनाथ मिश्र एवं डॉ. अहिल्या मिश्र (क्लब संयोजिका) मंचासीन हुए | श्रीमती ज्योति नारायण के सरस्वती वन्दना से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ | डॉ. अहिल्या मिश्र सभी का स्वागत करते हुए कहा कि क्लब अपने विभिन्न कार्यक्रमों में एक नया अध्याय जोड़ने जा रहा है | अब क्लब में नई पीढ़ी के साहित्यकार के साथ परि-पक्व साहित्यकार एवं सृजनकारों की रचनाओं का पाठ रखकर सभी रचनाकारों को रचना के सभी बारीकियों से आमने-सामने होने का सुअवसर मिले और अपनी रचना की कमियों को स्वयं सुधारने का प्रयास कर सकें |
क्लब की ओर से डॉ. अमरनाथ मिश्र को एक परिपक्व रचनाकार के रूप में आमंत्रित कर उनकी चुनी हुई चार हिन्दी एवं एक मैथिली रचनाओं का पाठ करने आमंत्रित किया | उनके काव्य पाठ के पश्चात इसपर चर्चा परिचर्चा रखी गई | नीम के पत्ते, राजनीति से, हारा हुआ इन्सान एवं खून चढ़ेगा तथा मैथिली कविता ‘दालान’ पर कई लोगों ने विचार रखे | डॉ. अहिल्या मिश्र ने कहा कि ‘दालान’ कविता बिहार के गाँव का सम्पूर्ण परिवेश का सजीव चित्रण किया गया है | भगवानदास जोपट ने कहा कि नीम की सहमी डाल पर्यावरण की उपयोगिता और मनुष्य पर उपकार करता है | वहीं भारतीय राजनीति पर गहरा व्यंग करता है | हारा हुआ इन्सान आदमी की विवशता पर व्यंग है | खून चढ़ेगा में इन्सानी खून की निजारत पर तीखा व्यंग है | विनीता शर्मा जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मिश्र जी की कविताएँ उत्तम शब्द चयन एवं भावों की गंभीरता लिए हुई हैं | एस. नारायण राव कहा कि उनकी कविता पर बोलना सूर्य को टार्च लाईट दिखाना है | भँवरलाल उपाध्याय ने कहा कि बहुत ही सुन्दर मिथकों का प्रयोग किया गया है | ज्योति नारायण ने भी अपनी बात रखी | डॉ. देवेन्द्र शर्मा जी ने कहा संदेशमयी कविताएँ है | प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने अध्यक्षीय टिप्पणी देते हुए कहा कि डॉ. अमरनाथ मिश्र की कविताओं में लोक संस्कृति की ताजगी है | इसकी अनुभूति अधिकतर रचनाओं में होती है | रिश्तों की छीजन उनकी मैथिली रचना में दिखाई देती है | इनकी हर रचना में रिफ्लेक्शन है | अंत में हर कविता का पंच है | जैसे मनुष्य दुनियाँ के हर जीव का खून पचा सकता है, तीखा व्यंग है | रचनाओं के माध्यम से समझा जा सकता है | मिश्र जी की रचनाओं में सृजनात्मक शक्ति है | परिपक्व रचनाएँ हैं | कविता में एक से अधिक संस्तर होते हैं | प्रथम भाग का संचालन करते हुए डॉ. अहिल्या मिश्र ने कहा कि अमरनाथ जी की रचनाओं ने हलचल मचा दी | इसमें शैली और मिथक का निर्वाह हुआ है |
कार्यक्रम के दूसरे चरण में काव्य गोष्ठो का आयोजन हुआ | इसमें संचालक भँवरलाल उपाध्याय के साथ सर्व श्री डॉ. देवेन्द्र शर्मा, डॉ. अहिल्या मिश्र, प्रो. ऋषभदेव शर्मा, विनीता शर्मा, डॉ. रमा द्विवेदी, संपत देवी मुरारका, डॉ. अमरनाथ मिश्र, विनय कुमार झा, डॉ. सीता मिश्र, ज्योति नारायण, भगवानदास जोपट, भावना पुरोहित, एस. नारायण राव, लीला बजाज, उमा सोनी, सत्यनारायण काकडा, गौतम दीवाना, विनय कुमार लाल, निवेदिता झा आदि ने अपनी रचनाओं का पाठ किया | डॉ. रमा द्विवेदी ने इस माह में आने वाले जन्म दिवस एवं विवाह दिवस पर उन्हें बधाई दी | डॉ. सीता मिश्र के धन्यवाद से कार्यक्रम संपन्न हुआ |
डॉ. अहिल्या मिश्र
संयोजिका कादम्बिनी क्लब
संपत देवी मुरारका
संरक्षक कादम्बिनी क्लब
हैदराबाद

मंगलवार, 21 फ़रवरी 2012

कादम्बिनी क्लब की साहित्यिक यात्रा संपन्न


  1. कादम्बिनी क्लब की साहित्यिक यात्रा संपन्न











कादम्बिनी क्लब की साहित्यिक यात्रा संपन्न
कादम्बिनी क्लब हैदराबाद, की तीन दिवसीय 12-14 फरवरी 2012 तक साहित्यिक यात्रा संपन्न हुई |

यहाँ जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार यात्रा के अंतर्गत कादम्बिनी क्लब, अहिन्दी भाषी लेखक संघ-दिल्ली, हिन्दी अकादमी दिल्ली एवं गंगा साहित्य सभा-जलगांव (महाराष्ट्र) के संयुक्त तत्वावधान में नांदेड़ एजुकेशनल सोसायटी द्वारा संचालित साइंस कॉलेज, नांदेड़ के पूरणमल लाहोटी सभागार में कवि सम्मेलन का आयोजन संपन्न हुआ | इस अवसर पर उद्घाटन कर्ता माननीय सत्यव्रत चतुर्वेदी, ( सांसद एवं उपाध्यक्ष राजभाषा समिति, भारत सरकार ), अध्यक्ष मा. डॉ. सरजेराव तिम्से ( कुलपति, स्वामी रामानंद तीर्थ मराठवाड़ा विश्व विद्यालय, नांदेड़ ), विशेष अतिथि सरदार हरविन्दर सिंह हंसपाल ( पूर्व सांसद एवं सदस्य, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग, भारत सरकार ), मा. डॉ. जी.एम. कलमसे, डॉ. वेंकटेश काब्दे, ज्ञानी अमरजीत सिंह, डॉ. अहिल्या मिश्र आदि मंचासीन हुए | कार्यक्रम संयोजक सुरजीत सिंह जोबन थे |

डॉ. अहिल्या मिश्र ने द्वितीय सत्र की अध्यक्षता की, जिसमें ‘अहिन्दी भाषी प्रदेश में हिन्दी लेखन’ विषय पर कई पत्र प्रस्तुत किये गए | डॉ. मिश्र ने आंध्र प्रदेश में हिन्दी लेखन पर सारगर्भित एवं तत्वपरक आलेख प्रस्तुत किया | प्रो.एच.एस.बेदी (अमृतसर) ने बीज व्याख्यान दिया | विनोद बब्बर (नई दिल्ली) मुख्य वक्ता थे | इस दौरान कई स्थानीय वक्ताओं ने भी प्रपत्र प्रस्तुत किए |

यात्रा के अंतर्गत संपन्न कवि सम्मेलन में कवि सुरेश जैन, कवयित्री डॉ. अहिल्या मिश्र, श्रीमती विनीता शर्मा, श्रीमती ज्योति नारायण, श्रीमती एलिजाबेथ कुरियन मोना, श्रीमती संपत देवी मुरारका, श्रीमती उमा सोनी, गौतम दीवाना, सूरज प्रसाद सोनी, के साथ अरुणा शुक्ला (नांदेड़), जुगल किशोर शुक्ला, ज्योति अर्चना, सुनील जाधव (नांदेड़), डॉ.एच.एस.बेदी (अमृतसर), प्रताप सिंह सोढ़ी (जालंधर), महेंद्र शर्मा (हरियाणा), रामकुमार निजात एवं डॉ. रामनिवास मानव (हरियाणा), मुनीष गोयल, किशोर व श्रीवास्तव (दिल्ली), सुरिंदर कौर ‘चिंगारी’ कवितापुरी (चंडीगढ़), डॉ. ज्वाला प्रसाद (मेरठ), खलील मंसूरी (उज्जेन), कृष्ण नारायण पांडेय (लखनऊ), अतुल त्रिपाठी, डॉ. संगमलाल भँवर, राकेश नागोरी (अहमदाबाद), रमेश कटारिया (ग्वालियर), हितेष कुमार हितैषी (खामगांव), ओमप्रकाश ध्यारण ‘दर्द’ (झांसी), डॉ.एम.के. मजूमदार (बालाघाट), डॉ. ज्योति गजभिये (मुंबई), कीर्ति वर्धन (मेरठ), महेंद्र कम्बोज (सहारनपुर), डॉ. रीता गौतम (मुंबई), डॉ. राचन ‘भारती’ (नासिक), प्रीति कांबले (बालाघाट), सुनील पारिक (कर्नाटक), कमल किशोर शर्मा, प्रियंका सोनी ‘प्रीत’(जलगांव), सुनील पांडे, परिमल लालवाणी, एकबाल असर (सभी जलगांव), ए.के.राज, किशोर (उत्तराखंड), सागर सूद (पटियाला) व मनोहर देहलवी (दिल्ली) के साथ स्थानीय 20 कवियों ने रचनाओं का पाठ किया |

स्थानीय संयोजक अरुणा शुक्ल के साथ महेंद्र शर्मा एवं प्रियंका सोनी ‘प्रीत’ ने काव्य संध्या का संचालन किया | राष्ट्रीय संयोजक सुरजीत सिंह जोबन के धन्यवाद से कार्यक्रम संपन्न हुए | इस अवसर पर दो पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया | ’खुशबू बनकर जिऊँगा’ सुरजीत सिंह जोबन की पुस्तक एवं नरेश मेहता के उपन्यासों में व्यक्त अवधान डॉ. अरुणा शुक्ला की पुस्तक ज्ञानी अमरजीत सिंह (नांदेड़ गुरुद्वारा के गुरु शिरोमणि) द्वारा लोकार्पण संपन्न हुआ | डॉ. जोगेश कौर (शिमला), डॉ. हरिसिंह सुमन ‘विष्ट’ (नई दिल्ली) एवं डॉ. हरिसिंह पाल (हिन्दी अकादमी दिल्ली) ने तृतीय सत्र में अतिथि एवं अध्यक्षता की | स्थानीय महा विद्यालय की ओर से सत्र का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापित किया गया |

गोदावरी नदी के पावन तीर पर गुरु गोविन्द सिंह के अंतिम कर्म-स्थली नांदेड़ में संपन्न इस त्रिदिवसीय संगोष्ठी में देश भर से पधारे लगभग 150 प्रतिभागियों के साथ स्थानीय साहित्यकार, बुद्धिजीवी एवं चिंतकों की भी अच्छी उपस्थिति रही | कार्यक्रम पूर्ण गरिमा एवं भव्यता के साथ संपन्न हुआ |


 संपत देवी मुरारका

हैदराबाद