बुधवार, 11 जनवरी 2012

"क्रूज में सिंगापुर यात्रा"

"क्रूज में सिंगापुर यात्रा"


  "क्रूज में सिंगापुर यात्रा" 


                           एक नितांत घरेलू महिला होने के बावजुद पर्यटन और तीर्थयात्रा अब मेरी आदत और दिनचर्या में शुमार हो गई थी हालांकि अपनी गृहस्थी की जिम्मेदारियों को में पूरे मनोयोग के साथ निभाती रही हूँलेकिन जब भी कोई ऐसा अवसर सामने आयाजब मैं देश-विदेश का परिभ्रमण कर सकती थी तब मैंने इस अवसर को आगे बढ़कर लपकने में कोई कोताही नहीं बरती है वृद्धावस्था की दहलीज पर पहुँचने और शारीरिक क्षमता में होती निरंतर छीजन के बावजूद मैंने इस दिशा में अपने आत्मबल को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया 

  इसी क्रम में मुझे हैदराबाद से प्रकाशित 'डेली हिन्दी मिलापमें एक विज्ञापन पढ़ने को मिला विज्ञापन में 'सुपर स्टार जेमिनी क्रूजपर भागवत कथा के साथ ही तीन दक्षिण-पूर्व के एशियाई देशों के पाँच महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों की यात्रा का आमंत्रण था |मुझे यह एक अनूठा संयोग प्रतीत हुआ धार्मिक अभिरुचि की महिला होने के नाते इस तरह के आयोजनों में मैं हमेशा से रूचि लेती रही हूँलेकिन पर्यटन के साथ यह दुर्लभ संयोग मेरे लिए प्रसन्नतादायक भी था और आकर्षक भी विज्ञापन पढ़ने के साथ ही मेरा मन कल्पना- जगत की वीथिका में अनायास ही भटकने लगा प्रसन्नता के अतिरेक में मेरा मन-मयूर अपनी चित्ताकर्षक रंगीन पंखों को फैलाए नृत्य करने लगा भागवत-कथा की भक्ति-धारा में नहाये मन को ऊँचे-ऊँचे पहाड़ोंगहरी घाटियों और वन-प्रांतों की अनंत सुषमा के साथ ही अथाह सागर की उताल तरंगें एक दूरागत पुकार बनकर आमंत्रण देने लगीं |

  हालांकि यह मेरी पाँचवीं विदेश-यात्रा होतीलेकिन क्रूज (जलयान) पर पहली जहाज के डेक पर खड़े होकर अंतहीन समुद्र के विस्तार को अपनी खुली आँखों से विस्मय-विमुग्ध होकर नापना एक अप्रतिम अनुभव ही कहा जा सकता हैअत: मैंने इस यात्रा के लिए आवेदन करने और पंजीकरण कराने में विलंब भी नहीं किया यह एक सुखद संयोग ही कहा जाएगा कि इसके लिए मुझे इस यात्रा में श्रीमती विजयलक्ष्मी काबरासीताराम जी काबरा और पुष्प दरक का साथ भी मिल गया इनके अतिरिक्त ७१ लोगों का एक दल इस यात्रा के लिए वायुयान से श्रीलंका के लिए २१ जून २००८ को रवाना हुआ कोलंबो से  हमें वायुयान के जरिये ही सिंगापुर के लिए रवाना होना था वहाँ से आगे की तीन देशों के पाँच महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों की यात्रा क्रूज से होनी थी अजीब संयोग यह कि जब मैं हैदराबाद से यात्रा के लिए चली तो मुझे वर्षा की रिमझिम फुहारों ने विदा किया था और उन्हीं फुहारों ने सिंगापुर पहुँचने के बाद मेरा और मेरे यात्रीदल का स्वागत भी किया यहाँ तक पहुँचते-पहुँचते मौसम अजीब हो गया था पल में धूप और पल में साया और साया भी ऐसा कि बादलों के घटाटोप के साथ वातावरण में रात के उतर आने का आभास होने लगता 

  ऐसे में क्रूज पर हमारी यात्रा की शुरूआत  सिंगापुर से ही होनी थी सिंगापुर दक्षिण-पूर्व एशिया का एक बहुजातीय और बहुभाषी नगर है अपने प्राकृतिक सौन्दर्य में सिमटा यह नगर दुनिया भर के सैलानियों को सदैव आकर्षित करता रहता है नगर को इस तरह विन्यास दिया गया है कि यह हरीतिमा की गोद में लेटा किसी नन्हें शिशु सा प्रतीत होता है समतल भूमि होने के कारण यहाँ गर्मी भी बहुत पड़ती है और वातावरण में उमस भी बहुत होती है इस द्वीप का विस्तार सिंगापुर नदी के दक्षिण तट से प्रारंभ होता है यह भूमध्य रेखा से १३७ कि.मी. की दूरी पर उत्तर दिशा में स्थित है इसके दक्षिण मलेशिया का नगर जोहोर है और उत्तर में इंडोनेशिया का रैव-द्वीप है वैसे सिंगापुर कुल ६३ द्वीपों का एक समूह है जिसमें सिंगापुर शहर को अतिविशिष्ट माना जाता है इस श्रंखला में कई बड़े द्वीप हैं जिनमें जोरांगपुलाव टेकांगपुलाव डबीन  और सेंट्रशा को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है जिन प्रमुख द्वीपों में पानी का श्रोत है उनमें से सिंगापुरजोरांगक्लंगक्रेंजीसेलेटर और सेरांगुन की गणना की जाती है |

  वैसे सिंगापुर स्ट्रेट्स ऑफ मलक्का और साऊथ चायना समुद्री तटों के संगम पर स्थित है शहर का कुल क्षेत्रफल २७० वर्गमील है जनसंख्या ४५ लाख के ऊपर है जनसंख्या में सिंगापुर के मूल निवासी ३.५७ मिलियन और बाक़ी चीनीमलय और भारतीय है अंग्रेजीमंदारिन (चीनी)मलय और तमिल भाषायें बहुतायत बोली जाती हैं वैसे यहाँ की राज्य भाषा मलय है राष्ट्रगीत 'मजुला सिंगापुरकी रचना भी मलय भाषा में ही हुई है सिंगापुर विश्व के उन तीन नगरों में है जो आधिकारिक तौर पर राज्य होने का गौरव रखते हैं बहुत पहले यहाँ अफीम का कारोबार बहुतायत होता था रिक्शों की सवारी आम बात थी वैसे सिंगापुर बृहसांस्कृतिक नगर है जिस पर चीनीमलय और भारतीय सस्कृति का गहरा प्रभाव है यहाँ फेंगसुई से पूर्वजों की प्रार्थना होती है जिस कारण नगर हमेशा गुंजान और रंगीन बना रहता है यहाँ के सांस्कृतिक-उत्सवलोक परम्परायेंस्थापत्य और कला तथा रीति रिवाज और खान-पान पूरब और पश्चिम की सभ्यता के सम्मिश्रण प्रतीत होते हैं नगर एक शक्तिमान अलौकिकता से हमेशा जागृत रहता है पर्यटन यहाँ का मुख्य व्यवसाय हैअत: सिंगापुर के लोग पर्यटकों का स्वागत-सत्कार अतिथि के रूप में करते हैं कहा जाता है कि बहुत पहले यह नगर सिंगापुर नदी के तट पर मछुआरों का एक छोटा सा गाँव था १८१९ ई. में ब्रिटिश साम्राज्य ने यहाँ अपनी सेना का एक मुख्यालय स्थापित किया और यहाँ व्यापार भी शुरू किया |द्वितीय विश्व के दौरान १९४५ में इसे जापानियों ने अपने अधीन कर लियालेकिन जापान की पराजय के बाद फिर यह ब्रिटिश कॉलोनी हो गया जो आगे चल कर १९६३ में आजाद हुआलेकिन उसके बाद यहाँ मलेशिया का कब्ज़ा हुआ जो ९ अगस्त१९६५ तक बना रहा उसके बाद यह नगर एक स्वतन्त्र गणराज्य के रूप में स्थापित हो गया |

  यहाँ का मौसम पूरे साल लगभग एक सा रहता है और साधारण वर्षा होती है उत्तर-पूर्वी मानसून के समय यहाँ तूफानी हवायें चलती है इन हवाओं को 'सुमत्रासकहा जाता है यहाँ के त्योंहार इतने आकर्षक और रंगीन होते हैं कि इस अवसर का अवलोकन करने दुनिया भर से पर्यटक भागे चले आते हैं | 'थाईपूजनयहाँ के हिन्दुओं का एक दर्शनीय त्योंहार है अप्रेल महीने में यहाँ 'सिंगापुर फूड फेस्टिबलऔर जून में 'ग्रेट सिंगापुर सेलकी धूम रहती है सितम्बर में यहाँ 'मेरलाइनका स्थापना-त्योंहार मनाया जाता है सिंगापुर के बारे में इतनी सारी जानकारियाँ हमें यात्रा के गाइड अनूप कुमार अग्रवाल से मिली वैसे तो एयर पोर्ट पर उतरने के साथ ही वर्षा शुरू हो गई थीलेकिन हम जिस उद्देश्य के साथ यहाँ आये थे उसे तो हर हाल में पूरा करना ही था |

   हमारी यात्रा की शुरुआत मुरुगन मंदिर से हुई इस मंदिर को यहाँ चेट्टियार मंदिर भी कहते हैं और यह १५० वर्ष पुराना एक भव्य और प्राचीन मंदिर है अपनी कलात्मकता और स्थापत्य के लिए प्रसिद्ध यह हिन्दू मंदिर भगवान मुरुगन (स्वामी कार्तिकेय) को समर्पित है सिंगापुर के टेंक रोड पर स्थित इस मंदिर का निर्माण १८५८ ई. में नत्तकोत्ताई चेट्टियार ने कराया था स्थानीय लोग इसे 'थेड़ायुथपानीजिसका अर्थथेंडम+आयुधम+पानी संधिविच्छेद के साथ वह देवता जिसके हाथ में भाला होहोता है मान्यता है कि  मुरुगन अपने इस भाले से पापियों का संहार कर भक्तों की रक्षा करते हैं पुराणों के अनुसार इन्हें शिव-पार्वती का पुत्र माना जाता है ये स्वामी गणेश के भ्राता हैं 

  चेट्टियार जाति के लोगों नेजब यहाँ मंदिर नहीं बना थाएक पीपल-वृक्ष के नीचे एक भाला जो मुरुगन स्वामी का प्रतीक चिह्न है गाड़ कर पूजा-उपासना प्रारम्भ की थी और बाद में यह एक भव्य मंदिर के रूप में प्रतिष्ठित हुआ हमारा यात्री  दल इस भव्य मंदिर की शोभा से चमत्कृत था प्रवेश द्वार के दाहिनी ओर गणेश और बायीं ओर इडम्वन जी के सुन्दर विग्रह प्रतिष्ठित है मंदिर के गर्भगृह में स्वामी मुरुगन की एक अत्यंत सुन्दर मूर्ति दाहिने हाथ में लकड़ी का भाला लिए प्रतिष्ठित है इनका रूप संन्यासी का है इस मूर्ति के अवलोकन के बाद मुझे अपनी दक्षिण भारत की यात्रा याद आ गई दक्षिण भारत के मंदिरों में स्थापित मुरुगन से यह विग्रह किसी अर्थ में भिन्न नहीं है यह भारत के सांस्कृतिक अवदान का भी परिचायक है मुरुगन के इस श्री विग्रह के समक्ष मैं भाव-विभोर हो गई और मेरी आँखों से आनंदाश्रु का प्रवाह शुरू हो गया चेट्टियार मंदिर के इस प्रांगण में 1878 ई. में दो अन्य शिव एवं पार्वती के मंदिरों की स्थापन हुई इन्हें यहाँ सुन्दरेश्वर और मीनाक्षी अम्मा भी कहा जाता है इनका दर्शन कर मुझे मदुरै का मीनाक्षी मंदिर का स्मरण हो आया मुझे यह भी आश्चर्य हुआ कि हिन्दू धर्म-दर्शन का प्रसार विश्व-स्तर पर कितना व्यापक है वैसे इस मंदिर के विशाल प्रांगण में भैरवदुर्गादक्षिण-मूर्तिअन्तभल्लायरनटराजशिवगामी अम्मामानिकेश्वरचंडीकेश्वर और नवग्रहों के स्थापत्य भी दर्शनीय हैं इन दर्शनों के बाद हमारा यात्री दल बस में बैठ कर आगे की यात्रा की ओर निकला बस से ही मैंने यहाँ के सबसे ऊँचे पहाड़ 'बुकिट टीमका दर्शन किया गाइड ने बताया कि इसकी ऊँचाई 166 मीटर है बस में बैठे-बैठे ही हमने यहाँ के सुन्दर बागोंगगन चुंबी इमारतोंचीनी मंदिरोंमुसलमानों के मकबरों और ईसाइयों के भव्य गिरजाघरों के साथ ही कई हिन्दू मंदिरों को बाहर-बाहर से देखा इन सबके बारे में आवश्यक जानकारी देते हुए गाइड ने हमें मेरलॉयन के बारे में बताना शुरू किया 

  मेरलॉयन वास्तव में सिंगापुर बोर्ड का एक प्रतीक-चिह्न है सन 1964 में इसका प्रारूप फ्रेजर ब्रूनर ने तैयार किया था इस प्रतीक का एक पौराणिक इतिहास 'मलय अन्ताल्समें दर्ज है पहले सिंगापुर तैमासिक के रूप मेंजिसका अर्थ जवानिस भाषा में समुद्र हैके नाम से जाना जाता था यह मछुआरों का एक गाँव था इसी कारण प्रतीक-चिह्न का अधोभाग मछली का बनाया गया है कहा जाता है कि ग्यारहवीं शताब्दी में श्री विजय राज्य के राजकुमार संग नीला उत्तमा ने इस द्वीप की पुर्नखोज की थी इस जंगल में उसे बहुतायत सिंहों के दर्शन हुए जिस आधार पर उसने इस द्वीप का नाम सिंगापुर रख दिया यही कारण है कि प्रतीक-चिह्न का शीर्षभाग सिंह की आकृति का है प्रतिक-चिह्न मेरलॉयन  समुद्री लहरों के शिखर पर प्रतिष्ठित है | 15 सितम्बर 1972 में सिंगापुर के तत्कालीन प्रधान मंत्री ली क्वान यू थे ने इस प्रतीक-चिह्न का स्थापना दिवस समारोह पूर्वक मनाया था मेरलॉयन  प्रतिमा की ऊँचाई 8.6 मीटर तथा वजन 70 टन है प्रतिमा सीमेंट निर्मित है किन्तु इसका ऊपरी आवरण चीनी मिट्टी का बना है बगल में एक छोटी आकृति भी इसकी प्रतिष्ठित हैजिसकी ऊँचाई लगभग मीटर और वजन ३ टन है दोनों का निर्माण एक ही कारीगर लिम नेंग सेंग ने किया है इसी स्थान पर एक भव्य पार्क का भी निर्माण किया गया है जो पर्यटकों के लिए अपने सौन्दर्य के चलते आकर्षण का केंद्र है पार्क में जाने के लिए काफी सीढ़ियाँ उतरनी पड़ती हैं 

  मैं पार्क की विशालताउसकी सुषमा और भव्यता से चमत्कृत थी दूर से बड़े मेरलॉयन का पृष्ठ भाग ही दृष्टिगोचर हो रहा था बहुत दूर चलकर मेरलॉयन की प्रतिमा तक पहुँचना हुआ प्रतीक-चिह्न का निकट से अवलोकन और उसकी पृष्ठभूमि ने मुझे काफी प्रभावित किया प्रतिमाजो शीर्ष पर सिंह के आकर की हैके मुख से निरंतर फौव्वारे के रूप में जलधारा निकलकर नदी में गिर रही थीएक कांसे की प्लेट पर वहाँ पर्यटकों के लिए स्वागत लिखा हुआ भी मिला प्रतीक-चिह्न के अवलोकन और पार्क के भ्रमण में काफी समय निकल गया इस बीच गाइड ने वापस चलने का संकेत किया और हमारा यात्री दल वापस आकर बस में बैठ गया क्रूज पर वापस आने के बाद हमारे दल ने शुद्ध शाकाहारी भोजन किया और उसके बाद कुछ देर तक विश्राम शाम ढलने के बाद हम डेक पर इकट्ठा हुए और भागवत कथा का रसामृत पान करने लगे समूचा वातावरण भक्तिमय हो गया हमारा क्रूज वहाँ के समयानुसार बजे लंकावी के लिए प्रस्थान करने वाला था 

संपत देवी मुरारका 
हैदराबाद .




                                     





सोमवार, 9 जनवरी 2012

भारतीय गौवंश रक्षण संबर्धन परिषद आं.प्र.द्वारा द्विदिवसीय अखिल भारतीय संगोष्ठी आयोजित


भारतीय गौवंश रक्षण संबर्धन परिषद आं.प्र.द्वारा    द्विदिवसीय अखिल भारतीय संगोष्ठी आयोजित








 भारतीय गौवंश रक्षण संबर्धन परिषद आं.प्र.द्वारा    द्विदिवसीय अखिल भारतीय संगोष्ठी आयोजित

भारतीय गौवंश रक्षण संबर्धन परिषद, गौ हत्या एवं मांस निर्यात निरोध परिषद, अखिल भारतीय गौरक्षा आन्दोलन समिति (विश्व हिन्दू परिषद गौरक्षा विभाग) के संयुक्त तत्वावधान में आगामी शनिवार, रविवार ७-८ जनवरी २०१२ को रामकोट स्थित श्री जैन सेवा संघ भवन में सफल आयोजन किया गया |

इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रवीण भाई तोगड़िया (विश्व हिन्दू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष), अध्यक्ष जसराज श्री श्रीमाल (भारतीय गौवंश रक्षण संबर्धन परिषद, अध्यक्ष), जी. राघव रेड्डी (अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष), स्वामी सहदेव दास जी, हुकमचंद सांवला, भंवरलाल कोठारी, विरेन्द्र ढाकर, आर. एस. सावरेकर, डॉ. गंगा सत्यम, खेमचंद शर्मा, मंचासीन हुए |

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ | इस अवसर मुख्य अतिथि प्रवीण भाई तोगड़िया (विश्व हिन्दू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष) ने अपने वक्तव्य में कहा कि गौ सेवा को गौशालाओं तक सिमित न करते हुए सभी हिन्दूओं को गौरक्षा एवं संरक्षण का संकल्प लेना चाहिए | उन्होंने कहा कि वर्ष में दो बार गौरक्षा विभाग की बैठक आयोजित की जाती है, जिसमें पूर्व में किये गये कार्य का कार्यवत्त प्रस्तुत कर भविष्य में किये जाने वाले कार्य की रूप रेखा तैयार की जाती है | उन्होंने कहा कि कर्म के सिद्धांत के अनुसार, जो बुरे कर्म करता है, उसका फल उसे इस जन्म के साथ-साथ अगले जन्म में भी भोगना पड़ता है | जीव को अपने बुरे कर्मों से मुक्त होने के लिए गौसेवा ही एकमात्र मार्ग है, क्योंकि गौ की सेवा करने से सारे देवता की पूजा करने का फल प्राप्त होता है, क्योंकि इसमें 33 करोड़ देवी देवता का निवास है |

प्रवीण भाई ने कहा कि आज प्रत्येक हिन्दू को अपने घर में गाय की सेवा करने का संकल्प लेना होगा | बिना गाय के कोई घर न हो | गाय का पालन और सेवा से घर में सुख समृधि आती है, तथा पंचगव्य से आय में वृद्धि होती है | बच्चों के लिए चॉकलेट गाय के दूध से निर्मित की जायेगी तब भी आय में वृद्धि होगी | उन्होंने कहा कि घर में गाय संकर नहीं, बल्कि देशी होनी चाहिए | देशी गाय की सेवा से ही जीव के सारे कष्ट दूर होते हैं | उन्होंने कहा कि देश में गौहत्या मुसलमानों एवं ईसाइयों के प्रवेश से ही हुई, क्योंकि हिन्दू चाहे जो भी करें, लेकिन वह गौ की हत्या कभी नहीं कर सकता | आज उक्त सम्प्रदायों के कारण ही विहिप को गौहत्या एवं उसके मांस के निर्यात के लिए विरोध करना पड़ रहा है |

डॉ. तोगड़िया ने कहा कि देश में गौहत्या बंद हो, इसके लिए सभी को संकल्प लेना होगा | इसके लिए विहिप ने सक्रिय बनाई है, जिसके अभियान के अंतर्गत गाय के दूध एवं घी का उपयोग, प्रतिदिन भोजन करने से पूर्व गौ ग्रास निकालना, प्रतिदिन गाय के नाम पर एक रूपया निकालना इत्यादि प्रमुख है | उन्होंने कहा कि देश के हर जिले के ग्रामों में पंचगव्य का उपयोग करना तथा पंचगव्य से बने उत्पादों का ही उपयोग करने का सभी को संकल्प लेना होगा | पंचगव्य से बने उत्पादों के अधिकाधिक प्रयोग से देश में घर-घर में गाय की सेवा होगी उन्हें आर्थिक रूप से मजबूती मिलेगी | उन्होंने कहा कि आज सभी को गोचर की रक्षा करने का संकल्प करना होगा, क्योंकि आज विभिन्न कारणों के चलते गोचर की भूमि खत्म होती जा रही है | अभी जो भूमि बची है उसे खत्म होने से बचाना होगा | आज सभी को गोचर का संबर्धन, देशी गाय के नस्ल का बढ़ावा, गौ आधारित कृषि को प्रेरित करना होगा | उन्होंने कहा कि केवल गौशाला का निर्माण करने से गौसेवा नहीं होगी | गौशालाओं के साथ-साथ गाय को संरक्षण देना और उसे घर-घर में पालने की जरुरत है | गौरक्षा के लिए जनता को प्रेरणा देने के लिए आगामी वर्ष से भारत वर्ष में गौ विज्ञान परीक्षा का आयोजन किया जायेगा, ताकि स्कूल में बच्चों को गौ रक्षा की सेवा की जा सके | सभी इसमें सक्रिय रूप से भूमिका बनाकर इस दिशा में कार्य करें | अंत में उन्होंने कहा कि गौरक्षा के लिए सड़कों पर यदि आन्दोलन करना पड़ा तो भी आगे आयें | गायों को कसाइयों के हाथों से बचाएँ |

अवसर पर विहिप के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष जी. राघव रेड्डी ने कहा कि आज गौ सेवा के लिए युवाओं को आगे आने की जरुरत है | युवा वर्ग ही पंचगव्य से बने उत्पादों को मार्केटिंग के लिए आगे आकर कार्य कर सकते हैं | उन्होंने बताया कि उनकी माता के नाम पर इब्राहिमपट्टनम में गौशाला चल रही है और मेडचल में भी एक गौशाला शुरू की जायेगी |

कार्यक्रम में स्वागत भाषण में अध्यक्ष जसराज श्रीश्रीमाल ने कहा कि गौ रक्षा के लिए हैदराबाद में गत 21 वर्ष पूर्व अल-कबीर को बंद करवाने का आन्दोलन आरम्भ हुआ था, जिसका प्रभाव देश के अन्य राज्यों में भी पड़ा | अल-कबीर को बंद करने के लिए सभी को सक्रिय रूप से कार्य करना होगा और गुजरात तथा राजस्थान में जिस प्रकार गाय की हत्या पर कानून बने हैं, वैसे ही देश के अन्य राज्यों में भी चलाये जाने की जरुरत है | उन्होंने कहा कि कर्नाटक में भी बिल पास हुआ है, लेकिन इसे राष्ट्रपति की स्वीकृति नहीं मिली है | स्वीकृति मिलाने पर कर्नाटक दक्षिण भारत का पहला ऐसा राज्य होगा, जहाँ गौ हत्या पर प्रतिबंध होगा| उन्होंने कहा कि दो दिवसीय अखिल भारतीय बैठक में गौ रक्षा पर सत्र आयोजित कर भविष्य की रणनीतियाँ तैयार की जायेगी | इस अवसर पर देश के 22-23 प्रान्तों से लगभग 200 प्रतिनिधि उपस्थित थे | अवसर पर अर्चना सिंह तोमर (उ.प्र.) से पधारी थीं | श्री जैन सेवा संघ, करुणा इंटरनेशनल, इण्डिया काईन्डनेस मूवमेंट सहित अन्य संगठनों ने डॉ. प्रवीण भाई तोगड़िया, राघव रेड्डी सहित अन्यों का सम्मान किया |
संपत देवी मुरारका
हैदराबाद 

रविवार, 8 जनवरी 2012

अखिल भारतीय साहित्य सम्मेलन के आं.प्र. शाखा का द्विदिवसीय कार्यक्रम संपन्न





अखिल भारतीय साहित्य सम्मेलन के आं.प्र. शाखा का द्विदिवसीय कार्यक्रम संपन्न
विगत दिनों अखिल भारतीय भाषा साहित्य सम्मेलन भोपाल की आंध्र प्रदेश शाखाओं द्वारा क्रमश:श्रीकृष्ण देवराय भाषा निलयम एवं मुरारका पैलेस सुल्तान बाजार में द्विदिवसीय साहित्य सम्मेलन एवं सम्मान समारोह एवं पुरस्कार कार्यक्रम संपन्न हुआ | अ.भा.भा.सा.स. महिला शाखा की अध्यक्षा डॉ. अहिल्या मिश्र एवं मंत्रिणी डॉ. रमा द्विवेदी ने संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि प्रथम दिवस में साहित्य सम्मेलन एवं कृष्णानंदा कलापूर्णम डॉ. पोतिकुची पुरस्कार का आयोजन सायं 5.30 बजे से संपन्न हुआ | इस अवसर पर मुख्य अतिथि के.बी.रमणाचारी आईएएस, पूर्व सेक्रेट्री रेवेन्यू आं.प्र. सरकार, अध्यक्ष पी.वी.ब्रह्मम, अध्यक्ष अखिल भारतीय भाषा साहित्य सम्मेलन आं.प्र.विभाग, विशेष अतिथि डॉ. मारिया कुमार आईएएस आईजी ऑफ पुलिस (भोपाल म.प्र.) पुरस्कार ग्रहीता सतीश चतुर्वेदी अ.भा.भा.सा.स.भोपाल के अध्यक्ष सम्मानित अतिथि डॉ. पोतिकुची सांबशिवा राव अध्यक्ष विश्व (साहिति) एस. प्रसाद राव विश्व भूषण, डॉ. एमएल नरसिम्ह राव एवं डॉ. अहिल्या मिश्र महिला अध्यक्ष (अ.भा.भा.सा.स. आं.प्र.महिला विभाग) मंचासीन हुए | पी.वी.ब्रह्मम ने सभी का स्वागत किया |

रमणाचारी ने अपनी बात रखते हुए अखिल भारतीय भाषा साहित्य सम्मेलन के  सर्वभाषा में साहित्यिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के कार्य को समयानुकूल बताया | डॉ. अहिल्या मिश्र ने पुरस्कार प्रदान करने हेतु पी.सांबशिव राव को धन्यवाद देने हेतु इस संस्था को भविष्य में भी पुरस्कार बनाए रखने हेतु प्रदत्त 15000 रुपये की राशि प्रदान करने हेतु सराहना की | 40 वर्षों की संस्था का 3000 हजार से ऊपर भाषा एवं सार्वदेशिक संगन के अध्यक्ष को यह पुरस्कार देना एवं आगे भी इस कार्य की सुचारूता का भार सोंपना उत्तममोत्तर कार्य है | सतीश चतुर्वेदी ने अपने विचार प्रकट किए | भोपाल से पधारे जगदीश श्रीवास्तव एवं पी.मारिया कुमार के आतिथ्य में विभिन्न तेलुगु भाषा-भाषी करीब 20 कवि एवं कवयित्रियों के साथ डॉ.अहिल्या मिश्र एवं रत्नकला मिश्र ने भी सहभागिता निभाई |

सम्मान कार्यक्रम व काव्य गोष्ठी संपन्न
अखिल भारतीय भाषा साहित्य सम्मेलन, आं.प्र. महिला शाखा के तत्वावधान में बड़ी चावडी स्थित मुरारका पैलेस में सम्मान और साहित्यिक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया | शाखा की अध्यक्षा डॉ. अहिल्या मिश्र एवं महासचिव डॉ.रमा द्विवेदी ने संयुक्त विज्ञप्ति दी है | इस आयोजन की अध्यक्षता केंद्रीय राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सतीश चतुर्वेदी ने की | आं.प्र. शाखा के परामर्शदाता डॉ. पी. सांबशिवराव मुख्य अतिथि, शाखा के अध्यक्ष ब्रह्मम, विशेष अतिथि एवं विशेष आमंत्रित गीतकार जगदीश श्रीवास्तव (भोपाल), गौरवनीय अतिथि तथा महिला शाखा की अध्यक्षा डॉ. अहिल्या मिश्र मंचासीन हुए |

संपत देवी मुरारका ने अतिथियों का स्वागत किया | श्रीमती ज्योति नारायण का सुरसरस्वती वंदना से कार्यक्रम आरंभ हुआ |

तत्पश्चात डॉ. चतुर्वेदी, डॉ. सांबशिवराव, ब्रह्मम व जगदीश श्रीवास्तव (भोपाल) का सम्मान शाल, मोती माला व पुष्प गुच्छ से शाखा के सदस्यों द्वारा किया गया |

डॉ. चतुर्वेदी ने अपने वक्तव्य में कहा कि संयुक्त कार्यक्रम करके शाखा का विस्तार एवं प्रकाशन के द्वारा शाखा की रिपोर्ट प्रकाशित करने की बात कही | डॉ.सांबशिव राव ने कहा कि विभिन्न भाषाओँ से संबंधित लोगों को आमंत्रित करके चर्चा करनी चाहिए | श्री ब्रह्मम ने सहकारिता की उपयोगिता पर अपने विचार रखे |

श्रीवास्तव ने भी अपने विचार व्यक्त किये | डॉ. रमा द्विवेदी ने शाखा के कार्यकलापों का विवरण प्रस्तुत किया | तत्पश्चात बहुभाषी काव्यगोष्ठी संपन्न हुई जिसमें संपत देवी मुरारका, मीना मुथा, ज्योतिनारायण, डॉ. मदन देवी पोकरणा, डॉ. सीता मिश्र, डॉ.रमा द्विवेदी, उमा सोनी, भावना पुरोहित, सरिता सुराणा जैन, (मारवाड़ी कविता), डॉ. अहिल्या मिश्र, विनीता शर्मा एवं डॉ. चतुर्वेदी ने विविध रसों से भरपूर रचनाएँ सुनाकर समां बाँध दिया |

प्रसिद्ध गीतकार गजलकार श्रीवास्तव ने विविध रंगों, विविध अर्थी एवं विविध रसों से पूर्ण रचनाएँ प्रस्तुत करके सबका मन मोह लिया | कुछ पंक्तियाँ दृष्टव्य है-बरसता है कहीं बादल तुम्हारी याद आती है /बिखरता है कहीं काजल तुम्हारी याद आती है | या फिर- कुछ तो हकीकत है इस कहानी में/दोस्ती होने लगी है आग-पानी में | संचालन मीना मूथा ने किया | सरिता सुराणा के धन्यवाद ज्ञापन से कार्यक्रम समाप्त हुआ | संपत देवी मुरारका इस कार्यक्रम की आयोजक रही |
संपत देवी मुरारका,
 हैदराबाद