मंगलवार, 24 जनवरी 2012

हैदराबाद साहित्य उत्सव [16-18 जनवरी 2012] में हिंदी-उर्दू काव्य पाठ संपन्न


हैदराबाद साहित्य उत्सव [16-18 जनवरी 2012] में हिंदी-उर्दू काव्य पाठ संपन्न 












हैदराबाद साहित्य उत्सव [16-18 जनवरी 2012] में हिंदी-उर्दू काव्य पाठ संपन्न 

हैदराबाद में विगत दिनों सरस्वती भारत एवं आंध्र प्रदेश पर्यटन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में त्रिदिवसीय महोत्सव, तारामती बारादरी, के तारामती-प्रेमामती रूम, कोहिनूर हॉल एवं गोलकोंडा हॉल में एक विशाल साहित्यिक समारोह का उद्घाटन भूटान में स्थित भारतीय राजदूत, साहित्यकार एवं राजनयिक श्री पवन के. वर्मा आईएफएस (मुख्य अतिथि) के करकमलों से संपन्न हुआ |

इस अवसर पर श्री पवन के. वर्मा, आईएफएस, साहित्यकार, राजनयिक एवं भूटान के भारतीय राजदूत (मुख्य अतिथि), पद्मभूषण श्री गुलज़ार कवि, फिल्मकार और गीतकार ऑस्कर विजेता (विशिष्ट अतिथि), श्रीमती चंदना खान, आईएएस, प्रधान सचिव (स्कूल शिक्षा) एवं सचिव (पर्यटन विभाग आंध्र प्रदेश सरकार) ने उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता की | संयोजक द्वय श्री सूर्याराव एवं प्रो. विजय कुमार (OUCIP)  ने कार्यक्रम का संचालन तथा अतिथि, साहित्यकारों  एवं दर्शकों का स्वागत किया | देश-विदेश से पधारे विभिन्न भाषा भाषी साहित्यकारों ने कहानी, कविता, संस्मरण, बातचीत, साक्षात्कार आदि से संबंधित चर्चा गोष्ठी एवं रचना गोष्ठियों में अपनी रचनाओं का पाठ किया |

उद्घाटन समारोह में पवन के. वर्मा और गुलज़ार दोनों ने ही जोर देकर कहा कि इस तरह के ‘फेस्टिवल’ का अंग्रेजी में स्वरूप मानसिक औपनिवेशिकता का द्योतक  है और कि ऐसे अवसरों पर भारतीय भाषा, भारतीय संस्कृति और भारतीयता को केन्द्र में रखा जाना चाहिए | चंदना खान, प्रधान सचिव ने कहा कि साहित्य भी पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए व्यवहार में लाया जा सकता है | साहित्य को प्रोत्साहित करने और इसे आगे लाने के महत्त्व पर बल दिया | उन्होंने कहा कि तारामती बारादरी उत्सवों के लिए स्थायी स्थल बनाया जाएगा |

इसी संदर्भ में 17 जनवरी 2012 को 11 बजे से एक सत्र में गुलज़ार जी की छात्रों के साथ बातचीत के समय मैंने (संपत देवी मुरारका, अध्यक्षा, इंडिया काईन्डनेस मूवमेंट) स्वयं की पुस्तक यात्रा क्रम-प्रथम भाग भेंट स्वरूप दी |

इसी संदर्भ में 18 जनवरी 2012  को 2 बजे से एक-एक सत्र क्रमश: उर्दू और हिंदी कविता पाठ का रहा | तुरंत बाद हिंदी-उर्दू का संयुक्त मुशायरा भी रखा गया | काव्य पाठ के सत्र में संयोजिका एवं अनुवादक श्रीमती एलिजाबेथ कुरियन ‘मोना’ ने हिंदी काव्य पाठ के लिए निमंत्रित प्रो. ऋषभदेव शर्मा (विभागाध्यक्ष उ.शि. एवं शोध संस्थान दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, खैरताबाद), डॉ. अहिल्या मिश्र प्रसिद्ध एवं वरिष्ठ कवयित्री, कहानीकार, प्रो.किशोरीलाल व्यास प्रसिद्ध पर्यावरण सचेतक, श्री शशि नारायण ‘स्वाधीन’ संपादक संवाद-सेतु को मंच पर आमंत्रित किया | प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने इसकी अध्यक्षता की | सभी कवियों ने अपनी चुनी हुई तीन रचनाओं का पाठ किया | इस सत्र में शहर के गणमान्य एवं साहित्यकारों की उपस्थिति रही | विशेष रूप से विनीता शर्मा, डॉ.देवेन्द्र शर्मा,संपत देवी मुरारका, प्रो. सत्यनारायण, डॉ. राजकुमारी सिंह, एवं बीना माथुर आदि ने सहभागिता निभाई | एलिजाबेथ कुरियन ‘मोना’ ने अत्यंत रूचि व श्रम पूर्वक हिंदी-उर्दू कविताओं का अंग्रेजी अनुवाद करके श्रोताओं को अनूदित पाठ भी उपलब्ध करा दिया था | समारोह में प्रतिनिधियों सहित 200 लोगों ने उद्घाटन सत्र में भाग लिया | प्रो. विजय कुमार, श्री सूर्याराव एवं अमिता देसाई के धन्यवाद ज्ञापन से कार्यक्रम संपन्न हुआ |
संपत देवी मुरारका  
हैदराबाद



  

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