मंगलवार, 20 दिसंबर 2011

"कश्मीर से अमरनाथ"

"कश्मीर से अमरनाथ"








































"कश्मीर से अमरनाथ"
कश्मीरी घाटी का देखोमनभावन है दृश्य |
ऊँचे-ऊँचे पर्वत नीचेचिनार देवदार के वृक्ष ||
लिद्दरसिन्धुझेलम के तट कासुन्दर बड़ा नजारा |
श्रीनगर की झीलों में तोसैर का ढंग है न्यारा ||
हजरत बल मस्जिदपरिमहलचश्म शाही फिर आये |
शीतल जल का चश्म ये देखोकई तरह के रोग मिटाये ||
निशातशालिमार बाग़ बगीचेपुष्प कमल कुमुदिनी के |
सजे हुए थे इन पुष्पों केसुन्दर मुकुट सारी झीलों के ||
गुल्फों के मैदानों ने तोगुलमर्ग की शान बढ़ाई |
ढकी बर्फ से पर्वत चोटियाँस्कीइंग का बोध कराई ||
गंडोला कार की सैर कोमन से जाता नहीं निकाला |
कोंगडोरी तक ही ले पाईउस सैर का मजा निराला ||
विश्व में सबसे ऊँचा पर्वतदेखने का मौका न मिल पाया |
14500 फीट ऊँचा पर्वत 'अफरवट',  देश की शान बढ़ाया ||
शंकराचार्य का मंदिर देखोबना यहाँ पर विश्व प्रसिद्ध |
290 सीढ़ियाँ बनी यहाँ कीऊपर से दिखे विहंगम दृश्य ||
क्षीर भवानी मंदिरकुण्ड अनंत नागों का |
रावण ने भी करी तपस्याकिया आह्वान माता का ||
जगदम्बा 'श्यामाबन रही लंका मेंपूजा थी राक्षसी तामसी |
क्रोधित हो आ गई भवानीभारत आ कश्मीर बसी ||  
सोनमार्ग सिन्धु की घाटीनदियों की महारानी |
अभयारण्य की घाटी की शोभाना जाए बखानी ||
बालटाल में लगा था मेलायात्रा करने वालों का |
आकाशमार्ग या पैदल चलतेबाबा के मतवालों का ||
अमर गंगा में स्नान कियाफिर हिम पीठ जा पहूँची |
जहाँ विराजे अमरनाथ जीहिम नहीं वह कच्ची ||
प्राकृतिक गुफा में देखाअदभुत शिव परिवार सजा सा |.
बूँद-बूँद गिरता जल जमतावृहदाकार शिवलिंग बनाता ||
बाबा पहलगाँव (बैलगाँव) मेंनंदी वर्धा को शीश नवाके |
नील गंगा में मुख धोकरचन्दन बाडी चन्द्रमा त्यागे ||     
पिस्सू घाटी त्रेशांक पर्वत परमिटाया असुरों का वर्चस्व |  
शेषनाग की महिमा न्यारीमिटे कष्ट पाप सर्वस्व ||
पंचतरनी में माँ गंगा कापञ्च तत्त्वों का त्याग किया |
अनंतनाग में बाबा भोले काभक्तों ने जयकार किया ||.  
 गुफा में बाबा ने माँ कोअमरकथा से तृप्त किया |
अमरकथा सुन शुकदेव जी नेभावमग्न अमरत्व पिया ||
छड़ी मुबारक आई देखोनमन करूँ में बारम्बार |
श्री चरणों में बाबा मेराकरो शीश नमन स्वीकार ||
बालटाल से श्रीनगरवापस लौटकर आये |
रात बिताई हाउस बोट मेंसुबह को दिल्ली आये ||
करूँ प्रार्थना में ईश्वर सेसभी को शक्ति प्रदान करें |.
प्राकृतिक सौन्दर्य के दर्शनकर अपना कल्याण करें ||

संपत देवी मुरारका 
हैदराबाद 


2 टिप्‍पणियां:

  1. कश्मीरी लिबास में तो कश्मीरी ही लग रही हैं आप तो!
    इन चित्रों के माध्यम से कश्मीर की सैर कराने के लिए आभार॥

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  2. aa0 sampat jee,

    aapka blog dekha. chgitr bahut pasand aaye -
    kasmeree vesh bhoosha mein aapka chitra bahut bhaya . Nav Varsh ki aapko sapriwaar hamaaree shgubh-kaamnaayen .
    Kamal

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