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सोमवार, 22 जून 2020

"माँ" कविता - अमृत राजस्थान-समाचार कतरन


जयपुर के अमृत राजस्थान में प्रकाशित मेरी लिखी "माँ" कविता. धन्यवाद/आभार, सम्पादक आदरणीय पन्नालालजी शर्मा.

प्रस्तुति : संपत देवी मुरारका (विश्व वात्सल्य मंच)
email: murarkasampatdevii@gmail.com
लेखिका यात्रा विवरण
मीडिया प्रभारी
हैदराबाद
मो.: 09703982136

मंगलवार, 1 सितंबर 2015

सबके प्यारे अब्दुल कलाम चले गए... के.के. यादव


बुधवार, 29 जुलाई 2015

सबके प्यारे अब्दुल कलाम चले गए...

आधुनिक भारत के भगवान चले गए।
इस देश के असली स्वाभिमान चले गए।।
धर्म को अकेला छोड़ विज्ञान चले गए।
एक साथ गीता और कुरान चले गए।।
मानवता के एकल प्रतिष्ठान चले गए।
धर्मनिरपेक्षता के मूल संविधान चले गए।।
इस सदी के श्रेष्ठ ऋषि महान चले गए।
कलयुग के इकलौते इंसान चले गए।।
ज्ञान राशि के अमित निधान चले गए।।
सबके प्यारे अब्दुल कलाम चले गए।।


पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का दिल का दौरा पड़ने से 27 जुलाई को शिलांग में निधन। 
राष्ट्र की एक अपूरणीय क्षति। 
विनम्र श्रद्धांजलि !!

प्रस्तुत कर्त्ता
संपत देवी मुरारका
अध्यक्षा, विश्व वात्सल्य मंच
लेखिका यात्रा विवरण
मीडिया प्रभारी
हैदराबाद


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रविवार, 1 फ़रवरी 2015

संपत देवी मुरारका को डॉ.अहिल्या मिश्र द्वारा आशीर्वचन ता. ३१-१-२०१५


संपत देवी मुरारका को डॉ. अहिल्या मिश्र द्वारा आशीर्वचन 

संपत देवी मुरारका
अध्यक्षा, विश्व वात्सल्य मंच
लेखिका यात्रा विवरण
मीडिया प्रभारी
हैदराबाद



मंगलवार, 20 दिसंबर 2011

"कश्मीर से अमरनाथ"

"कश्मीर से अमरनाथ"








































"कश्मीर से अमरनाथ"
कश्मीरी घाटी का देखोमनभावन है दृश्य |
ऊँचे-ऊँचे पर्वत नीचेचिनार देवदार के वृक्ष ||
लिद्दरसिन्धुझेलम के तट कासुन्दर बड़ा नजारा |
श्रीनगर की झीलों में तोसैर का ढंग है न्यारा ||
हजरत बल मस्जिदपरिमहलचश्म शाही फिर आये |
शीतल जल का चश्म ये देखोकई तरह के रोग मिटाये ||
निशातशालिमार बाग़ बगीचेपुष्प कमल कुमुदिनी के |
सजे हुए थे इन पुष्पों केसुन्दर मुकुट सारी झीलों के ||
गुल्फों के मैदानों ने तोगुलमर्ग की शान बढ़ाई |
ढकी बर्फ से पर्वत चोटियाँस्कीइंग का बोध कराई ||
गंडोला कार की सैर कोमन से जाता नहीं निकाला |
कोंगडोरी तक ही ले पाईउस सैर का मजा निराला ||
विश्व में सबसे ऊँचा पर्वतदेखने का मौका न मिल पाया |
14500 फीट ऊँचा पर्वत 'अफरवट',  देश की शान बढ़ाया ||
शंकराचार्य का मंदिर देखोबना यहाँ पर विश्व प्रसिद्ध |
290 सीढ़ियाँ बनी यहाँ कीऊपर से दिखे विहंगम दृश्य ||
क्षीर भवानी मंदिरकुण्ड अनंत नागों का |
रावण ने भी करी तपस्याकिया आह्वान माता का ||
जगदम्बा 'श्यामाबन रही लंका मेंपूजा थी राक्षसी तामसी |
क्रोधित हो आ गई भवानीभारत आ कश्मीर बसी ||  
सोनमार्ग सिन्धु की घाटीनदियों की महारानी |
अभयारण्य की घाटी की शोभाना जाए बखानी ||
बालटाल में लगा था मेलायात्रा करने वालों का |
आकाशमार्ग या पैदल चलतेबाबा के मतवालों का ||
अमर गंगा में स्नान कियाफिर हिम पीठ जा पहूँची |
जहाँ विराजे अमरनाथ जीहिम नहीं वह कच्ची ||
प्राकृतिक गुफा में देखाअदभुत शिव परिवार सजा सा |.
बूँद-बूँद गिरता जल जमतावृहदाकार शिवलिंग बनाता ||
बाबा पहलगाँव (बैलगाँव) मेंनंदी वर्धा को शीश नवाके |
नील गंगा में मुख धोकरचन्दन बाडी चन्द्रमा त्यागे ||     
पिस्सू घाटी त्रेशांक पर्वत परमिटाया असुरों का वर्चस्व |  
शेषनाग की महिमा न्यारीमिटे कष्ट पाप सर्वस्व ||
पंचतरनी में माँ गंगा कापञ्च तत्त्वों का त्याग किया |
अनंतनाग में बाबा भोले काभक्तों ने जयकार किया ||.  
 गुफा में बाबा ने माँ कोअमरकथा से तृप्त किया |
अमरकथा सुन शुकदेव जी नेभावमग्न अमरत्व पिया ||
छड़ी मुबारक आई देखोनमन करूँ में बारम्बार |
श्री चरणों में बाबा मेराकरो शीश नमन स्वीकार ||
बालटाल से श्रीनगरवापस लौटकर आये |
रात बिताई हाउस बोट मेंसुबह को दिल्ली आये ||
करूँ प्रार्थना में ईश्वर सेसभी को शक्ति प्रदान करें |.
प्राकृतिक सौन्दर्य के दर्शनकर अपना कल्याण करें ||

संपत देवी मुरारका 
हैदराबाद 


बुधवार, 14 दिसंबर 2011

'जम्मू-वैष्णों माता' यात्रा

'जम्मू-वैष्णों माता'  यात्रा 











'जम्मू-वैष्णों माता'  यात्रा 

तीर्थाटन की मन में आई, निकल पड़े हम मस्ताने |
माँ बेटा मिल घूम के आवें, मन लगा बड़ा हर्षाने || 
भारत के सिर मोर मुकुट की, गाथा तुम्हें सुनाऊँ |
हरियाली नदी पर्वत मंदिर, क्या-क्या मैं बतलाऊँ ||
देख विहंगम दृश्य स्वर्ग का, भान हमें है कराती |
रावी, तवी, चिनाव के जल से, धरती ये हरियाती  ||
बागे बाहू किला यहाँ पर,जहां तीन देवियाँ विराजे |
काली माँ जहां 'बवे काली माँ' लक्ष्मी वैष्णों दायें बाएं साजें ||
पीर बुधन अली शाह, सबके मन पर राज किये |                   
500 वर्ष दूध पर जिये, देह यहाँ फिर त्याग दिये ||                          
बागे बाहू उद्यान का देखो, अनुपम बड़ा नजारा |
450 केनाल धरा पर, बना हुआ है सारा ||
स्वर्णिम प्रकाश से आलोकित  हो सबके मन को भाती |
किरणों जैसा तेज बिखरता एक अलौकिक  छटा दिखाती ||
 रवि-तनया तवी नदी के तट पर नन्हा सा हरिद्वार बस गया |
 देव देवियों का द्वादश ज्योतिर्लिंग सहित शिव धाम बन  गया ||
 नदी चिनाब  के तट का दृश्य मनोहारी कैसे वर्णन कर पाऊँ |
निहारते छवि कदम्ब-वृक्ष की फिर शिवधाम स्थान पर आऊँ ||
नैनाभिराम रघुनाथ मंदिर तेंतीस करोड़ देवों का सुलभ दर्शन |
 सबसे बड़ा  पारदर्शी  जग-प्रसिद्ध स्फटिक-लिंग का आकर्षण ||
रणविरेश्वर मंदिर है ऊँचा, जहं शिव शालीग्राम के मध्य |
कटरा से ही त्रिकुट शिखर तक, वादियों के सुखद दृश्य ||
बाण गंगा, चरण-पादुका  मंदिर दर्शन पुण्य अपार |
 अर्ध -क्वांरी हाथी-मत्था ,सांझी-छत हो, आई दरबार ||
गंगा की जलधार नहा कर जा पहुँची मैं माता  के द्वार |
चरण गंगा का करूँ आचमन, दर्शन करुँ मैं बारम्बार ||
नमन करूँ देवी श्री चरणों में, भक्तों का माँ करे उद्धार |
मिलता रहे बुलावा मुझको, माँ के दर्शन का हर बार ||
सलाल डेम, शिवखोरी, घाटियाँ मन मोहित कर जायेँ |
हाथी के सर मुकुट त्रिकुट का, दर्शन चित्त  चुराएँ ||
रोमांचकारी अनुभवों को शब्द नहीं दे पाई हूँ |
विस्तृत लेख लिखे, कविता में नहीं पिरो पाई हूँ ||

संपत देवी मुरारका 
हैदराबाद