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सोमवार, 22 जून 2020
मंगलवार, 1 सितंबर 2015
सबके प्यारे अब्दुल कलाम चले गए... के.के. यादव
बुधवार, 29 जुलाई 2015
सबके प्यारे अब्दुल कलाम चले गए...
आधुनिक भारत के भगवान चले गए।
इस देश के असली स्वाभिमान चले गए।।
धर्म को अकेला छोड़ विज्ञान चले गए।
एक साथ गीता और कुरान चले गए।।
मानवता के एकल प्रतिष्ठान चले गए।
धर्मनिरपेक्षता के मूल संविधान चले गए।।
इस सदी के श्रेष्ठ ऋषि महान चले गए।
कलयुग के इकलौते इंसान चले गए।।
ज्ञान राशि के अमित निधान चले गए।।
सबके प्यारे अब्दुल कलाम चले गए।।
पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का दिल का दौरा पड़ने से 27 जुलाई को शिलांग में निधन।
राष्ट्र की एक अपूरणीय क्षति।
विनम्र श्रद्धांजलि !!
प्रस्तुत कर्त्ता
संपत देवी मुरारका
अध्यक्षा, विश्व वात्सल्य
मंच
लेखिका यात्रा विवरण
मीडिया प्रभारी
हैदराबाद
रविवार, 1 फ़रवरी 2015
मंगलवार, 20 दिसंबर 2011
"कश्मीर से अमरनाथ"
"कश्मीर से अमरनाथ"
"कश्मीर से अमरनाथ"
कश्मीरी घाटी का देखो, मनभावन है दृश्य |
ऊँचे-ऊँचे पर्वत नीचे, चिनार देवदार के वृक्ष ||
लिद्दर, सिन्धु, झेलम के तट का, सुन्दर बड़ा नजारा |
श्रीनगर की झीलों में तो, सैर का ढंग है न्यारा ||
हजरत बल मस्जिद, परिमहल, चश्म शाही फिर आये |
शीतल जल का चश्म ये देखो, कई तरह के रोग मिटाये ||
निशात, शालिमार बाग़ बगीचे, पुष्प कमल कुमुदिनी के |
सजे हुए थे इन पुष्पों के, सुन्दर मुकुट सारी झीलों के ||
गुल्फों के मैदानों ने तो, गुलमर्ग की शान बढ़ाई |
ढकी बर्फ से पर्वत चोटियाँ, स्कीइंग का बोध कराई ||
गंडोला कार की सैर को, मन से जाता नहीं निकाला |
कोंगडोरी तक ही ले पाई, उस सैर का मजा निराला ||
विश्व में सबसे ऊँचा पर्वत, देखने का मौका न मिल पाया |
14500 फीट ऊँचा पर्वत 'अफरवट', देश की शान बढ़ाया ||
शंकराचार्य का मंदिर देखो, बना यहाँ पर विश्व प्रसिद्ध |
290 सीढ़ियाँ बनी यहाँ की, ऊपर से दिखे विहंगम दृश्य ||
क्षीर भवानी मंदिर, कुण्ड अनंत नागों का |
रावण ने भी करी तपस्या, किया आह्वान माता का ||
जगदम्बा 'श्यामा' बन रही लंका में, पूजा थी राक्षसी तामसी |
क्रोधित हो आ गई भवानी, भारत आ कश्मीर बसी ||
सोनमार्ग सिन्धु की घाटी, नदियों की महारानी |
अभयारण्य की घाटी की शोभा, ना जाए बखानी ||
बालटाल में लगा था मेला, यात्रा करने वालों का |
आकाशमार्ग या पैदल चलते, बाबा के मतवालों का ||
अमर गंगा में स्नान किया, फिर हिम पीठ जा पहूँची |
जहाँ विराजे अमरनाथ जी, हिम नहीं वह कच्ची ||
प्राकृतिक गुफा में देखा, अदभुत शिव परिवार सजा सा |.
बूँद-बूँद गिरता जल जमता, वृहदाकार शिवलिंग बनाता ||
बाबा पहलगाँव (बैलगाँव) में, नंदी वर्धा को शीश नवाके |
नील गंगा में मुख धोकर, चन्दन बाडी चन्द्रमा त्यागे ||
पिस्सू घाटी त्रेशांक पर्वत पर, मिटाया असुरों का वर्चस्व |
शेषनाग की महिमा न्यारी, मिटे कष्ट पाप सर्वस्व ||
पंचतरनी में माँ गंगा का, पञ्च तत्त्वों का त्याग किया |
अनंतनाग में बाबा भोले का, भक्तों ने जयकार किया ||.
गुफा में बाबा ने माँ को, अमरकथा से तृप्त किया |
अमरकथा सुन शुकदेव जी ने, भावमग्न अमरत्व पिया ||
छड़ी मुबारक आई देखो, नमन करूँ में बारम्बार |
श्री चरणों में बाबा मेरा, करो शीश नमन स्वीकार ||
बालटाल से श्रीनगर, वापस लौटकर आये |
रात बिताई हाउस बोट में, सुबह को दिल्ली आये ||
करूँ प्रार्थना में ईश्वर से, सभी को शक्ति प्रदान करें |.
प्राकृतिक सौन्दर्य के दर्शन, कर अपना कल्याण करें ||
संपत देवी मुरारका
हैदराबाद
बुधवार, 14 दिसंबर 2011
'जम्मू-वैष्णों माता' यात्रा
'जम्मू-वैष्णों माता' यात्रा
'जम्मू-वैष्णों माता' यात्रा
तीर्थाटन की मन में आई, निकल पड़े हम मस्ताने |
माँ बेटा मिल घूम के आवें, मन लगा बड़ा हर्षाने ||
भारत के सिर मोर मुकुट की, गाथा तुम्हें सुनाऊँ |
हरियाली नदी पर्वत मंदिर, क्या-क्या मैं बतलाऊँ ||
देख विहंगम दृश्य स्वर्ग का, भान हमें है कराती |
रावी, तवी, चिनाव के जल से, धरती ये हरियाती ||
बागे बाहू किला यहाँ पर,जहां तीन देवियाँ विराजे |
काली माँ जहां 'बवे काली माँ' लक्ष्मी वैष्णों दायें बाएं साजें ||
पीर बुधन अली शाह, सबके मन पर राज किये |
500 वर्ष दूध पर जिये, देह यहाँ फिर त्याग दिये ||
बागे बाहू उद्यान का देखो, अनुपम बड़ा नजारा |
450 केनाल धरा पर, बना हुआ है सारा ||
स्वर्णिम प्रकाश से आलोकित हो सबके मन को भाती |
किरणों जैसा तेज बिखरता एक अलौकिक छटा दिखाती ||
रवि-तनया तवी नदी के तट पर नन्हा सा हरिद्वार बस गया |
देव देवियों का द्वादश ज्योतिर्लिंग सहित शिव धाम बन गया ||
नदी चिनाब के तट का दृश्य मनोहारी कैसे वर्णन कर पाऊँ |
निहारते छवि कदम्ब-वृक्ष की फिर शिवधाम स्थान पर आऊँ ||
नैनाभिराम रघुनाथ मंदिर तेंतीस करोड़ देवों का सुलभ दर्शन |
सबसे बड़ा पारदर्शी जग-प्रसिद्ध स्फटिक-लिंग का आकर्षण ||
रणविरेश्वर मंदिर है ऊँचा, जहं शिव शालीग्राम के मध्य |
कटरा से ही त्रिकुट शिखर तक, वादियों के सुखद दृश्य ||
बाण गंगा, चरण-पादुका मंदिर दर्शन पुण्य अपार |
अर्ध -क्वांरी हाथी-मत्था ,सांझी-छत हो, आई दरबार ||
गंगा की जलधार नहा कर जा पहुँची मैं माता के द्वार |
चरण गंगा का करूँ आचमन, दर्शन करुँ मैं बारम्बार ||
नमन करूँ देवी श्री चरणों में, भक्तों का माँ करे उद्धार |
मिलता रहे बुलावा मुझको, माँ के दर्शन का हर बार ||
सलाल डेम, शिवखोरी, घाटियाँ मन मोहित कर जायेँ |
हाथी के सर मुकुट त्रिकुट का, दर्शन चित्त चुराएँ ||
रोमांचकारी अनुभवों को शब्द नहीं दे पाई हूँ |
विस्तृत लेख लिखे, कविता में नहीं पिरो पाई हूँ ||
संपत देवी मुरारका
हैदराबाद
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