बुधवार, 14 दिसंबर 2011

'जम्मू-वैष्णों माता' यात्रा

'जम्मू-वैष्णों माता'  यात्रा 











'जम्मू-वैष्णों माता'  यात्रा 

तीर्थाटन की मन में आई, निकल पड़े हम मस्ताने |
माँ बेटा मिल घूम के आवें, मन लगा बड़ा हर्षाने || 
भारत के सिर मोर मुकुट की, गाथा तुम्हें सुनाऊँ |
हरियाली नदी पर्वत मंदिर, क्या-क्या मैं बतलाऊँ ||
देख विहंगम दृश्य स्वर्ग का, भान हमें है कराती |
रावी, तवी, चिनाव के जल से, धरती ये हरियाती  ||
बागे बाहू किला यहाँ पर,जहां तीन देवियाँ विराजे |
काली माँ जहां 'बवे काली माँ' लक्ष्मी वैष्णों दायें बाएं साजें ||
पीर बुधन अली शाह, सबके मन पर राज किये |                   
500 वर्ष दूध पर जिये, देह यहाँ फिर त्याग दिये ||                          
बागे बाहू उद्यान का देखो, अनुपम बड़ा नजारा |
450 केनाल धरा पर, बना हुआ है सारा ||
स्वर्णिम प्रकाश से आलोकित  हो सबके मन को भाती |
किरणों जैसा तेज बिखरता एक अलौकिक  छटा दिखाती ||
 रवि-तनया तवी नदी के तट पर नन्हा सा हरिद्वार बस गया |
 देव देवियों का द्वादश ज्योतिर्लिंग सहित शिव धाम बन  गया ||
 नदी चिनाब  के तट का दृश्य मनोहारी कैसे वर्णन कर पाऊँ |
निहारते छवि कदम्ब-वृक्ष की फिर शिवधाम स्थान पर आऊँ ||
नैनाभिराम रघुनाथ मंदिर तेंतीस करोड़ देवों का सुलभ दर्शन |
 सबसे बड़ा  पारदर्शी  जग-प्रसिद्ध स्फटिक-लिंग का आकर्षण ||
रणविरेश्वर मंदिर है ऊँचा, जहं शिव शालीग्राम के मध्य |
कटरा से ही त्रिकुट शिखर तक, वादियों के सुखद दृश्य ||
बाण गंगा, चरण-पादुका  मंदिर दर्शन पुण्य अपार |
 अर्ध -क्वांरी हाथी-मत्था ,सांझी-छत हो, आई दरबार ||
गंगा की जलधार नहा कर जा पहुँची मैं माता  के द्वार |
चरण गंगा का करूँ आचमन, दर्शन करुँ मैं बारम्बार ||
नमन करूँ देवी श्री चरणों में, भक्तों का माँ करे उद्धार |
मिलता रहे बुलावा मुझको, माँ के दर्शन का हर बार ||
सलाल डेम, शिवखोरी, घाटियाँ मन मोहित कर जायेँ |
हाथी के सर मुकुट त्रिकुट का, दर्शन चित्त  चुराएँ ||
रोमांचकारी अनुभवों को शब्द नहीं दे पाई हूँ |
विस्तृत लेख लिखे, कविता में नहीं पिरो पाई हूँ ||

संपत देवी मुरारका 
हैदराबाद 

4 टिप्‍पणियां:

  1. तीर्थाटन के साथ कविता की प्रेरणा भी.... बहुत खूंब॥

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  2. वैष्णोदेवी के सुंदर यात्रा वर्णन सुंदर चित्र मनमोहक पोस्ट.....
    मेरी रचना पढ़ने के लिए काव्यान्जलि मे click करे

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  3. चंद्रमोलेश्वर जी, धीरेन्द्र जी, रचना को सराहा, मेरा मनोबल बढ़ाया, मैं ह्रदय से आभारी हूँ |
    धन्यवाद |

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