शनिवार, 25 जुलाई 2020

वैश्विक ई-संगोष्ठी

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वेब, ऑनलाइन,  वीडियो,  वर्चुअल, लाइव आदि  के भारतीय भाषाओं में उचित पर्याय, 
कुछ और विचार ।


कोरोना - काल में तेजी से उभर कर आए ऐसे माध्यम जहाँ बिना मिले, संवाद, बैठक, संगोष्ठी, चर्चा,  कार्यशाला, कक्षा, शिक्षण-प्रशिक्षण, प्रस्तुति व चर्चा आदि हो सकें, उनके लिए अंग्रेजी के अनेक शब्द भी  सामने आए हैं जो अब तक भारतीय भाषाओं में प्रचलित शब्दों को भी रौंद सकते हैं । इसलिए यह आवश्यक है कि हम समय रहते ऐसे शब्द बनाएँ जो सार्थक होने के साथ-साथ व्यापकता लिए हों, सरल व स्पष्ट हों, पूर्व प्रचलित हों और जिनके आसानी से चलने की संभावना भी हो। इस संबंध में मैंने 'ई' उपसर्ग का सुझाव रखा था, जिससे ऐसे अनेक शब्द बन सकें।  

'ई' मैं इलेक्ट्रॉनिक, इंटरनेट और इंट्रानेट  तीनों का समावेश है। विस्तार की दृष्टि से 'वेब' इनके मुकाबले कहीं भी नहीं टिक पाता। दूसरी बात यह है कि यदि वेब को वर्ल्ड वाइड वेब माना जाए तो उसमें भी लिखित, ऑजियो - वीडियो और सजीव (Live) प्रस्तुति  यानी तीनों का समावेश होता है और यहाँ इलेक्ट्रॉनिक, इंटरनेट और इंट्रानेट में  भी इन तीनों का समावेश है। हालांकि इलेक्ट्रॉनिक, इंटरनेट और इंट्रानेट  इन तीनों में  ह्रस्व 'इ'  है इसलिए  इसमें 'ई' के बजाय 'इ' का प्रयोग होना चाहिए  था, लेकिन बोलने की सुविधा और प्रचलन के चलते हुए 'ई' का प्रयोग संगत प्रतीत होता है।

भविष्य के अन्य माध्यमों के लिए भी इनका प्रयोग आसानी से हो सकेगा जबकि आगामी प्रौद्योगिकी में 'वेब' का प्रयोग हो यह आवश्यक नहीं। तो फिर हम असीमित संभावनाओं वाले उपसर्ग  'ई'  को क्यों न चुनें। एक शब्द अथवा अनुसर्ग से विभिन्न अर्थछायाएंँ व अवधारणाएँ होती हैं।  

इलैक्ट्रॉनिक, इंटरनेट तथा इंट्रानेट आदि के अनेक माध्यमों से जो प्रस्तुतियाँ औ उससे जुड़े जो प्रमुख शब्द सामने आ रहे हैं  वे हैं -  वेबिनार में वेब,  ऑनलाइन डिस्कशन में ऑनलाइन,  वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में वीडियो,  वर्चुअल मीटिंग में  वर्चुअल , फेसबुक लाइव में लाइव आदि । यदि हम इनके लिए केवल 'ई' का प्रयोग करें तो इनसे बनने वाले वर्तमान और भविष्य के सभी तमाम शब्दों में प्रयोग किया जा सकेगा। 
उदाहरण 
वेबिनार  ई- संगोष्ठी, 
वीडियो  कॉन्फ्रेंसिंग - ई - बैठक, ई - सम्मेलन आदि
ऑनलाइन डिस्कशन  - ई - चर्चा
वर्चुअल मीटिंग  - ई - बैठक
वर्चुअल क्लास - ई - कक्षा
व्हाट्सैप, फे़ेसबुक, ट्विटर आदि पर होने वाली चर्चा - ई - चर्चा / ई - संवाद
इस प्रकार उपरोक्त सभी माध्यमों पर ( लिखित, वाचिक अथवा श्रव्य-दृश्य या जीवंत) - ई- व्याख्यान, ई - कार्यशाला, ई- काव्य गोष्ठी, ई-प्रस्तुति, ई- परिचर्चा, ई-काव्य पाठ, ई-प्रतियोगिता, ई-संबोधन, ई-संवाद आदि अनेक शब्द बनाए और प्रयोग में लाए जा सकेंगे। हम अंग्रेजी के शब्दानुवाद व अनुसरण तक क्यों सीमित रहें।
डॉ. एम.एल. गुप्ता आदित्य
निदेशक, वैश्विक हिंदी सम्मेलन 
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ई-संगोष्ठी का विचार सर्वथा उचित और व्यावहारिक है; छोटी - अल्पकालीन बैठकों के लिए ई-बैठक का उपयोग भी किया जा सकता है I यद्यपि, लगता है वेबिनार शब्द काफी प्रचलन में आ गया है, फिर भी अभी देरी नहीं हुई है I वर्तमान में भी ई-पाठशाला आदि कई शब्द स्वीकार किये जा चुके हैं I सादर
डा. महावीर Dr. Mahavir
प्रोफ़ेसर - नियोजन Professor of Planning, संकाय अध्यक्ष - शैक्षिक Dean (Academic), , 
योजना  तथा वास्तुकला विद्यालय, School of Planning and Architecture,  (संसद के अधिनियम के तहत राष्ट्रीय महत्व का संस्थान)
4 - बी, इंद्रप्रस्थ एस्टेट, नई दिल्ली 110002 भारत,  Phone + 91 11 23702375-80 Extn. 206, +91 11 23350879, FAX    + 91 11 23702383
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ई कभी भी इलेक्ट्रिकल के लिए प्रयुक्त नहीं हुआ ,यह सिर्फ इलैक्ट्रोनिक के लिए ही मान्य है। ई का प्रयोग संगोष्ठी आदि आयोजन के लिए उपयुक्त नहीं है। यदि आपको संजाल संगोष्ठी में आपत्ति है तो दूरस्थ संगोष्ठी पर विचार किया जा सकता है। दूरस्थ  distance के लिए प्रयुक्त होता है। भारत में कभी घर बैठे पढाई करने की पद्धति को पत्राचार पाठ्यक्रम कहा जाता था , कहीं उसे दूरवर्ती शिक्षा भी कहते थे।बाद में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय ने अमेरिकी पद्धति पर डिस्टेंस एजुकेशन का पी जी डिप्लोमा शुरू किया ,जिसका में भी विद्यार्थी रहा को हिंदी में दूरस्थ शिक्षा शब्द स्वीकार किया गया। दूरस्थ शिक्षा में वीडियो कांफ्रेंसिंग सहित आधुनिक सोशल मीडिया के अभिकरण शामिल हैं, से प्रतिभागात्मक शिक्षण एवं संवाद शामिल है।आप चूंकि सभी विशेषज्ञ विद्वान हैं, इसलिए किसी भी शब्द के प्रयोग के लिए स्वतंत्र हैं। फिर भी हमें शब्द निर्माण की मानक प्रक्रिया भी ध्यान में रखने का प्रयास करना चाहिए।
हरि सिंह पाल, महासचिव, नागरी लिपि परिषद
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(ई-संगोष्ठी  ) मैं भी सहमत हूँ, 
डॉ प्रतिभा सोलंकी, प्राध्यापक हिंदी, माता जीजाबाई शा स्नातकोत्तर कन्या महाविद्यालय इंदौर म प्र 
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सबको यथायोग्य अभिवादन मेरा
तर्क तो ई - संगोष्ठी का ही ठीक है, बोलने में आसान है वेबिनार, शायद इसलिए अधिक पसंद किया गया।
निर्देश निधि
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असमंजस और तनाव अभी शेष है | अंतिम रूप से क्या निर्णय हुआ ? वेबिनार को क्या कहा जाए ?   धन्यवाद,
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भारत में  :-- -- आज तक जितने वेबिनार मैंने  किया है अधिकतर में -- दबे - कुचले  - प्रताड़ित हिन्दी शिक्षक-शिक्षिका वर्ग --(आज के आधुनिक समय में भी तथाकथित अंग्रेंजी अधिकारियों द्वारा  हर कदम पर जिनके साथ लगातार  अन्याय किया जा रहा है) को ही हिन्दी समस्याओं के लिए दोषी ठहराया जा रहा है ( और ये बातें वे करते हैं जिनके विभागों ने लगभग सत्तर सालों से देश में भ्रष्टाचार और लूट के कीर्तिमान स्थापित किए हैं)  जबकि हिन्दी भाषा-भाषी हिन्दी  अध्यापक - अध्यापिकाओं  द्वारा किये गये रचनात्मक कार्यों का कोई सानी भी नहीं है -- किसी  विभाग के अधिकारी- कर्मचारी हमारी  खुली चुनौती स्वीकार नहीं कर रहे हैं  ??? जिस तरह घुसपैठ किया जाता है == आज कल अंग्रेजी माध्यम के फैशन में हिन्दी शिक्षण और हिन्दी संवर्धन-विकास से संबंधित विभागों में गैर हिन्दी भाषियों की भरमार हो गई है---  जहाँ-जहाँ हिन्दी भाषा- भाषी हैं वहां कीर्तिमान बन रहा है  --  पर खाड़ी देशों में हिन्दी विभागाध्यक्षों    के अधिकतर पद दक्षिण भारतीयों द्वारा कब्जा करके हिन्दी का बंटाधार किया जा रहा है  ---- हिन्दी को राष्ट्र भाषा बनाने के लिए क्या किया जाए--- संपर्क भेजिएगा-- +919428075674 
डॉ. अशोक कुमार तिवारी, हिंदी शिक्षक, दुबई
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अत्यंत खेदजनक बात है कि इस समूह में हिंदी के मूर्धन्य विद्वान अभी तक ई और वेब का हिंदी पर्याय नहीं ढूंढ पा रहे हैं । अंततः हमारी मानसिकता अंग्रेजी के इर्द-गिर्द ही घूम रही है कि अगर अंग्रेजी में यह कहा जा रहा है तो इसको हिंदी में क्या कहेंगे । आल इंडिया रेडियो व टेलीविजन का हिंदीकरण अखिल भारतीय ध्वनितरंग वार्ता नहीं की गई थी, बल्कि हिंदी की आत्मा से आकाशवाणी, दूरदर्शन व प्रसार भारती जैसे शुद्ध और आकर्षक शब्द लिए गए थे । परंतु अगर हम ई व् वेब नहीं लगाएंगे तो हाईलि एजुकेटेड कैसे कहलाएंगे । इसलिए बंधुओं अंग्रेजी का मोह छोड़कर संस्कृत या कोई भारतीय शब्द ढूंढिए जो सर्वत्र स्वीकार्य हो सके । मैंने तो शब्द  दिया था, नभवार्ता ।
डॉ. राजेश्वर उनियाल, पूर्व उपनिदेशक ( राजभाषा) , केंद्रीय मात्यिकी शिक्षण संस्थान।
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आदरणीय आप सभी लोग प्रणम्य हैं । चर्चा ई संगोष्ठी  ओर वेबिनार की है । यूँ तो कोई आपत्ति  नही। अन्यान्य शब्दों के प्रयोग   से  शब्द समृद्ध की श्रीवृद्धि ही  होगी । परन्तु   वेबिनार   कहने से सेमिनार   की तरह  अंग्रेज़ीयत का आभास होता है । ई शब्द स्टेशन की तरह हिन्दी में शामिल हो  गए हैं इसीलिये  ई संगोष्ठी का प्रयोग बहुतायत से होना चाहिये । वैसे लोगों की मर्ज़ी जो अच्छा लगे प्रयोग करने के लिये स्वतंत्र हैं । सधन्यवाद 
डा मञ्जरी पाण्डेय 
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सर, मुझे लगता है कि, ई के प्रयोग का आधार E (ई) रहा होगा होगा। जो कि Electrical और Electronic का प्रथम अक्षर है।  इलेक्ट्रिकल व इलेक्ट्रोनिक के उच्चारण में ह्रस्व (इ) आता है।  यदि (इ) रखा जाएगा तो यह अङ्ग्रेज़ी में इसके समतुल्य I(आई) मान जाएगा जो कि गलत होगा। अतः दीर्घ (ई) ही ई मेल, ई पत्रिका, ई संगोष्ठी अथवा ई गोष्ठी प्रयोग किया जाए तो ठीक रहेगा। यह तर्कसंगत भी है। बोलने, लिखने, ग्रहणशीलता व व्यापक उपयोग की दृष्टि से भी यह उचित जान पड़ता है।
बृजनन्द विश्वकर्मा, प्रबंधक . राजभाषा , बैंक ऑफ इंडिया चेन्नई

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वैश्विक हिंदी सम्मेलन, मुंबई
वेबसाइट- वैश्विकहिंदी.भारत /  www.vhindi.in

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संपर्क - vaishwikhindisammelan@gmail.com



प्रस्तुत कर्ता : संपत देवी मुरारका, विश्व वात्सल्य मंच
murarkasampatdevii@gmail.com  
लेखिका यात्रा विवरण
मीडिया प्रभारी
हैदराबाद
मो.: 09703982136

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