शनिवार, 25 जुलाई 2020

वैश्विक ई-संगोष्ठी भाग - 4

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वैश्विक ई-संगोष्ठी भाग - 4 
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  आभासी माध्यमों पर कार्यक्रमों के लिए उचित शब्द पर कुछ और विचार ।  
वेबिनार के लिए हिंदी पर्याय पर चल रही परिचर्चा को पूरा पढ़ लेने तथा अपनी बौद्धिक क्षमताओं का प्रयोग करते हुए मैं इस निष्कर्ष पर पहुँचा हूँ कि वेबिनार के लिए ई-संगोष्ठी शब्द सर्वथा उचित होने के कारण अब हमें स्वीकार और प्रचारित करना चाहिए| यह अपने भीतर भविष्य की संभावनाओं तथा अन्य मिलती-जुलती संकल्पनाओं को भी समाहित करने में सक्षम  है| यह संकर शब्द अब धीरे-धीरे प्रचलित भी होने  लगा है|
डॉ. रवि शर्मा 'मधुप'
एसोसिएट प्रोफेसर, हिंदी विभाग,
श्री राम कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स, दिल्ली विश्वविद्यालय|

ई- संगोष्ठी उचित है।
डॉ. अनुराधा शर्मा,  सहायक प्राध्यापक
पत्रकारिता एवं जन संचार

गुरुदेव को सादर नमस्कार, बहुत बढ़िया जानकारी दी आपने जो कि ज्ञान को और समृद्ध करती है, महोदय आपका आत्मिक आभार  
अनामिका रोहिल्ला

ई संगोष्ठी,ई सम्मेलन ,ई परिचर्चा शब्द अनुकूल और सौम्य प्रतीत होते हैं सुग्राह्य भी हैं।  बैठक शब्द को मेलनम्  से बदला जा सकता है । वर्चुअल के स्थान पर बिम्ब शब्द का प्रयोग कर सकते हैं। लाइव के स्थान पर "जारी "शब्द का प्रयोग कर सकते है और ऑनलाइन के स्थान पर  ईस्थित का प्रयोग कर सकते है 
सुष्मा शर्मा
जहां तक ' वेबिनार ' के लिए शब्द-चयन की बात है,संस्कृत में इसके लिए 'अन्तर्जालीय संगोष्ठी/सम्मेलन' शब्द व्यवहृत होता है। हिंदी चूंकि हमारी बोलचाल की भाषा है इसलिए इसके लिए सरल शब्द ई- संगोष्ठी/  ई-सम्मेलन/  ई-परिचर्चा  इत्यादि का प्रयोग किया जा सकता है। इसका कारण मुखसुख/ प्रयत्नलाघव/ मुखसौकर्य  मानना चाहिए। इससे भाषाविज्ञान में नये आयाम जुड़ेंगे/ खुलेंगे और विभिन्न नूतन शब्दों का निर्माण करने में सुविधा होगी।ई-प्रत्यय से निर्मित शब्दों से मिश्र भाषा के शब्दों के उदाहरण बहुतायत से प्राप्त होंगे।
नवीन उद्भावनाओं का स्वागत कर उन पर विचार अपेक्षित है।
डॉ मैत्रेयी कुमारी ,असिस्टेंट प्रोफेसर ,
कमला नेहरू महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, नयी दिल्ली-४९

हिन्दी की शब्दावली के प्रयोग से ही हमारी राष्ट्रभाषा मजबूत होगी। यही वर्तमान समय की आवश्यकता है।
आचार्य पं रामकुमार शर्मा 
संस्कृत प्रवक्ता, दिल्ली शिक्षा निदेशालय दिल्ली 

इसमें शामिल सभी विद्वानों के विचार मैंने पढ़ें। मुझे तो सबसे अधिक प्रचलन में आने लायक ई उपसर्ग से बनाये जाने वाले शब्द ही लगे,मसलन: ई.वार्ता,ई.संगोष्ठी,ई.चर्चा,ई.साक्षात्कार,ई.पत्रिका और फिर ई.मेल का प्रयोग तो हम कर ही रहे हैं। वैसे हमारी ये ई.चर्चा सार्थक नतीजे तक ले ही जायेगी...
आप सभी का धन्यवाद
 रावेल पुष्प
सम्पादकीय विभाग, वैचारिकी, (अन्तर्राष्ट्रीय शोध पत्रिका), 
भारतीय विद्या मंदिर, कोलकाता- 700087.
सम्पर्क: 9434198898. कोलकाता

एक छोटा सा निवेदन मेरा भी है कि वेबीनार को "तरंग वार्ता" या "तरंग चर्चा" भी तो कहा जा सकता है।
यह भी विचारणीय है कि हम वेबिनार के हिन्दी विकल्पों पर चर्चा तो कर रहे हैं लेकिन अंग्रेजी माध्यम से पढ़े लिखे लोगों के बीच इसे प्रचलित कैसे कर पाएंगे? हमारा शब्द बस हमारे दायरे में ही सीमित होकर न रह जाए इसके लिए क्या उपाय है?

 विजयलक्ष्मी
भारत बने भारत अभियान
विजयनगर, इंदौर
 

इसीलिए बहुत विचार करके भाषाविदों व प्रौद्योगिकीविदों के अतिरिक्त सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श करके वर्तमान और भविष्य के सभी माध्यमों को ध्यान में रखते हुए, सभी आभासी स्वरूपों पर ( लिखित, श्रव्य, श्रव्य-दृश्य तथा सजीव)  प्रयोगों के लिए 'ई' उपसर्ग को चुना गया है। ज्यादातर लोगों ने ई-संगोष्ठी पर सहमति जताई है। इसके प्रयोग से संबंधित अनेक शब्द बन जाएँगे।
और हाँ, यह शब्द चलने लगा है....।  हमें इसे अपनाने के लिए कोशिश तो करनी पड़ेगी।
डॉ. एम.एल. गुप्ता आदित्य
निदेशक, वैश्विक हिंदी सम्मेलन






 वैश्विक हिंदी सम्मेलन, मुंबई
वेबसाइट- वैश्विकहिंदी.भारत /  www.vhindi.in


प्रस्तुत कर्ता : संपत देवी मुरारका, विश्व वात्सल्य मंच
murarkasampatdevii@gmail.com  
लेखिका यात्रा विवरण
मीडिया प्रभारी
हैदराबाद
मो.: 09703982136 

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