बुधवार, 14 नवंबर 2012

काव्यपाठ और कथाकथन कार्यक्रम संपन्न


काव्यपाठ और कथाकथन कार्यक्रम संपन्न

काव्यपाठ और कथाकथन कार्यक्रम संपन्न

दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के खैरताबाद स्थित सम्मेलन कक्ष में काव्यपाठ एवं कथाकथन कार्यक्रम आयोजन किया गया | इसमें कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के साहित्यकार डॉ. अशोक भाटिया का सम्मान किया गया | कार्यक्रम की अध्यक्षता अंग्रेजी और विदेशी भाषा विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. एम. वेंकटेश्वर ने की | संचालन ‘श्रवंती’ की सह-संपादक डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा ने किया |

आज यहाँ जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, ‘कथाकथन’ के अंतर्गत अतिथि रचनाकार अशोक भाटिया ने अपने भीतर का सच, तीसरा चित्र, रिश्ते, रंग, पीढ़ी दर पीढ़ी और श्राद्ध जैसी लघुकथाओं का भावपूर्ण वाचन किया | साथ ही उन्होंने अपनी कुछ कविताएँ भी प्रस्तुत की | चर्चा में उनकी रचना ‘जिंदगी की कविता’ के इस अंक को खूब सराहा गया | ‘कविता/धरैतिन के हाथों से होकर/तवे पर पहुंचती है/तो बनती है रोटी/ जहां कहीं भी कविता है/ वहां जीवन का/ जिन्दा इतिहास रचा जा रहा है |’ पठित लघुकथाओं पर डॉ. एम वेंकटेश्वर, डॉ. राधेश्याम शुक्ल, लक्ष्मीनारायण अग्रवाल, आशीष नैथानी, पवित्रा अग्रवाल, वेत्सा पांडुरंगा राव, संपत देवी मुरारका, ऋतेश सिंह, अशोक तिवारी, डॉ. सीमा मिश्र, वी. कृष्ण राव और नागेश्वर राव ने समीक्षात्मक टिप्पणियाँ कीं |

आयोजन पत्रिका ‘भास्वर भारत’ के तत्वावधान में हुआ | आरम्भ में आर. राजा राव ने मंगलाचरण किया | आगंतुकों के परिचय और स्वागत-सत्कार की जिम्मेदारी समारोह के संयोजक प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने निभाई |
संपत देवी मुरारका
मीडिया प्रभारी
हैदराबाद


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