गुरुवार, 15 फ़रवरी 2018

[हिन्दी-भारत] हिंदी के प्रति भारत सरकार और अधिकारियों की हिकारत और प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारियों की (ना)समझ इस चित्र में दिखती है:


हिंदी के प्रति भारत सरकार और अधिकारियों की हिकारत और प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारियों की समझ इस चित्र में दिखती है:

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भवदीय,
प्रवीण कुमार जैन (एमकॉम, एफसीएस, एलएलबी)
कम्पनी सचिववाशीनवी मुम्बई – ४००७०३.

Regards,
Praveen Kumar Jain (M.Com, FCS, LLB), 
Company Secretary, Vashi, Navi Mumbai  400703.

प्रस्तुत कर्ता : संपत देवी मुरारका, विश्व वात्सल्य मंच
murarkasampatdevii@gmail.com  
लेखिका यात्रा विवरण
मीडिया प्रभारी
हैदराबाद
मो.: 09703982136

15 वाँ अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन, रूस - मास्को सार्वजनिक · Jayprakash Manas द्वारा होस्ट किया गया


15 वाँ अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन, रूस - मास्को

सार्वजनिक
 · Jayprakash Manas द्वारा होस्ट किया गया

विवरण

सहभागिता हेतु पंजीयन आमंत्रण
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी और हिंदी-संस्कृति को प्रतिष्ठित करने के लिए बहुआयामी साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था सृजन-सम्मान, छत्तीसगढ़/साहित्यिक वेब पत्रिका सृजनगाथा डॉट कॉम (www.srijangatha.com]) द्वारा, विभिन्न सहयोगी संस्थाओं के आत्मीय सहयोग से किये जा रहे प्रयास के अनुक्रम में रायपुर, बैंकाक, मारीशस, पटाया, ताशकंद (उज्बेकिस्तान), संयुक्त अरब अमीरात, कंबोडिया-वियतनाम, श्रीलंका, चीन, नेपाल, मिस्र, असम-शिलांग तथा बाली (इंडोनेशिया) तथा राजस्थान में 14-14 अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलनों के सफलतापूर्वक आयोजन के पश्चात अब रूस (मास्को तथा सेंट पीटर्सबर्ग) में 01 जून 2018 से 9 जून, 2018 तक 7 दिवसीय 15 वें अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन का आयोजन सुनिश्चित किया जा रहा है ।

सम्मेलन में हिंदी के चयनित/आधिकारिक विद्वान, अध्यापक, लेखक, भाषाविद्, शोधार्थी, संपादक, पत्रकार, संगीतकार, गायक, नृत्यकार, चित्रकार, बुद्धिजीवी एवं हिंदी सेवी संस्थाओं के सदस्य, हिन्दी-प्रचारक, हिंदीब्लागर्स, टेक्नोक्रेट आदि स्वैच्छिक सहभागिता और विधिवत पंजीयन के आधार पर भाग लेंगे ।

सम्मेलन का मुख्य उद्देश्यदेश-विदेश में सृजनरत स्थापित-नवागत रचनाकारों को जोड़कर स्वंयसेवी आधार पर भाषायी-संस्कृति का प्रचार-प्रसार, साहित्य की सभी विधाओं और उसमें सक्रिय रचनाकारों का प्रजातांत्रिक सम्मान, भाषायी सौहार्द्रता, विविध भाषाओं की रचनाशीलता से परस्पर तादात्म्य और श्रेष्ठता का अनुशीलन व सम्मान, ज्ञानात्मक सहिष्णुता के लिए सकारात्मक प्रयास, विभिन्न देशों/प्रदेशों का साहित्यिक-सांस्कृतिक-सामाजिक-वैकासिक अध्ययन-परीक्षण-पर्यटन सहित वैश्वीकरण की जगह वसुधैव कुटुम्बकम् की भारतीय परंपरा को प्रोत्साहित करना है ।

प्रस्तावित अकादमिक आयोजन–
1.अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का केंद्रीय विषय – विश्व मानवतावाद की संस्कृति
2.अंतरराष्ट्रीय रचना पाठ- कहानी /लघुकथा/एकांकी/संस्मरण/निबंध अंशपाठ
3. सर्वभाषा रचना पाठ - समकालीन कविता/गीत/नवगीत/ग़ज़ल/बाल कवितापाठ

प्रस्तावित दिन-समय-स्थल
-2 जून, 2018 – प्रातः 9 बजे से रात्रि 10.30 बजे तक

-7 जून, 2018 - प्रातः 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक
सेंट पीटर्सवर्ग

प्रस्तावित महत्वपूर्ण आयोजन
1.प्रतिभागी चित्रकारों की पेंटिग प्रदर्शनी/फोटो/पत्रिका प्रदर्शनी
2.प्रतिभागी रचनाकारों की कृतियों का विमोचन
3.प्रतिभागियों का प्रतीकात्मक सम्मान
4.रूस में सृजनरत हिंदीसेवियों/रचनाकारों का सम्मान

रूस में प्रस्तावित सांस्कृतिक आयोजन
1.सुप्रसिद्ध कत्थक नृत्यांगना डॉ. चित्रा जांगिड़ (जयपुर) का राजस्थानी नृत्य
2.सुप्रसिद्ध नृत्याँगना डॉ. काजल मूले (भावनगर, गुजरात) द्वारा कत्थक प्रस्तुति
3. रूस के स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुति

महत्वपूर्ण स्थलों का पर्यटन, अध्ययन, अनुशीलन
।। Moscow ।।
Gorky House
Red Square
Saint Basil's Cathedral, is a church
Karl Marx and Friedrich Engels Museum
Kremlin Armory Museum
State Tretyakov Gallery
Poklonnaya Gora
Fili
Kaluzhskaya Zastava
The house of the Rostovs on Povarskaya
The house of Prince Bolkonsky on Vozdvizhenka,
The building of the former English club on Tverskaya
Etc

।। Petersburg ।।
Pushkin palace
Veliky Novgorod
kremlin and Cathedral State hermitage museum
Jetty on the Neva River
City tour with Neva River Cruise
Nevsky Prospekt
Etc


प्रतिभागियों को पुरस्कार
01.गिरिजा कुमार पांडेय स्मृति सम्मान 2018 – 51,000 (उर्दू / हिंदी ग़जल)
02.सृजनगाथा डॉट कॉम सम्मान 2018 – 11,000 (कविता/कहानी)
03.सिन्धु रथ स्मृति सम्मान 2018 – 11,000 (महिला लेखन)
04.श्री सलेकचंद जैन स्मृति सम्मान 2018 – 11,000 (विधागत श्रेष्ठता)
05.प्रो. सहदेव सिंह स्मृति सम्मान 2018– 11,000(समाजशास्त्रीय लेखन)
06.नये पाठक सम्मान 2018 – 5,000 रुपये (गीत/नवगीत/ग़ज़ल/छंद लेखन)
07.मेजर दिवजोत कौर चावला स्मृति सम्मान 2018 – 5000 (पहली कृति)
08.डॉ. प्रमोद वर्मा स्मृति सम्मान 2018 – 5000 (सम. कविता संग्रह)
09.डॉ. प्रमोद वर्मा स्मृति सम्मान 2018 – 5000 (आलोचना)
10.शोध ऋतु सम्मान 2018 – 2100 (सर्वोत्कृष्ट शोध आलेख)
11.पूर्वोत्तर साहित्य विमर्श सम्मान 2018 - 2100 (लघुपत्रिका/संपादन)
12.गुरु जम्भेश्वर सम्मान 2018 – 7,000 (पर्यावरण लेखन)
13. राजकुमारी स्मृति साहित्य यात्रा सम्मान 2018- 4100(सर्वो. शोध आलेख)
13.राष्ट्र भारती सम्मान 2018 - किसी भी विधा पर
14.सृजनगाथा लाईफ़ टाईम एचीवमेंट सम्मान (संपूर्ण व्यक्तित्व व कृतित्व)
15.अन्य प्रतीकात्मक सम्मान एवं पुरस्कार

पंजीयन कैसे करायें ?
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में स्वेच्छा से भाग लेने हेतु इच्छुक एवं स्वयंसेवी प्रतिभागी निम्नांकित दस्तावेज़ भेजकर पंजीयन शुल्क सहित विस्तृत पंजीयन विवरण जयप्रकाश मानस, संयोजक, अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन, एफ-3, आवासीय परिसर, छ.ग. माध्यमिक शिक्षा मंडल, पेंशनवाड़ा, रायपुर, छत्तीसगढ़ – 492001, मो.-7000405751 के नाम केवल ईमेल-srijangatha@gmail.com से प्राप्त कर सकते हैं ।

1.स्वेच्छा से सहभागिता राशि जमा कर पंजीयन कराने हेतु सहमति पत्र
2.अंतिम रूप से चयन होने पर सम्मेलन-नियमावली पालन हेतु सहमति पत्र
3.जीवित पासपोर्ट के प्रथम पृष्ठ की छायाप्रति
4. बायोडेटा
5. फ़ोटोग्राफ़

पंजीयन की अंतिम तिथि -
दिनांक 15 फरवरी 2018 (या उसके पूर्व निर्धारित केवल निर्धारित संख्या चयनित सहभागियों के पंजीयन पूर्ण होने की तिथि) है :-

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अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन के पदाधिकारी

डॉ. खगेन्द्र ठाकुर
अध्यक्ष
अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन
पटना, मो.-09431102736

डॉ. रंजना अरगड़े
वरिष्ठ उपाध्यक्ष अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन
अहमदाबाद, मो.-9426700943

श्री अशोक माहेश्वरी
वरिष्ठ उपाध्यक्ष, अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन
नई दिल्ली, मो.- 09810289836

विशेष आमंत्रित/मार्गदर्शन-
1. डॉ. गंगा प्रसाद विमल, दिल्ली, मो.-08826235548
2. श्री विभूति नारायण राय, वर्धा, मो.-09730071826
3. श्री उद्भ्रांत, नई दिल्ली, मो.- 9818854678
4. श्री धनंजय सिंह, गाजियाबाद, मो.-09810685549
5. डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र, देहरादून, मो.- 09412992244
6. श्री शंभु बादल, हज़ारीबाग, मो. - 09905697007
6. डॉ. कुसुम खेमानी, कोलकाता, मो.-9831027178
7. श्री एकांत श्रीवास्तव, कोलकाता, मो.-9433135365
8. श्रीप्रकाश मिश्र, इलाहाबाद, मो.- 09451142647

संरक्षक
1. श्री विश्वरंजन, पूर्व पुलिस महानिदेशक, छग सरकार, रायपुर, मो.- 94241-82664
2. श्री महेश द्विवेदी, पूर्व पुलिस महानिदेशक, उप्र. सरकार, लखनऊ, मो.- 9415063030
3. श्री (कर्नल) रतन जांगिड़, अकादमी सम्मानित कथाकार, जयपुर, मो.- 960228555
4. डॉ.शरद पगारे, वरिष्ठ उपन्यासकार, इंदौर, मो.-9406857388
6. श्री विनोद पाशी, श्रीलंका में भारत के पूर्व राजनयिक एवं कवि
7. श्री सुधाकर अदीब, लखनऊ, मो.- 94150 39777

अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी संयोजक
श्री सवाई सिंह शेखावत, जयपुर, मो.-9636298846

राज्य संयोजक
दिल्ली
श्रीमती आभा चौधरी, मो.- 9650740990
गुजरात
डॉ. नैना डेलीवाला, अहमदाबाद, मो.- मो-09327064948
डॉ. अख़्तर खान पठान, अहमदाबाद मो.- 9427358056
पंजाब/हरियाणा
डॉ. जसवीर चावला, चंडीगढ़, मो-9417237593
महाराष्ट्र और गोवा
डॉ. सुनील जाधव, नांदेड, मो.-09405384672
विदर्भ प्रदेश
डॉ. मीनाक्षी जोशी, भंडारा, मो.- 9823315230
श्री कृष्ण नागपाल, नागपुर, मो-9325378457
मध्यप्रदेश
श्री राकेश अचल, ग्वालियर, मो.-9826217795
डॉ. संदीप नाडकर्णी, उज्जैन, मो- 9406618808
श्री मुकेश जोशी, उज्जैन, मो.- 9926300973
राजस्थान
श्रीमती किरणबाला जीनगर, उदयपुर, मो- 9680280226
डॉ. मनोहर श्रीमाली, उदयपुर, मो.- 9414648739
सर्वश्री मारवाड रतन देवकिशन राजपुरोहित, अजमेर मो.- 96102 99299
स्वामी शिवज्योतिषानंद, अजमेर, मो.- 9414739329
श्री बी. के. कोमल, माउंटआबू, मो.- 9413384884
श्री शरद टाक, माउंटआबू, मो.- 9414103050
उत्तरप्रदेश
डॉ. अनिल मिश्रा, इलाहाबाद, मो.- 9918533500
उत्तरांचल
डॉ. सविता मोहन, देहरादून, मो-09412008090
श्री नीरज नैथानी, श्रीनगर गढ़वाल, मो.-9412949894
श्री जयकिशन पैन्युली, टिहरी गढ़वाल, मो.-8859049293
छत्तीसगढ़
श्री सेवा शंकर अग्रवाल, सरईपाली, मो.- 9425211453
श्री मुमताज, भिलाई, मो.-9755819100
श्री प्रवीण गोधेजा, रायपुर, मो.-9630000779
बिहार
डॉ. अशोक कुमार प्रसाद, भागलपुर, मो.- 9473191925
कर्नाटक-तमिलनाडू-आ.प्र.-तेलंगाना
श्री मथुरा कलौनी, बेंगलूर, मो.9900566480
प्रो. बी. वै.ललिताम्बा, बैंग्लोर, मो.- 9448856174
पांडिचेरी
डॉ. जयशंकर बाबु, पुदुच्चेरी, मो.-09843508506
केरल
डॉ. सोफिया मात्यु, अलप्पुषा, मो. -8907752151
ओडिसा
श्री के. के. प्रजापति, राऊरकेला, मो.- 9437044680
श्रीमती मंजूलता त्रिपाठी, कटक, मो. - 9437089270
डॉ.कनक मंजरी साहू, भुवनेश्वर, मो.-9439750378
पूर्वोत्तर
श्री मिथिलेश कुमार सिन्हा, कोहिमा, मो.-9436006435
मिजोरम
डॉ. संजय कुमार, मिजोरम, मो. – 9402112143
असम
डॉ. हरेऱाम पाठक, मो.- डिग्बोई, मो.- 9435137624
नागालैंड
डॉ. कुमार वरुण, कोहिमा, मो.- 7308670316

विदेश के समन्यवक
मारीशस
डॉ. रेशमी रामधोनी, अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष,
पोर्टलुई, ईमेल- reshmi3mu@yahoo.com
श्री विनय गुदारी, राज्य संयोजक, पोर्टलुई, ईमेल- vinaye08@gmail.com

नेपाल
श्री कुमद अधिकारी, इटहरी, मो.-977984-2061482

डेनमार्क
चांद हदियाबादी
डेनमार्क, ईमेल-chaandshukla@gmail.com

ब्रिटेन
श्री प्राण शर्मा
ईमेल- sharmapran4@gmail.com

अमेरिका
श्री आदित्य प्रताप सिंह
डैलास, ईमेल- adityapsingh@aol.com

न्यूजीलैंड
श्री रोहित कुमार
आकलैंड, ईमेल- editor@bharatdarshan.co.nz

श्रीलंका
अतिला कोतलावला
इंडियन कल्चर सेंटर,कोलंबो



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समन्वय/संपर्क
जयप्रकाश मानस
समन्वयक, अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन
संपादक, www.srijangatha.com
एफ-3, छगमाशिम, आवासीय परिसर, पेंशनवाड़ा
रायपुर, छत्तीसगढ़-492001
मो.-7000405751
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प्रस्तुत कर्ता : संपत देवी मुरारका, विश्व वात्सल्य मंच
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लेखिका यात्रा विवरण
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शनिवार, 23 दिसंबर 2017

अंग्रेज़ी वह भाषा नहीं है जिसमें हमारा देश चिन्तन कर सके। प्रो. अमरनाथ



प्रिय मित्र,

पिछले कुछ समय से आप सब भारतीय चिन्तन के विषय में अध्ययन करते आ रहे हैं। यह चिन्तन बहु-आयामी हैं, इसलिए एक सिरे से क्रमिक रूप से समझने का प्रयास न करके उसे अनेक कोणों से देखना उपयोगी रहेगा। इसलिए हम अपने इस प्रयास में भारतीय चिन्तन के विभिन्न पक्षों के कुछ अंश आपकी सेवा में प्रस्तुत करते रहे हैं। उनमें असम्बद्धता प्रतीत होने पर भी आप पाएँगे कि वे सब अन्ततोगत्वा किसी एक आन्तरिक सत्य को पहचानने में हमारी सहायता करते हैं।                                                       
                                                                                                                               भवदीय
                                                                                                                          अनिल विद्यालंकार

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अंग्रेज़ी वह भाषा नहीं है जिसमें हमारा देश चिन्तन कर सके।

भाषा 
हम लोग सोचना प्रारंभ कर सकें इसके लिए माध्यम के रूप में एक भाषा का होना आवश्यक है। यह स्पष्ट है कि अंग्रेज़ी वह भाषा नहीं है जिसमें हमारा देश चिन्तन कर सके। पिछले चुनाव में यह बात सामने आई कि देश में चुनाव लड़ने की भाषा व्यापक रूप से हिन्दी है। नरेन्द्र मोदी ने सिवाय तमिलनाडु के सारे देश में अपने भाषण हिन्दी में दिए और उन्हें व्यापक सराहना और जनसमर्थन मिला। हम आशा करते हैं कि नई सरकार देश के संविधान के अनुसार अपना मूल काम हिन्दी में करेगी। अवश्य ही जिस भाषा में देश में चुनाव जीता जा सकता है उसमें देश का शासन भी चलाया जा सकता है।
पर भाषा किसी देश की सरकार चलाने का वाहन ही नहीं है वह उस देश की अस्मिता का प्रतीक है और उस देश की संस्कृति और परंपरा की वाहिका   है। अंग्रेज़ी के आधिपत्य ने भारतीयों को संस्कारविहीन कर दिया है और उन्हें अपनी परंपरा से काट दिया है। इस स्थिति को तुरंत बदलना आवश्यक है।

शिक्षा 
किसी भी देश के निर्माण में शिक्षा का सबसे बड़ा योगदान है पर अपने देश में यह विषय सबसे उपेक्षित रहा है। 1966 में प्रो दौलत सिंह कोठारी ने शिक्षा आयोग की प्रस्तावना के पहले वाक्य में लिखा थाऱ " भारत की नियति उसके विद्यालयों में लिखी जा रही है। संपादक की प्रो कोठारी से कुछ निकटता थी। उनके अंतिम वर्ष बड़ी निराशा में बीते क्योंकि वे देख रहे थे कि इतने परिश्रम से शिक्षा आयोग की जो रिपोर्ट उन्होंने तैयार की थी उसके सुझावों पर कोई ध्यान नहीं दे रहा। नई सरकार   तेज़ी से साथ आर्थिक सुधार लाने का प्रयास कर रही है। ये सुधार बहुत आवश्यक हैं और देश की निर्धनता को दूर करने के लिए जितना जल्दी कारगर कदम उठाए जाएँ उतना ही अच्छा है। पर हमें ध्यान रखना चाहिए कि आर्थिक प्रगति से देशवासियों के शरीर का ही भला होगा मनुष्यों के मन का निर्माण शिक्षा से होता है। यदि नरेन्द्र मोदी देश का वास्तविक विकास चाहते हैं तो उन्हें शिक्षा पर व्यक्तिगत ध्यान देना होगा।  

शिक्षा के क्षेत्र में जो काम सबसे पहले किया जाना चाहिए वह है मानव संसाधान मंत्रालय को शिक्षा मंत्रालय में बदलना। मानव संसाधन का विकास शिक्षा   का एक बहुत छोटा -सा हिस्सा है। पूरी शिक्षा को मानव संसाधन विकास की दृष्टि से देखना मनुष्य के जीवन को बहुत ही संकुचित दृष्टि से देखने का परिणाम है। देश में अच्छी गुणवत्तावाले वैज्ञानिक ,इंजिनियर डाक्टर प्रबंधक आदि हों यह शिक्षा - व्यवस्था का एक आवश्यक कर्तव्य है। पर समग्र मनुष्य की शिक्षा इस सीमित उद्देश्य से कहीं अधिक व्यापक है।
इस प्रसंग में शिक्षा में भारतीय विचारों पर बल दिया जाना आवश्यक है। हमारी शिक्षा - व्यवस्था में रवीन्द्रनाथ टैगोर श्री अरविन्द महात्मा गांधी और जे कृष्णमूर्ति जैसे विचारकों की उपेक्षा होती रही है। इन मनीषियों के विचारों पर आधारित छिटपुट संस्थाएँ काम कर रही हैं पर अब समय आ गया है कि उनके विचारों को मुख्य धारा में लाया जाए क्योंकि इन विचारों की आवश्यकता केवल भारत को ही नहीं सारे विश्व को है। इस समय अमेरिकी विचारों की नकल पर दी जा रही शिक्षा हमारे बच्चों को एकांगी बना रही है। अच्छी शिक्षा का एकमात्र उद्देश्य मानो बच्चों को अधिक से अधिक पैसा कमाने में समर्थ बनाना हो गया है। बच्चों को सर्वांगीण शिक्षा देने में भारतीय चिन्तकों के विचारों को केन्द्र में रखना आवश्यक है।   

राष्ट्रीय स्वाभिमान 
हमें लगता है कि पिछले चुनाव के बाद भारतीयों को भारतीय होने का अवसर मिलेगा। आज़ादी के बाद हमारा देश बाहरी विचारों के आधार पर चलता रहा है। प्रारंभ में जवाहरलाल नेहरू रूस की नियोजित अर्थव्यवस्था से बहुत प्रभावित थे। रूस का व्यापक प्रभाव भारत की अर्थनीति पर पड़ा। नेहरूजी वामपंथी थे जोकि उस समय स्वीकार्य होना चाहिए था पर उनकी सामूहिक अर्थनीति का नेतृत्व ऐसे लोगों के हाथ में चला गया जिनमें से अनेक सार्वजनिक प्रायोजनाओं के माध्यम से स्वार्थसिद्धि में लग गए क्योंकि वहाँ बिना किसी योग्यता के थोड़े ही समय में धनी बन सकना संभव हो गया।

रूस से ही प्रभावित होकर देश के कुछ भागों में साम्यवादी विचारधारा फैली। मौका मिलने पर साम्यवादी प्रभाव देश की शिक्षा पर पड़ा। देश का इतिहास साम्यवादी दृष्टिकोण से लिखा जाकर बच्चों को पढ़ाया जाने लगा। हमारे बच्चे यह सीखने को बाध्य हो गए कि उनकी संस्कृति के संस्थापक वैदिक ऋषि या तो संसार से भागनेवाले लोग थे या फिर सुरापन में अपने आपको खोकर गीत गानेवाले लोग। उनके ये गीत ही वेदमंत्रों के रूप में प्रचलित हो गए।   प्राचीन भारत जिसने विश्व भर की मानव - सभ्यता की नींव डाली केन्द्रीय सरकार की शिक्षा के माध्यम से एक प्रकार का अंधायुग बन गया। वे लोग इतिहास के विद्वान बन गए जिन्हें वह भाषा संस्कृत नहीं आती थी जिसने इस देश का इतिहास बनाया है।

दूसरी ओर अमेरिका ने भी शिक्षा के क्षेत्र में अपने कदम बढ़ाए। हमारी उच्च शिक्षा अमेरिका की नकल पर आधारित हो गई। नए - नए विषय विश्वविद्यालयों में स्थान पाने लगे जिनका कोई औचित्य नहीं था। उन क्षेत्रों में रिसर्च की जाने लगी जिनमें कितना भी प्रयास करने पर रिसर्च हो ही नहीं सकती। अमेरिकी विद्वान भारतीय शिक्षा आकाश पर छा गए। दर्शन मनोविज्ञान और भाषाविज्ञान जैसे विषय जिनमें भारत की हज़ारों वर्ष की परंपरा रही है पिछले सौ - दो सौ वर्ष में ही विकसित हुए अमेरिकी चिन्तन के आगे झुकने को बाध्य कर दिए गए। यह प्रभाव अभी भी दूर नहीं हुआ है।
​ 
संक्षेप में भारतीयों को भारतीय होने में संकोच होने लगा मानो भारतीय होना हीन मनुष्य होना हो।

आज़ादी के बाद से एक व्यापक धारणा संसार भर में फैली है कि भारतीय लोग महत्त्वाकांक्षा से शून्य हैं। संसार में सम्मानपूर्ण स्थान बनाने की कोई इच्छा उनमें नहीं है। कोई भी उनको दबा सकता है। उनमें आत्मसम्मान नाम की कोई चीज़ नहीं है। वे अपनी प्राचीन संस्कृति की झूठी शेखी बघारते हैं और मानते हैं कि वे संसार के आध्यात्मिक गुरु हैं जबकि उनका वैयक्तिक और सामाजिक जीवन बहुत निकृष्ट है। भ्रष्टाचार में वे संसार के सभी देशों को मात दे सकते हैं।

भारतीयों में अपनी भाषाओं के लिए कोई सम्मान नहीं है। वे गुलामी की भाषा अंग्रेज़ी से चिपके हुए हैं जबकि वे अंग्रेज़ी में कोई गंभीर विचार दुनिया को नहीं दे सके हैं। विचारों के क्षेत्र में वे बुरे नकलची हैं। नई खोज या नए आविष्कारों के क्षेत्र में उनका योगदान नगण्य है। कुल चालीस वर्ष पहले भारत और चीन आर्थिक विकास की सीढ़ी पर समान स्थान पर थे। आज चीन और भारत की तुलना करने का कोई अर्थ नहीं रह गया है।

इन आरोपों में कुछ सच्चाई है। संपादक को संसार के अनेक देशों में जाने का और वहाँ विचार - विनिमय करने का अवसर मिला है। वहाँ के लोग यदि सुनना चाहते हैं तो केवल भारतीय दर्शन और अध्यात्म के बारे में। वे यह मान बैठे हैं कि आधुनिक ज्ञान के क्षेत्र में भारत कोई योगदान नहीं कर सकता। यदि विभिन्न देशों में योग के विषय में व्यापक रुचि न जगी होती तो भारत में रुचि रखनेवाले लोग संसार में इनेगिने ही रह जाते।अंग्रेज़ी में एक उक्ति ही चल गई थी " We are like this only." हिन्दी में भी कहा जाने लगा था हम तो ऐसे ही रहेंगे। परिवर्तन की कोई आशा तो दूर प्रयास भी दिखाई नहीं देता था।

नई सरकार से लोगों में व्यापक परिवर्तन की आशाएँ बँधी हैं। किसी सीमित समय में कोई भी सरकार सभी वांछनीय परिवर्तन नहीं ला सकती पर आम जनता को यह विश्वास होना चाहिए कि सरकार देश की समस्याओं पर ध्यान दे रही है और उन्हें हल करने के लिए कृतसंकल्प है।
भारत के लोगों ने बहुत आशा से नई सरकार चुनी है। उस आशा को पूरा करना सरकार का कर्तव्य है।
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​अनुलग्नक :भाषा - विमर्श ​2017
कोलकाता से प्रकाशित पत्रिका
( भारतीय भाषाओं के संघर्ष का दर्पण )
संपादक : प्रो. अमरनाथ 

अवश्य पढ़े।

वैश्विक हिंदी सम्मेलन, मुंबई
-- 
वैश्विक हिंदी सम्मेलन की वैबसाइट -www.vhindi.in
'वैश्विक हिंदी सम्मेलन' फेसबुक समूह का पता-https://www.facebook.com/groups/mumbaihindisammelan/
संपर्क - vaishwikhindisammelan@gmail.com

प्रस्तुत कर्ता : संपत देवी मुरारका, विश्व वात्सल्य मंच
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