सोमवार, 19 दिसंबर 2016

*चेंज डॉट ओआरजी* विधि जैन

आप सभी को प्रणाम

मैंने कुछ दिन पहले *चेंज डॉट ओआरजी* (www.change.org)वेबसाइट पर एक बहुत ही *महत्वपूर्ण विषय* पर एक याचिका शुरू की है। भारत सरकार ने हाल ही में *विमुद्रीकरण* की घोषणा की थी और उसके बाद भारत की अर्थव्यवस्था को *कम नकदी वाली *अर्थव्यवस्था* बनाने के लिए सरकार *डिजिटल लेनदेन* को बढ़ावा दे रही है।

जैसा की आप सभी जानते हैं, कुछ अपवाद छोड़कर, भारत के *सभी बैंक एवं डिजिटल सेवाएं* प्रदान करने वाली *कंपनियां* अपनी सभी सेवाएं केवल *एकमात्रभाषा* अंग्रेजी में *उपलब्ध करवाती है, हम और आप लोग *अंग्रेजी* जानते हैं इसलिए इनका इस्तेमाल कर पाते हैं, पर देश के लगभग *नब्बे प्रतिशत* लोग ऐसे हैं जो *अंग्रेजी* ना तो समझ सकते हैं और ना ही *अंग्रेजी में उपलब्ध* सेवाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं।
 
क्या आपको नहीं लगता है कि यह लोगों के साथ *भाषाई आधार* पर एक तरह का *भेदभाव* है? जिस पर हमने पहले कभी ध्यान नहीं दिया!
 
हम सरकार से मांग करें कि वह सभी सरकारी एवं निजी बैंकों एवं *डिजिटलसेवाएं* प्रदान करने वाली कंपनियों के लिए यह अनिवार्य करें कि वह अपनी सभी बैंकिंग सेवाएं, जैसे नेटबैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग एप, मोबाइल सन्देश (एस एम एस अलर्ट) एवं ई-बटुआ आदि भारत की सभी प्रमुख भाषाओं में उपलब्ध करवाएं और *भारत* में कार्यरत *सभी बैंकों के लिए अनिवार्य होना चाहिए कि वह खाता खोलते समय ग्राहकों से पूछें कि वे बैंक की सेवाएं किस *भारतीय भाषा* में प्राप्त करना चाहते हैं? उसके बाद ग्राहक बैंक के लिए बैंकिंग की सभी सेवाएं ग्राहक द्वारा *चुनी गई भाषा  में उपलब्ध करवाना अनिवार्य हो।

हमें इसके लिए एक लाख हस्ताक्षरों की आवश्यकता है, लक्ष्य कठिन अवश्य है पर असंभव नहीं। आप सभी ने इतना समय दिया उसके लिए मैं आप सभी का आभार मानती हूं और उम्मीद करती हूं कि आप इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर मेरा साथ देंगे।

सबसे पहले इस लिंक पर जाकर मेरी याचिका पर हस्ताक्षर करें:

*हिंदी में याचिका*: change.org/bankingservicesinou rlanguage

*अंग्रेजी में याचिका:*

https://www.change.org/p/we-th e-people-want-banking-services -in-our-languages
<https://www.change.org/p/we-t he-people-want-banking-service s-in-our-languages&gt;*

धन्यवाद✍
विधि जैन, मुंबई

ईमेल पता: *विधिजैन@डाटामेल.भारत*
-- 
डाटामेल - विश्व का पहला भाषाई ईमेल पता। गूगल प्लेस्टोर पर उपलब्ध।
प्रस्तुति: प्रवीण जैन.
प्रस्तुत कर्ता : संपत देवी मुरारका, विश्व वात्सल्य मंच
murarkasampatdevii@gmail.com  
लेखिका यात्रा विवरण
मीडिया प्रभारी
हैदराबाद
मो.: 09703982136 

रामेश्वर सिंह के हैदराबाद आगमन पर स्नेह मिलन समारोह संपन्न ता.18-अक्टूबर 2016







रामेश्वर सिंह के हैदराबाद आगमन पर स्नेह मिलन समारोह संपन्न

 एम वेंकटेश्वर और गुर्रमकोंडा नीरजा सहित 7 लेखकों को अंतर्राष्ट्रीय हिंदी भास्कर, 2 को हिंदी रत्नाकर  तथा रामेश्वर सिंह को संस्कृति सेतु सम्मान प्रदत्त |

"हिंदी केवल भारत की ही नहीं विश्व की बेहद शक्तिशाली भाषा है जो बहुत बड़े जन समुदाय को तरह-तरह की भिन्नताओं के बावजूद जोड़ने का काम करती है । मैंने देश-विदेश की अपनी साहित्यायिक यात्राओं में कभी भी अकेलापन अनुभव नहीं किया है, क्योंकि हिंदी मेरे साथ हमेशा रहती है । आज जब विश्व पटल पर भारत और रूस के मैत्री संबंध नई दिशा की ओर बढ़ रहे हैं, ऐसे समय भारतीय रूसी मैत्री संघ 'दिशा' के संस्थापक डॉ. रामेश्वर सिंह का हैदराबाद में सम्मान तथा उनकी संस्था की ओर से भारत के कुछ हिंदी सेवियों का सम्मान हिंदी के माध्यम से परस्पर मैत्री को मजबूत बनाने की खातिर एक सराहनीय कदम है,"
 
यह विचार अग्रणी तेलुगु साहित्यकार प्रो. एन. गोपी ने रूसी-भारतीय मैत्री संघ "दिशा" (मास्को), साहित्यिक-सांस्कृतिक शोध संस्था (मुंबई) तथा 'साहित्य मंथन' (हैदराबाद) के संयुक्त तत्वावधान में आंध्र प्रदेश हिंदी अकादमी के सभा कक्ष में संपन्न 'स्नेह मिलन एवं सम्मान समारोह' की अध्यक्षता करते हुए प्रकट किए ।

इस अवसर पर मास्को से आए डॉ रामेश्वर सिंह को श्रीमती लाडो देवी शास्त्री की पावन स्मृति में प्रवर्तित "साहित्य मंथन संस्कृति-सेतु सम्मान :2016" प्रदान किया गया । अपने कृतज्ञता भाषण में डॉ. रामेश्वर सिंह ने कहा कि कोई भी भाषा अपने बोलने वालों के दम पर विकसित होती है और विश्व भर में हिंदी अपने प्रयोक्ताओं की बड़ी संख्या तथा अपनी सर्वसमावेशी प्रकृति के कारण निरंतर विकसित हो रही है, अतः आने वाले समय में सांस्कृतिक से लेकर कूटनैतिक संबंधों तक के लिए हिन्दी को बड़ी भूमिका अदा करनी है।

'दिशा' और 'शोध संस्था' की ओर से डॉ.आर. जयचंद्रन (कोचिन) और डॉ. मुकेश डी. पटेल (गुजरात) को "हिन्दी रत्नाकर अंतर्राष्ट्रीय सम्मान" से तथा डॉ. बाबू जोसेफ (कोट्टायम) डॉ. एम. वेंकटेश्वर (हैदराबाद) डॉ.अनिल सिंह (मुंबई) डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा (हैदराबाद) डॉ.वन्दना पी पावसकर (मुंबई) डॉ.सुरेंद्र नारायण यादव (कटिहार) और डॉ.कांतिलाल चोटलिया (गुजरात) को "हिन्दी भास्कर अंतर्राष्ट्रीय सम्मान" से अलंकृत किया गया ।  पुरस्कृत साहित्यकारों ने हिंदी भाषा के प्रति अपने पूर्ण समर्पण का संकल्प जताया ।

कार्यक्रम के प्रथम चरण में आगंतुक और स्थानीय साहित्यकारों के परस्पर परिचय के साथ 'चाय पर चर्चा' का अनोपचारिक दौर चला तथा दूसरे चरण में सम्मान समारोह संपन्न हुआ । आरंभ में स्वस्ति-दीप प्रज्वलित किया गया तथा कवयित्री ज्योति नारायण ने वंदना प्रस्तुत की । साहित्यिक-सांस्कृतिक शोध संस्था के सचिव डॉ. प्रदीप कुमार सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया और विश्व मैत्री के लिए हिंदी की संभावित भूमिका पर विचार प्रकट किए ।

अपनी सक्रिय भागीदारी और उपस्थिति से चर्चा-परिचर्चा को जीवंत बनाने में डॉ. बी. सत्यनारायण, डॉ.अहिल्या मिश्र, डॉ रोहिताश्व, डॉ करंण सिंह  ऊटवाल, वुल्ली कृष्णा राव, डॉ. बी.  बालाजी, डॉ मंजू शर्मा, डॉ बनवारी लाल मीणा, प्रभा कुमारी, मो. आसिफ अली, प्रवीण प्रणव, शशि राय, भँवरलाल उपाध्याय, जी.परमेश्वर, पवित्रा अग्रवाल, लक्ष्मीनारायण अग्रवाल,  डॉ राजेश कुमार, संपत देवी मुरारका, डॉ.मोनिका शर्मा,  वर्षा, डॉ. सुनीला सूद, डॉ.राजकुमारी सिंह, टी. सुभाषिणी, संतोष विजय, अशोक तिवारी, आलोक राज, शरद राज, श्रीधर सक्सेना, श्रीनिवास सावरीकर, डॉ रियाज अंसारी, मदन सिंह चारण और डॉ. पूर्णिमा शर्मा आदि ने महत्वपूर्ण योगदान किया ।
 प्रस्तुति : नीरजा गुर्रमकोंडा 
प्रस्तुत कर्ता : संपत देवी मुरारका, संस्थापक अध्यक्ष : विश्व वात्सल्य मंच
murarkasampatdevii@gmail.com  
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मीडिया प्रभारी
हैदराबाद
मो.: 09703982136

शनिवार, 17 दिसंबर 2016

ता. ३१-१-२०१६



प्रस्तुति : संपत देवी मुरारका (विश्व वात्सल्य मंच)
email: murarkasampatdevii@gmail.com
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मीडिया प्रभारी
हैदराबाद
मो.: 09703982136

हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए समन्वित रूप से प्रयास की आवश्यकता : समाचार कतरन-स्वतंत्र वार्ता

प्रस्तुति : संपत देवी मुरारका (संस्थापक अध्यक्ष, विश्व वात्सल्य मंच)
email: murarkasampatdevii@gmail.com
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मीडिया प्रभारी
हैदराबाद
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बुधवार, 14 दिसंबर 2016

मंगलवार, 13 दिसंबर 2016

सुब्रमण्यम भारती के जन्मदिन पर चेन्नई में भारतीय भाषा जनजागरण अभियान कार्यक्रम आयोजित















 

सुब्रमण्यम भारती के जन्मदिन पर चेन्नई में भारतीय भाषा जनजागरण अभियान कार्यक्रम आयोजित

तमिल को तमिलनाडु की राज्य भाषा और हिंदी को भारत की राष्ट्रभाषा बनाए जाने और भारतीय भाषाओं की प्रचार-प्रसार के संकल्प के साथ चेन्नई के वर्ल्ड यूनिवर्सिटी सर्विस सेंटर में भारतीय भाषा प्रेमियों का एक सम्मेलन संपन्न हुआ । इस अवसर पर तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय सुश्री जयललिता को भावभीनी श्रद्धांजली अर्पित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि स्वर्गीय सुश्री जयललिता न केवल दक्षिण भारत की भाषाओं में पारंगत थी बल्कि वे हिंदी की भी बहुत अच्छी वक्ता थीं |

मुंबई के हिंदी कल्याण न्यास’, ‘वैश्विक हिंदी सम्मेलनऔर चेन्नई की तमिलनाडु हिंदी साहित्य अकादमी’, हैदराबाद की 'विश्व वात्सल्य मंच', 'राजस्थानी एसोसिएशन' और विश्व जैन सभाआदि विभिन्न भारतीय भाषा प्रेमी संस्थाओं द्वारा महाकवि सुब्रमण्यम भारती के जन्मदिवस पर आयोजित इस सम्मेलन में दक्षिण के राज्यों के अतिरिक्त कई अन्य राज्यों से प्रतिनिधियों ने भाग लिया और कहा कि हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित रूप से प्रयास किए जाने की आवश्यकता है । कार्यक्रम का शुभारम्भ तमिल वंदना से हुआ |

हिंदी कल्याण न्यासके राष्ट्रीय अध्यक्ष बिजय कुमार जैन ने कहा कि हमें पूरे देश में जन-जागरण करते हुए हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलवाने के लिए पूरी शक्ति से प्रयास करने हैं । उन्होंने कहा कि इसके लिए देश के विभिन्न भागों में जन-जागरण अभियानों का आयोजन किया जा रहा है । उन्होंने यह भी बताया कि भारत के गृह मंत्री माननीय राजनाथ सिंह जी ने दसवें विश्व हिंदी सम्मेलन में स्वयं यह स्वीकार किया था कि हिंदी को भारत की राजभाषा नहीं बल्कि राष्ट्रभाषा होना चाहिए था ।

वैश्विक हिंदी सम्मेलन, मुंबई के निदेशक डॉ. एम एल गुप्ता आदित्यने कहा कि संविधान और विधान में राष्ट्रीय संपर्क भाषा और राज्यों की संपर्क भाषा के प्रावधान न होने के कारण देश के लगभग 95% लोग जो अंग्रेजी नहीं जानते वे विभिन्न कानूनों के अंतर्गत अपेक्षित सूचना व जानकारी के अभाव में अपने कानूनी अधिकारों से वंचित रह जाते हैं। इसलिए उनके साथ हर कदम धोखा होता है, उनका शोषण होता है । यह लोकतांत्रिक मूल्यों के भी प्रतिकूल है। इसलिए आवश्यक है कि राष्ट्र और राज्य के स्तर पर कानूनी प्रावधानों के निष्पादन के लिए संपर्क भाषा का प्रावधान किया जाना चाहिए । 

विख्यात समाजसेवी कृष्णचंद चोरडिया ने कहा कि चेन्नई में हिंदी शिक्षण व जन-जागरण के
कार्य के लिए यहाँ एक कार्यालय स्थापित करके सुनियोजित प्रयास किए जाने चाहिए । उन्होंने इसके लिए स्थान उपलब्ध करवाने की पेशकश भी की । डॉ. मधु धवन, संस्थापक अध्यक्ष 'विश्व वात्सल्य मंच' संपत देवी मुरारका, सज्जनराज मेहता, पार्थ सारथी, पी.डी. मिश्रा, धन्यकुमार बिराजदार तथा कांतिलाल शाह आदि वक्ताओं ने भी तमिलनाडू में हिंदी को प्रमुखता देते हुए हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने को राष्ट्रीयता के लिए आवश्यक बताया । वक्ताओं ने तमिलनाडु में तमिल के प्रयोग के साथ-साथ हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने की माँग की और इन्हें रोजगार से जोड़ने पर जोर दिया । 

इस अवसर पर मदन देवी पोकरणा, राजेश मुरारका, रविता भाटिया, मंजू रुस्तगी, पार्वती एवं कई गणमान्य बुद्धिजीवी उपस्थित थे| संचालन मधु धवन जी ने किया एवं धन्यवाद ज्ञापित किया ।

प्रस्तुति:  संपत देवी मुरारका
लेखिका: यात्रा विवरण
संस्थापक अध्यक्ष: विश्व वात्सल्य मंच
मीडिया प्रभारी
हैदराबाद
मो. नं. 09703982136

'निरभै होइ निसंक कहि के प्रतीक' डॉ. प्रेमचंद्र जैन, ऋषभदेव शर्मा


'निरभै होइ निसंक कहि के प्रतीक' डॉ. प्रेमचंद्र जैन

गुरुग्रंथ "निरभै होइ निसंक कहि के प्रतीक" गुरुवर डॉ.प्रेमचंद जैन को समर्पित किया गया | 3 दिसंबर 2016: गलगोटिया विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा | दायें से : डॉ.ऋषभदेव शर्मा, डॉ.निर्मला शर्मा, डॉ.गुर्रमकोंडा नीरजा, डॉ.हेमलता राठौर, डॉ.प्रेमचंद जैन (बैठे हुए), डॉ.देवराज, डॉ.जसवीर सिंह राणा, डॉ.कृष्णावतार करुण, डॉ.अरविंद जैन, डॉ.महेश सांख्यधर 


जैन दर्शन, हिंदी साहित्य और अपभ्रंश भाषा के प्रख्यात विद्वान और विचारक गुरुवर डॉ. प्रेमचंद्र जैन अगले महीने आज ही की तारीख को उन्यासीवें वर्ष में प्रवेश करेंगे. आज है 3 दिसंबर 2016. अर्थात गुरुजी का जन्म 3 जनवरी, 1939 ई. को हुआ. जन्म स्थान ग्राम नगला बारहा, जनपद बदायूँ, उत्तर प्रदेश.
पिता श्री शोभाराम जैन निष्ठावान अध्यापक थे. उन्होंने अपने पुत्र को शिक्षा की मूल्यवान विरासत सौंपी, जिसे गुरुजी ने स्याद्वाद महाविद्यालय, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, पार्श्वनाथ विद्याश्रम शोध संस्थान और भगवान महावीर केंद्रीय संस्कृत विद्यापीठ में अध्ययन, स्वाध्याय और अनुसंधान द्वारा अनेकगुणित करके कृतार्थता प्राप्त की. साथ ही, आपके सारस्वत व्यक्तित्व के निर्माण में पंडित फूलचंद शास्त्री के पांडित्य, आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी के फक्कड़पन और डॉ. शिवप्रसाद सिंह की सर्जनात्मक मेधा का योगदान अविस्मरणीय है. यही कारण है कि आप इस गुरु-त्रिमूर्ति के गुण गाते नहीं थकते.  
1962 में बीए, ’63 में सिद्धांत शास्त्री, ’64 में एमए, ’68 में शास्त्री के उपरांत गुरुजी ने 1969 में पीएचडी उपाधि अर्जित की. आपका शोधप्रबंध ‘’अपभ्रंश कथाकाव्य एवं हिंदी प्रेमाख्यानक’’ 1975 में प्रकाशित हुआ जिससे आपको विद्वत्समाज में विशिष्ट ख्याति प्राप्त हुई. इस बीच 1972 में आपने नजीबाबाद, उत्तर प्रदेश के साहू जैन कॉलेज में हिंदी प्राध्यापक के रूप में नियुक्ति पाई और उसे ही अपना काबा-काशी मानकर वहीं के होकर रह गए. वहीं रहते हुए आपने अध्यापन, शोध, साहित्य सृजन तथा हिंदी सेवा के क्षेत्र में अनेक कीर्तिमान स्थापित किए एवं शिष्यों से लेकर आम जन तक में अनन्य लोकप्रियता प्राप्त की. यदि यह कहा जाए कि आप ही के कारण नजीबाबाद को हिंदी की सार्वदेशिक गतिविधियों के मानचित्र पर स्थायी पहचान मिली, तो अतिशयोक्ति न होगी. निश्चय ही इस उपलब्धि के पीछे उनके अनेक समर्पित साथियों का अविचल सहयोग विद्यमान रहा, जिनकी गाथाएँ गुरुजी सदा उल्लसित होकर सुनाते हैं.
गुरुवर डॉ. प्रेमचंद्र जैन ने अनेक कविताओं, ललित निबंधों और कुछ कहानियों का भी प्रणयन किया है जिनमें उनका दिल धड़कता सुनाई देता है. लेकिन उनकी विशेष प्रसिद्धि जैन दर्शन, अपभ्रंश भाषा और मध्यकालीन हिंदी  साहित्य के मर्मज्ञ अध्येता और व्याख्याता के रूप में है. उनके मौलिक और संपादित ग्रंथों में - अपभ्रंश कथाकाव्य एवं हिंदी प्रेमाख्यानक, रहस्यवादी जैन अपभ्रंश काव्य का हिंदी पर प्रभाव, हिंदी संत साहित्य में श्रमण साहित्य का योगदान,   हम तो कबहुँ न निज घर आए, पंडित जी, माता कुसुम कुमारी हिंदीतर भाषी हिंदी साधक सम्मान : अतीत एवं संभावनाएँ, बीहड़ पथ के यात्री – जैसी महत्वपूर्ण कृतियाँ शामिल हैं.
गुरुजी के भीतर-बाहर संत कबीर जैसी निर्भीकता और निःशंकता की सात्विक ऊर्जा लहराती है. यही कारण है कि अपने शिष्यों के लिए वे ‘’निरभै होइ निसंक कहि के प्रतीक’’ हैं.
[प्रस्तुति : डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा, सह-संपादक, ‘स्रवंति’, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, हैदराबाद-500004]
प्रस्तुत कर्ता : संपत देवी मुरारका, विश्व वात्सल्य मंच
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